UNI दफ़्तर पर पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल, पत्रकार संगठनों और राजनीतिक दलों ने की निंदा
राजधानी दिल्ली में United News of India (UNI) के रफ़ी मार्ग स्थित दफ्तर में हुई पुलिस कार्रवाई ने प्रेस की स्वतंत्रता, प्रशासनिक प्रक्रिया और लोकतांत्रिक मानकों को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने जिस तरह दफ्तर में प्रवेश कर पत्रकारों और कर्मचारियों को ज़बरन बाहर निकाला, उनके साथ धक्का-मुक्की की और परिसर को सील कर दिया, उसे लेकर प्रमुख पत्रकार संगठनों और राजनीतिक दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और कार्रवाई की प्रकृति, समय और तरीके पर सवाल उठाए हैं। इस पूरे प्रकरण को लेकर मोदी सरकार से जवाब मांगा गया है।
In an unprecedented atrocity and attack on freedom of media in India, the Rafi Marg office of the nation’s oldest news agency, United News of India (UNI), was literally attacked by a police force that would put an anti-terror operation to shame. Employees were not given time to… pic.twitter.com/O1H18imaPs
— The Statesman (@TheStatesmanLtd) March 20, 2026
प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया (PCI) ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरा रोष जताते हुए इसे “अत्यधिक सख़्ती और मनमाना” बताया। PCI के मुताबिक, कई पत्रकारों—जिनमें महिला पत्रकार भी शामिल थीं—को बल प्रयोग कर दफ्तर से बाहर निकाला गया और उन्हें अपना निजी सामान तक लेने की अनुमति नहीं दी गई। क्लब ने कहा कि काम करने का अधिकार एक बुनियादी संवैधानिक अधिकार है और किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई में मानवीय और विधिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था।
The Press Club of India expresses deep shock at the manhandling of journalists while at work at the United News of India (@uniindianews and @univartaindia1) premises on 9, Rafi Marg, New Delhi, by police last evening following a court order regarding a land dispute.
PCI condemns… pic.twitter.com/23FJepvrKn
— Press Club of India (@PCITweets) March 21, 2026
इसी तरह Delhi Union of Journalists (DUJ) ने भी इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की और इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया। DUJ ने आरोप लगाया कि पत्रकारों के साथ मारपीट की गई और उन्हें उनके कार्यस्थल से जबरन हटाया गया। संगठन ने मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी अधिकारियों के खिलाफ़ कार्रवाई की जाए।
राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सीपीआई-एम ने इस घटना को लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला बताते हुए कहा कि अदालत के आदेश की आड़ में इस तरह की जल्दबाज़ी और बल प्रयोग सत्ता के दुरुपयोग का संकेत देता है। पार्टी ने कहा कि बिना पर्याप्त नोटिस दिए और संवाद का अवसर दिए बिना की गई कार्रवाई लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ़ है। सीपीआई-एम ने पूरे मामले की पारदर्शी जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की।
Strongly condemn the shocking conduct of the Delhi Police and paramilitary forces at UNI’s Rafi Marg office, where journalists were allegedly dragged out and manhandled. Such high-handedness, denial of advance notice and time to gather personal belongings, and reported… pic.twitter.com/xOZCJbdn78
— M A Baby (@MABABYCPIM) March 21, 2026
सीपीआई के राज्यसभा सांसद पी संदोश कुमार ने इसे “प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला” करार दिया। उन्होंने कहा कि UNI के दफ्तर पर जिस तरह की कार्रवाई हुई, वह न केवल अभूतपूर्व है बल्कि यह भी दर्शाती है कि प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है। उनके अनुसार, पत्रकारों को घसीटकर बाहर निकाला गया, महिला कर्मचारियों के साथ भी दुर्व्यवहार की खबरें सामने आईं और कर्मचारियों को अपना सामान तक समेटने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को सत्ता के दुरुपयोग और मीडिया को डराने की कोशिश बताते हुए तत्काल जवाबदेही तय करने की मांग की।
The forcible takeover of the Rafi Marg office of United News of India (UNI), the oldest news agency in the country, by the Delhi Police is a grave and unprecedented assault on press freedom in India. Journalists were dragged and manhandled, even women journalists were not… pic.twitter.com/UG9cmRNNX4
— United News of India (@uniindianews) March 20, 2026
सीपीआई-एमएल के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने भी इस कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने पत्रकारों और कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की की और दफ्तर को सील कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रेस पर हमला इससे भी ज़्यादा शारीरिक हो सकता है, और चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाई को सामान्य नहीं बनने दिया जाना चाहिए।
Delhi Police rough up journalists and employees and seal #UNI office in Delhi. Could the attack on press get more physical? This police action must not be allowed to be normalised. #StandWithUNI #FreedomOfPress pic.twitter.com/LcyU1qZweC
— Dipankar (@Dipankar_cpiml) March 21, 2026
कांग्रेस ने इस कार्रवाई को “अभूतपूर्व” बताते हुए मोदी सरकार पर हमला किया है। कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि जिस तरह बिना पूर्व सूचना भारी पुलिस बल के साथ दफ्तर खाली कराया गया, वह लोकतांत्रिक ढांचे और मीडिया की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पार्टी ने इसे दमनकारी प्रवृत्ति का संकेत बताते हुए सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।
. @uniindianews के दफ्तर पर भाजपाई सरकार के हमले पर मेरा ब्यान 👇 pic.twitter.com/hxZReTU3uo
— Randeep Singh Surjewala (@rssurjewala) March 21, 2026
आम आदमी पार्टी (आप) ने भी इस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि पत्रकारों के साथ बल प्रयोग, बिना पर्याप्त सूचना दफ्तर खाली कराना और कर्मचारियों के साथ कथित बदसलूकी बेहद चिंताजनक है। पार्टी ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ़ कार्रवाई की मांग की।
इस पूरे विवाद के केंद्र में मौजूद यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (UNI- United News of India) ने खुद इस कार्रवाई को “अभूतपूर्व” बताया है। एजेंसी के मुताबिक, बिना किसी पूर्व सूचना के भारी पुलिस बल के साथ दफ्तर खाली कराया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें ज़बरदस्ती बाहर निकाला गया, उनके साथ बदसलूकी की गई और उन्हें अपना निजी सामान तक लेने की अनुमति नहीं दी गई। UNI ने यह भी कहा कि इस अचानक कार्रवाई से उसकी समाचार सेवा प्रभावित हुई है, जिससे उसके सैकड़ों ग्राहकों और कर्मचारियों पर असर पड़ा है।
The sealing of the office of United News of India (UNI), one of the country’s oldest and most respected news agencies, has raised serious concerns over press freedom.
📌 Staff members were forcibly evicted, with several not allowed to retrieve their personal belongings.
— United News of India (@uniindianews) March 20, 2026
आपको बता दें कि UNI भारत की एक बहुभाषी समाचार एजेंसी है। इसकी स्थापना 19 दिसंबर 1959 को एक अंग्रेजी समाचार एजेंसी के रूप में हुई थी। अपनी हिंदी समाचार सेवा 'यूनिवार्ता' के साथ, UNI विश्व की प्रमुख बहुभाषी समाचार सेवाओं में से एक बन गई। 1992 में, इसने अपनी उर्दू समाचार सेवा शुरू की और इस प्रकार उर्दू समाचार प्रदान करने वाली पहली समाचार एजेंसी बन गई। वर्तमान में, यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी समाचार एजेंसी है, जो अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू और कन्नड़ भाषाओं में समाचार प्रदान करती है। इसके समाचार ब्यूरो भारत के सभी राज्य राजधानियों और प्रमुख शहरों में मौजूद हैं।
कुल मिलाकर, इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्रशासनिक कार्रवाई और प्रेस की स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाए। जहां एक ओर अदालत के आदेश के पालन की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर कार्रवाई के तरीके और समय को लेकर गंभीर आपत्तियां सामने आई हैं।
फिलहाल, विभिन्न संगठनों और दलों की एक साझा मांग उभरकर सामने आई है—इस मामले की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी भी मीडिया संस्थान के साथ इस तरह की स्थिति दोबारा न बने। लोकतंत्र में प्रेस की स्वतंत्रता केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि एक आवश्यक शर्त है—और इस पर किसी भी तरह का सवाल व्यापक चिंता का विषय बन जाता है।
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