तिरछी नज़र: नए साल की ‘अच्छी’ ख़बरें
नव वर्ष की शुभकामनायें, मतलब बिलेटेड वाली। यह नया साल सबके लिए खुशियाँ लाये। सभी स्वस्थ रहें। बेरोजगारों को रोजगार मिले और सभी को महंगाई से मुक्ति। पेट्रोल पैंतालिस पर आ जाये और डॉलर साठ के आसपास बना रहे। आगे से नववर्ष सर्दियों में तो आए पर सर्दी और वायु प्रदुषण का गठजोड़ टूट जाये… कहीं मैं कुछ ज्यादा कामना तो नहीं कर रहा।
वैसे नया साल कुछ अच्छी खबरें ले कर नहीं आया है। अमेरिका वेनेज़ुएला में पहुंच गया है। वहां के नागरिकों को नववर्ष की शुभकामनायें देने। वहां के राष्ट्रपति महोदय ने शुभकामनायें लेने में थोड़ी आनाकानी की तो ट्रंप जी ने उन्हें पकड़ कर अमेरिका ही बुला लिया और नववर्ष की शुभकामनायें पर्सनली दीं। इससे शिक्षा मिलती है कि आगे से अमेरिकी राष्ट्रपति अगर नववर्ष की शुभकामनायें दें तो उसे स्वीकार करने में आनाकानी नहीं करनी चाहिए नहीं तो वे पकड़ कर अमेरिका बुला लेंगे और जेल में डाल देंगे। इस नववर्ष की यह पहली शिक्षा है।
दूसरी शिक्षा भी अमेरिका से ही सम्बंधित है। अमेरिका को दूसरे देशों की जनता की भलाई और उनके लोकतंत्र से बहुत प्यार है। नहीं, नहीं अपने देश की जनता से नहीं, कुछ दूसरे देशों की जनता से। विशेष रूप से ऐसे देशों की जनता से जहाँ की जमीन से तेल खूब निकलता हो। और साथ ही यह भी कि वहां की सरकार अमेरिका की पिट्ठू ना हो। अमेरिकी राष्ट्रपति, चाहे कोई से वाले रहे हों, तेल निकालने वाले देशों से और वहां की जनता से बहुत प्यार करते हैं। अगर किसी देश में तेल नहीं निकलता हो तो वहां की जनता के दुख दर्द और लोकतंत्र से अमेरिका को कोई सारोकार नहीं है। हमारा देश भी उसी केटेगरी में आता है।
इस साल के शुरू में ही ट्रंप जी ने हमारे देश पर पांच सौ पर्सेंट टैरिफ़ लगा दिया है। सच कहें तो लगाने का प्रस्ताव रख दिया है। जब से ट्रंप जी ने यह टैरिफ़ का खेल शुरू किया है तब से हमारे देश के सरकारी नेता हमें यह समझाने में लगे हैं कि अमेरिका द्वारा लगाया जा रहा बढ़ा हुआ टैरिफ़ देश के भले और उद्योगों की उन्नति के लिए कितना आवश्यक है। यही अमेरिका पहले जब सौ प्रतिशत टैरिफ़ लगा रहा था तब भी मंत्री लोग हमें यही समझा रहे थे। तो इस नववर्ष की तीसरी शिक्षा यह है कि अमेरिका अगर अधिक टैरिफ़ लगाता है तो वह देश की उन्नति के लिए अच्छा है। अगर अधिक टैरिफ़ इतना ही लाभप्रद है तो अच्छा होगा कि हमारे सरकार जी अमेरिका जा कर ट्रंप जी से निवेदन करें कि इस टैरिफ़ को हज़ार फीसदी कर दिया जाये। हमें बहुत ख़ुशी होगी और देश उन्नत होगा।
नया साल यहाँ भी अच्छी तरह आया। यहाँ नववर्ष अच्छा बनाने की जिम्मेदारी न्यायालय ने ली है। पिछले वर्ष के अंत में बलात्कार के, कत्लों के एक प्रभावशाली अपराधी को बेल दे दी (वैसे इस केस में उच्चतम न्यायलय ने बेल केंसिल कर दी है) और इस साल के शुरू में दो आरोपियों की बेल अर्जी ठुकरा दी। चलो यह तो कोर्ट का अधिकार है, वह जैसे चाहे वैसे प्रयोग करे पर उस पर तुर्रा यह कि आप एक साल तक बेल के लिए अप्लाई भी नहीं कर सकते। ठीक ही तो है, कौन बार बार बेल रिजेक्ट करने का सिरदर्द ले।
पिछले वर्ष हम हिन्दुओं ने बहुत गर्व किया। पिछले दस बारह साल से यह गर्व करने का काम हम हिन्दू लोग कुछ ज्यादा ही कर रहे हैं। हिन्दू हैं तो गर्व करेंगे ही। हाँ तो हम हिन्दुओं ने बहुत गर्व किया। गर्व कहा ही नहीं, गर्व किया भी है। मस्जिदों के बाहर जोर जोर से हनुमान चालीसा पढ़ा। उन्हें फतह कर उन पर भगवा फहराया। उनकी नींव में मंदिर ढूंढा। मुसलमानो को बहाने ढूंढ कर मारा पीटा। उन्हें लाउड स्पीकर पर गालियां दीं।
बीते वर्ष यही गर्व की भावना हममें क्रिसमस पर भी दिखाई दी। अब आप को विस्तार से क्या बताएं। आपने स्वयं पढ़ा और देखा ही होगा। अख़बार में नहीं तो व्हाट्सप्प पर पढ़ा होगा। न्यूज़ में नहीं तो रील में देखा होगा। खूब गर्व वाला हुड़दंग किया। गिरजाघरों के सामने हनुमान चालीसा पढ़ा। क्रिसमस की सज़ावट को तहस नहस किया। यहाँ तक कि विदेशी पर्यटकों के सिर से सांता क्लाज की टोपी तक उतार दी। हमने दिखा दिया कि हम कितना गर्व कर सकते हैं।
बीते वर्ष हमने यह भी दिखाया कि जब गर्व करने की बात आती है तो हम चेहरा मोहरा देख कर भी गर्व कर सकते हैं। जो हिन्दू शक्ल सूरत में हम उत्तर मध्य भारतीयों से अलग दिखता हो, उसे भी हमारे हिन्दू गर्व का दंश भुगतना पड़ सकता है। कामना है हमारा हिन्दू गर्व नववर्ष में भी ऐसे ही, बल्कि इससे और तीव्रता से चलता रहे।
खैर नया साल आ गया है। आना ही था। किसी के रोके रुकना नहीं था। ना ट्रंप के रोके रुकना था और ना ही हमारे सरकार जी के रोके। पर कामना है, ना तो अमेरिका अपनी दादागिरी चलाए और ना ही हमारा हिन्दू गर्व दूसरों पर कहर बन कर टूटे। Belated Happy New Year.
(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)
अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
