ज़रूरी सूचना: दिमाग़ी नक्सल जल्द अपना दिमाग़ सरकार जी के पास जमा करवाएं
इस बार भी पंद्रह अगस्त, पंद्रह अगस्त को ही मनाया गया। मतलब कहने का यह है कि स्वतंत्रता दिवस पंद्रह अगस्त को ही मनाया गया छब्बीस मई या और किसी दिन को नहीं। हाँ तो एक में जब हम पांच जोड़ते हैं तो मिलता है छः। हमारे सरकार जी का जन्मदिन पड़ता है, सत्रह तारीख को। तो हम जब इसके दोनों अक्षरों को आपस में घटाते हैं तो भी मिलता है छह। है ना कितना बड़ा संयोग और कितना बड़ा प्रयोग। इसी संयोग और प्रयोग की वजह से सरकार जी देश के सरकार जी हैं और पिछले तेरह साल से लालकिले पर तिरंगा फहरा रहे हैं।
भाइयों और बहनों, आज है वर्ष 2026। इसके सभी अंकों को जोड़ा जाए, 2+0+2+6 तो जमा आता है 10, और अगर 1और 0 को भी जोड़ दिया जाए तो आएगा एक। इसी तरह अगर 2047 के अंकों को जोड़ते जाएं तो अंत में आएगा चार। एक का चार गुणा होता है चार। तो भाइयों और बहनों, सरकार जी ने इस लाल किले की प्राचीर से प्रण लिया है कि वे 2047 तक भारत की चौगुनी तरक्की करेंगे, भारत को विकसित देश बनाएंगे। और अगर नहीं बना पाए तो आप सरकार जी को जिस मर्जी चौराहे पर खड़ा कर देना, सज़ा देना।
भाइयों और बहनों, इसे कहते हैं, गणित। इसे कहते हैं दिमाग़। गणित सिर्फ एक्स्ट्रा टू a b तक सीमित नहीं है, यह इससे आगे है। जब सरकार जी ऑस्ट्रेलिया में बताते हैं कि एक और एक दो नहीं, एक और एक ग्यारह होता है तो वह आगे का गणित है। सरकार जी की वहाँ भूरी भूरी प्रशंसा होती है। लोग भरपूर तालियां बजाते हैं। सरकार जी ने इंडोनेशिया में भी अपने अद्भुत दिमाग़ से गणित का इस्तेमाल कर छब्बीस जनवरी और इंडोनेशिया के राष्ट्राध्यक्ष की जन्मतिथि के बीच संबंध स्थापित कर तालियां अर्जित की थीं।
साथियों, सरकार जी ने विलक्षण दिमाग़ पाया है। सरकार जी के इसी विलक्षण दिमाग़ की विश्व भर में प्रशंसा होती है। इसी दिमाग़ की वजह से विश्व जी भर कर हँसता है। इसी दिमाग़ की वजह से शिक्षकों ने सरकार जी को कक्षा चार से आगे पढ़ाने के लिए मना कर दिया था। उसके बाद सरकार जी ने जो भी कुछ किया, अपने इस तीव्र दिमाग़ से ही किया है ।
हमारे देश में और भी दिमाग़ वाले लोग हैं। हमेशा से ही रहे हैं। वे समझते हैं उनमें बहुत दिमाग़ है । पर सच में है बिल्कुल भी नहीं। वे अपने दिमाग़ को उत्तर देने में नहीं, प्रश्न पूछने में लगाते हैं पर अब सरकार जी ने निश्चय किया है और निश्चय ही नहीं किया है बल्कि पंद्रह अगस्त को लाल किले की प्राचीर से घोषणा की है कि जिन के पास भी अपना दिमाग़ है, उन्हें दिमागी नक्सली माना जायेगा।
जिनके पास अभी भी, सरकार जी के बारह साल से भी अधिक समय से सरकार जी बने रहने के बाद भी अपना दिमाग़ अपने पास ही है, वे दिमागी नक्सल हैं। अगर व्यवस्था से पीड़ित, सरकार की नीतियों से असहमत, अपने अधिकार के लिए लड़ने वाला और कानून के रास्ते पर चलने वाला आदमी दिमाग़ी नक्सली है, तो इस देश में हर वह आदमी दिमाग़ी नक्सली है जो व्यवस्था की नीति से पीड़ित है।
दिमाग़ी नक्सली कौन है, वही जिसे व्यवस्था ने धक्का दिया है लेकिन उसने बंदूक नहीं उठाई। वह व्यवस्था से लड़ने के लिए दिमाग़ का उपयोग कर रहा हो। वह लिख रहा हो सकता है, बोल रहा हो सकता है, आंदोलन-प्रदर्शन कर रहा हो सकता है, भीतर सवालों से सुलग रहा हो सकता है, वह दिमाग़ी नक्सली है। सरकार जी ने बताया है कि जिन लोगों के पास अपना दिमाग़ है, जो अपने दिमाग़ का इस्तेमाल करते हैं, वे दिमाग़ी नक्सली हैं और ऐसे व्यक्तियों को छोड़ा नहीं जायेगा। जिस तरह से अपना जंगल अपना मानने वालों को खत्म किया गया है और उनके जंगल को निगला जा रहा है, उसी तरह का व्यवहार अपना दिमाग़ अपना मानने वालों के साथ किया जायेगा।
वे दिमाग़ी नक्सली अपना दिमाग़ अब सरकार जी के पास जमा करवा दें। इसके लिए सरकार जी ने एक प्रधानमंत्री जन मस्तिष्क बैंक योजना बनाई है। इसके अंतर्गत सरकार एक मस्तिष्क बैंक खोलेगी और सभी लोगों को अपना फालतू का दिमाग़ वहाँ जमा करवाना पड़ेगा। वह दिमाग़ जिससे वह प्रश्न पूछता है, वह दिमाग़ जिससे वह आलोचना करता है, वह दिमाग़ जो आंदोलित होता है। दिमाग़ जमा करवाने पर सबको एक पासबुक मिलेगी जिसे सम्हाल कर हर एक व्यक्ति को अपने पास रखना होगा।
इसलिए सभी दिमाग़ वालों से अपील है कि वे अपना दिमाग़ सरकार जी के इस प्रधानमंत्री जन मस्तिष्क बैंक में जमा कर दें या फिर झंडेवालान दिल्ली के हेडक्वार्टर में जमा करवा दें। जिन लोगों का दिमाग़ पहले से ही नागपुर में जमा है उन्हें कुछ करने की जरूरत नहीं है। शेष सभी प्रज़ा से उम्मीद की जाती है कि इस आदेश का पालन शीघ्र ही करेगी। और अपने पास जरूरत मंद दिमाग़ रख कर शेष मस्तिष्क बैंक में जमा कर देगी। इससे वह अपने आप को दिमागी नक्सल घोषित होने से बचा सकेगी और सरकार के प्रकोप से बची रहेगी।
मैंने तो अपना सोच लिया है, आप अपना सोच लें। मैं तो मरीज देखने लायक दिमाग़ अपने पास रख कर बाकी सारा दिमाग़ प्रधानमंत्री जन मस्तिष्क बैंक में जमा करवा दूंगा और चैन की नींद सोऊंगा।
पुनश्च:
सरकार इस बारे में जल्द ही अध्यादेश ला सकती है। प्रधानमंत्री जन मस्तिष्क बैंक शीघ्र एक वास्तविकता होंगे। आप अपने पास के किसी बैंक शाखा अथवा पोस्ट ऑफिस में जा कर अपना खाता खुलवा सकते हैं। इसकी सुविधा जन सुविधा केंद्र पर भी उपलब्ध कराई जाएगी।
(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)
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