ख़बरों के आगे-पीछे : पीएम केयर्स फंड को लेकर नए सवाल
आखिरकार पीएम केयर्स फंड की 2024-25 की ऑडिट रिर्पोट सरकार ने देर से ही, लेकिन जारी कर दी है। लेकिन इस रिपोर्ट से कुछ सवालों के जवाब नहीं मिले, जबकि कुछ नए प्रश्न खड़े हो गए हैं। मसलन, अमल करने वाली एजेंसियों ने 324 करोड़ रुपये का रिफंड किया। केंद्र को पारदर्शिता समर्थक लोगों के इस प्रश्न का उत्तर देना चाहिए कि ये एजेंसियां कौन हैं और क्या अमल में हुई गड़बड़ियों को छिपाने के लिए उन्होंने धन लौटाया है? फिर यह भी अहम सवाल है कि रिपोर्ट के साथ ऑडिट संबंधी टिप्पणियों को पीएम केयर्स की वेबसाइट पर क्यों नहीं डाला गया है? रिपोर्ट के मुताबिक इस कोष में 8,452 करोड़ रुपये हैं, जबकि 2024-25 में सिर्फ 88 लाख रुपये यानी 0.01 प्रतिशत हिस्से का उपयोग सहायता देने के लिए किया गया। 93 फीसदी रकम फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी गई है, जिससे कोष को 469 करोड़ रुपये का ब्याज हासिल हुआ।
मगर, सवाल है कि क्या कोष का घोषित मकसद पैसे से पैसा बनाना है? प्रधानमंत्री राष्ट्रीय आपदा कोष के पहले से मौजूद होने के बावजूद कोरोना महामारी के दौरान नरेंद्र मोदी सरकार ने एक नया कोष बनाने का विवादास्पद फैसला लिया था। शुरू से ही इसको लेकर पारदर्शिता का अभाव रहा। इसे आरटीआई कानून के दाये से बाहर रखा गया। इस सिलसिले में मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी गया लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया। बहरहाल, अब ऑडिट रिपोर्ट से जो सवाल उठे हैं उनका सरकार को विस्तार से जवाब देना चाहिए। आखिर ये कोष किस दिन के लिए बचा कर रखा जा रहा है?
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी फिर फेल हुई
मेडिकल में दाखिले की नीट यूजी परीक्षा के पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए आंदोलन और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की चर्चा अभी थमी नहीं है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का एक और कारनामा सामने आ गया। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए एक और परीक्षा में फ़ेल हो गया है। इसने यूजीसी नेट की परीक्षा कराई थी, जिसके तीन पेपर रद्द करने पड़े हैं, क्योंकि उन तीनों पेपर्स मे दर्जनों गलतियां मिली है। अब ये तीनों पेपर अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी छात्रों को दोबारा देने होंगे।
हैरानी की बात है कि केंद्र सरकार ने साफ सुथरे ढंग से परीक्षाएं आयोजित करने के लिए एक राष्ट्रीय एजेंसी बनाई है, हर दूसरी परीक्षा में किसी न किसी तरह की गड़बड़ी हो रही है। कहीं परीक्षा केंद्र मैनेज हो रहा है तो कहीं पेपर लीक हो रहा है और कहीं एनटीए के विशेषज्ञ प्रश्न पत्र सेट करने में फ़ेल हो रहे हैं। यूजीसी नेट का मामला प्रश्न पत्र तैयार करने में विफलता का है। तीन पेपर्स मे तथ्यात्मक गलतियां हैं, टाइपिंग की गलतियां हैं, आउट ऑफ द सिलेबस सवाल है। दो साल पहले 2024 में जब नीट यूजी के पेपर लीक हुए थे तब राधाकृष्णन आयोग का गठन हुआ था, जिसने एनटीए में सुधार के कई सुझाव दिए थे। इस साल भी नीट यूजी पेपर लीक के बाद संरचनागत सुधारों की जरुरत बताई गई। लेकिन लग नहीं रहा है कि सरकार को किसी तरह के सुधार की जल्दी है।
भाजपा को अगड़ी जातियों की चिंता
बिहार की बांकीपुर सीट पर भाजपा की हार का बिहार की राजनीति पर चाहे जो असर हो लेकिन इस नतीजे ने उत्तर प्रदेश में भाजपा को चिंता में डाल दिया है। बिहार के मुकाबले उत्तर प्रदेश में सवर्ण आबादी लगभग दोगुनी है। बिहार में जाति गणना के मुताबिक सिर्फ साढ़े 10 फीसदी सवर्ण है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह आबादी करीब 20 फीसदी है। हालांकि अगड़ी जातियों का दावा 25 फीसदी है। फिर भी एक अंदाजा 20 फीसदी वोट का है। इसमें सबसे ज्यादा ब्राह्मण हैं।
उत्तर प्रदेश में वैसे भी यह आबादी ज्यादा इसलिए हो जाती है क्योंकि वहां वैश्य अगड़ी जाति में आते हैं, जबकि बिहार में वे दिवंगत सुशील मोदी की कृपा से पिछड़ी जाति में हैं। भाजपा को एहसास है कि हिंदुत्व की व्यापक लहर अब नहीं है। उसे लग रहा है कि एक तरफ उसके सवर्ण समर्थक नाराज हैं और दूसरी ओर उनके आरक्षण विरोध की वजह से पिछड़ी जातियों में भी नाराजगी हो सकती है, जिसका फायदा समाजवादी पार्टी उठा सकती है। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछले दिनों दिल्ली आए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात में उन्होंने चुनाव और राजनीतिक स्थितियों को लेकर चर्चा की। हालांकि भाजपा नेता इस आधार पर अपने को तसल्ली दे रहे हैं कि प्रशांत किशोर ब्राह्मण हैं इसलिए बांकीपुर में उन्हें सवर्ण वोट मिल गए। उत्तर प्रदेश में अखिलाश यादव को सवर्ण वोट नहीं मिलेगा।
मनन मिश्रा ने डाल दिया आग में घी
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने छात्रों और युवाओं का ठंडा पड़ता गुस्सा और भड़का दिया है। वे पिछले करीब 14 साल से बार काउंसिल के अध्यक्ष हैं। भाजपा ने दो साल पहले बिहार में खाली हुई दो राज्यसभा सीटों में एक पर उपचुनाव के जरिए उनको राज्यसभा में भेजा हुआ है। उन्होंने हैदराबाद की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और रिसर्च सेंटर (नलसार) के छात्रों को भड़का दिया। असल में नलसार के छात्रों ने दीक्षांत समारोह में चीफ जस्टिस सूर्यकांत के हाथों सर्टिफिकेट लेने से मना किया था।
चीफ जस्टिस और यूनिवर्सिटी प्रशासन कुछ कहता उससे पहले ही मनन मिश्रा ने ऐलान कर दिया कि इस बैच के छात्रों का वकील के तौर पर एनरॉलमेंट नहीं होगा। उनके इस आदेश पर ऐसा हंगामा मचा कि उन्हें एक घंटे में ही अपना फैसला वापस लेना पड़ा और माफी मांगनी पड़ी, जिसका छात्रों पर कोई असर नहीं हुआ। उनकी इस दंडात्मक कार्रवाई की घोषणा का नतीजा यह हुआ कि नलसार के छात्रों के साथ ही नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भी चीफ जस्टिस के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है।
असल में अपने को चीफ जस्टिस और सरकार के प्रति समर्पित दिखाने के लिए मनन मिश्रा ने सबको और मुश्किल में डाल दिया। इसीलिए चीफ जस्टिस ने उन्हें फटकार लगाते हुए साफ शब्दों में कहा कि छात्रों और उनके बीच बोलने वाले वे कौन होते हैं। चीफ जस्टिस ने छात्रों के बहिष्कार के अधिकार का समर्थन किया। लेकिन मनन मिश्रा की बातों से छात्र इतने भड़क गए कि चीफ जस्टिस की कोशिश भी सफल होती नहीं दिख रही है।
सोशल मीडिया अकाउंट्स की सफाई
भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारियों की नई टीम घोषित होने के साथ ही एक कमाल का दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिला। सोशल मीडिया के प्रभारी दीपक म्हस्के और उनके साथ सह प्रभारी बनाए गए चार लोग प्रीति गांधी, शिवानंद द्विवेदी, आलोक भट्ट और अरुण यादव के सोशल मीडिया अकाउंट डिएक्टिवेट हो गए। उनकी एक्सेस समाप्त कर दी गई। सब कयास लगाने लगे कि ऐसा क्या हो गया कि सोशल मीडिया टीम का ही सोशल मीडिया अकाउंट बंद हो गया!
दरअसल इन सभी पांच लोगों की कई पुरानी पोस्ट्स बहुत आपत्तिजनक हैं, जिनमें इन लोगों ने नस्ली और लिंग भेद वाली टिप्पणियां की है। यहीं नहीं, महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के बारे में भी बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियां हैं। ऐसी सभी पोस्ट्स की सफाई के लिए इनके अकाउंट्स को डिएक्टिवेट किया गया। लेकिन इन लोगों के यह होशियारी दिखाने से पहले ही कांग्रेस के इकोसिस्टम के लोगों ने इनके पोस्ट्स के स्क्रीन शॉट्स ले लिए थे। अब इन लोगों के उन पुराने पोस्ट्स को सोशल मीडिया में वायरल कराया जा रहा है और भाजपा पर कटाक्ष किए जा रहे हैं। हालांकि पार्टी की ओर से कहा गया है कि कोई नेता पुरानी पोस्ट को लेकर शर्मिंदा होने या माफी मांगने का काम नहीं करेगा। पुरानी बातें अपनी जगह है। लेकिन अब उस तरह की पोस्ट नहीं करने को कहा गया है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)
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