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तिरछी नज़र : सरकार जी की Gen Z के लिए इंस्टा रील

आप लोगों का कहना है कि सरकार में ज़िम्मेदारी फिक्स होनी चाहिए। मतलब अकाउंटेंबिलिटी होनी चाहिए। जब किसी की कोई ज़िम्मेदारी है ही नहीं तो ज़िम्मेदारी फिक्स कैसे हो।
Modi Friends
कार्टून, कार्टूनिस्ट सतीश आचार्य के X हैंडल से साभार

सरकार जी हर महीने के अंतिम रविवार को प्रज़ा से 'मन की बात' करते हैं। अभी न्यूज़ीलैंड में 'मन की बात' को प्रेस कांफ्रेंस का सुबस्टिट्यूट बताया गया था। इस बार की मन की बात 26 जुलाई को हुई थी और उसमें सरकार जी ने कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन की, उस भूख हड़ताल की, युवाओं के उस धरना प्रदर्शन की बिल्कुल भी बात नहीं की जिसके कारण देश के शिक्षा मंत्री जी को इस्तीफा देना पड़ा था। मैं तभी समझ गया कि इन छात्रों से मन की बात सरकार जी फिर कभी रात को बारह बजे इंस्टा पर रील बना कर शेयर करेंगे। तो पेश है कल रात को बारह बजे इंस्टाग्राम पर शेयर की गई सरकार जी की युवाओं से 'मन की बात'। इसकी स्क्रिप्ट इस व्यंग्यकार ने लिखी है–

फ्रेंड्स,

आज मैं आप लोगों से 'मन की बात' करूँगा। मैंने इससे पहले आप से 'परीक्षा पर चर्चा' की ही हुई है। हर वर्ष करता हूँ और आपको जबरदस्ती सुनवाता हूँ। फिर मैंने कुछ दिन पहले भी रात के बारह बजे आप लोगों को सम्बोधित करते हुए इंस्टा पर रील पोस्ट की थी जिसे आप लोगों ने करोड़ों की संख्या में सुना और देखा और इतनी ही संख्या में गालियां दीं। यह गालियां देना आपने मुझसे और मेरी आईटी सेल सें ही सीखा है। वैसे मुझे श्रेय नहीं चाहिए पर इसका श्रेय तो आपको मुझे देना ही पड़ेगा। मुझसे पहले कोई भी सरकार जी मेरे जितना संस्कारी नहीं हुआ है जिसने अपने विरोधियों को इतनी अधिक गालियां दी हों और न ही किसी सरकार जी को आंदोलनकारियों से इतनी अधिक गालियां पड़ी हैं।

फ्रेंड्स, संस्कारी से मुझे ध्यान आया कि आपके आंदोलन के दौरान आपका एक स्लोगन चल रहा था, 'नेता बलात्कारी चलेगा पर आंदोलनकारी संस्कारी होना चाहिए'। आपके इस नारे से मैं बहुत प्रभवित हुआ। नया शिक्षा मंत्री मैंने ऐसा चुना है जो बलात्कारी तो नहीं है पर बलात्कारियों का सपोर्टर जरूर है। और हाँ, शिक्षा सचिव भी ऐसा लाया हूँ जिस पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। आप संस्कारी बनो, हम बलात्कारी और भ्रष्टाचारी ढूंढते रहेंगे।

फ्रेंड्स, आपने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगा था, मैंने दिलवा दिया। वैसे मैं आपको बता दूँ, मेरी सरकार में इस्तीफा लेने देने का चलन नहीं है। कुछ भी हो जाए, कोई इस्तीफा नहीं देता है क्योंकि कोई भी किसी काम के लिए जिम्मेदार होता ही नहीं है। जब कोई जिम्मेदार है ही नहीं तो रिजाइन क्यों करे भला। 

आप लोगों का कहना है कि सरकार में जिम्मेदारी फिक्स होनी चाहिए। मतलब अकाउंटेंबिलिटी होनी चाहिए। जब किसी की कोई जिम्मेदारी है ही नहीं तो जिम्मेदारी फिक्स कैसे हो। अकाउंटेंबिलिटी कैसे हो। मेरे मंत्री मंडल में कोई भी, न तो मैं और न ही मेरा कोई मंत्री अपने किसी भी निर्णय के लिए, कार्य के लिए जिम्मेदार है। और तो और हम तो देश के प्रति भी अपनी कोई जिम्मेदारी नहीं मानते हैं। हमारी सारी जिम्मेदारी अपनी पार्टी के प्रति है, आरएसएस के प्रति है।

फ्रेंड्स, आप बहुत पीछे पड़े। अनशन किया, धरना प्रदर्शन किया, लाठियां खाईं, पैलेट गन तक बर्दाश्त की कि धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लिया जाए, रिजाइन करवाया जाए। तो लो फ्रेंड्स, करवा दिया। पर क्या हुआ? मैंने एक नया रख भी लिया। वह भी धर्मेंद्र प्रधान जैसा ही है। हमारे यहाँ सब एक से ही हैं। या फिर कहो, एक से बढ़कर एक हैं। बस नाम बदलता है, काम नहीं। फ्रेंड्स, हमारे लिए ही कवि ने कहा है, 'हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजामे गुलिस्तां क्या होगा'?

रही पेपर लीक की बात तो फ्रेंड्स, मैंने इसमें रिकॉर्ड बनाया है। क्या करूँ, मेरी आदत ही ऐसी है कि जो भी काम करता हूँ, उसमें नए रिकॉर्ड ही बनाता हूँ। पेपर लीक में भी मैंने नया रिकॉर्ड बनाया है। इतने पेपर लीक स्वतंत्र भारत के पूरे इतिहास में नहीं हुए जितने मेरे शासन काल में हुए हैं। 150 के लगभग तो पेपर लीक आप लोगों को पता ही हैं इसके आलावा कुछ ऐसे पेपर लीक भी हैं जिनके बारे में आप लोगों को पता ही नहीं है कि यह पेपर लीक भी हुआ था। यह पेपर लीक करने वालों की अक्षमता है कि वे पेपर लीक भी ढंग से नहीं कर पाते हैं। फ्रेंड्स, मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि ऐसे अक्षम लोगों को कड़ी सजा मिलेगी। आगे ध्यान रखा जायेगा कि पेपर लीक हो तो इतने ढंग से हो कि किसी को कानों कान खबर तक न हो कि पेपर लीक हो गया है।

फ्रेंड्स, मैंने गाली देने पर आपको माफ कर दिया है। मेरा दिल बड़ा है। वे नेता छोटे दिल वाले होते हैं जो गाली को दिल पर लेते हैं। इस देश में ऐसे छोटे दिल के नेता हैं जो पूरा चुनाव इस बात पर लड़ लेते हैं कि हाय! इसने मेरी माँ को गाली दी, हाय! इसने मुझे नीच कहा, हाय! इसने मुझ चौकीदार को चोर कहा। फ्रेंड्स, ऐसी छोटी सोच वाले नेताओं के बहकावे में मत आना। आप देश का भविष्य हैं और आपसे बड़ी सोच की ही उम्मीद है।

फ्रेंड्स, आपने कहा, झुकती है सरकार, झुकाने वाला चाहिए। लेकिन मैंने भी एक सीख ली है। आपके इसी धरने प्रदर्शन से, भूख हड़ताल से ली है। सीख ली है कि किसी को भी प्रदर्शन पर मत बैठने दो। आप फ्रेंड्स हैं, आपको भी नहीं। शेर की सवारी मत करो, क्या पता शेर कब पटखनी दे, आप पर सवार हो जाए। लेकिन तानाशाह यह गलती करते जरूर हैं। मैंने भी यह गलती की। 

(इस व्यंग्य स्तंभ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

 

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