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सरकार कर रही NSA का दुरुपयोग, पत्रकार सत्यम वर्मा और आकृति की रिहाई की मांग

नोएडा के मज़दूर आंदोलन को लेकर वरिष्ठ पत्रकार सत्यम वर्मा और शोध छात्रा आकृति पर लगाए गए एनएसए के ख़िलाफ़ लखनऊ में विभिन्न संगठनों ने प्रदर्शन किया और राज्यपाल को ज्ञापन भेजा।
LKO PROTEST

लखनऊ: वरिष्ठ पत्रकार, अनुवादक और प्रतिबद्ध राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ता सत्यम वर्मा और थिएटर आर्टिस्ट, शोध छात्रा आकृति चौधरी पर नोएडा पुलिस प्रशासन द्वारा लगाए गए एनएसए का लखनऊ के नागरिक समाज और विभिन्न राजनीतिक सामाजिक संगठनों द्वारा परिवर्तन चौक पर प्रतिवाद किया गया। 

प्रतिवाद कार्यक्रम से राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पत्रक भेजा गया। जिसमें सत्यम वर्मा और आकृति चौधरी पर लगाए एनएसए को तत्काल वापस लेने, नोएडा में जारी मजदूरों के दमन पर रोक लगाने, गिरफ्तार मजदूरों व कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा करने और मजदूरों को तत्काल राहत देने के लिए 26000 रुपए न्यूनतम वेतन की घोषणा करने की मांग की गई।

गणमान्य नागरिकों ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इसके पूर्व भी नोएडा श्रमिक आंदोलन के दमन के संबंध में पत्रक राज्यपाल महोदया को भेजा गया था। लेकिन संवैधानिक प्रमुख होने के बावजूद संविधान विरुद्ध हो रही कार्रवाई पर उनके द्वारा कोई प्रभावी पहल नहीं हुई। 

प्रतिवाद सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि वाम विचार को मनाना इस देश में अपराध नहीं है और नोएडा श्रमिक आंदोलन में पुलिस कस्टडी में बर्बर दमन के शिकार हुए आदित्य आनंद और रूपेश को सोमवार को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट तक में उत्तर प्रदेश शासन नोएडा श्रमिक आंदोलन में गिरफ्तार सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं के विरुद्ध कोई सबूत नहीं पेश कर पाई। स्पष्ट है कि सत्यम वर्मा, आकृति चौधरी को महज जेल में रखने के लिए नोएडा पुलिस ने एनएसए लगाया है। 

सरकार व पुलिस कानून सम्मत व्यवहार नहीं कर रही है और अदालत में सबूत पेश करने की जगह मीडिया में अनाप-शनाप बयानबाजी कर रही है।

वक्ताओं ने कहा कि सत्यम वर्मा और आकृति चौधरी प्रतिबद्ध राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ता रहे हैं जो मजदूरों के पक्ष में खड़े रहें है। सुप्रीम कोर्ट ने खुद यह माना कि न्यूनतम मजदूरी पाना मजदूरों का संवैधानिक अधिकार है जो संविधान के नीति निर्देशक तत्व में उल्लेखित है। साफ है नोएडा में श्रमिक आंदोलन इस संवैधानिक मांग और आधुनिक प्रकार की बंधुआ प्रथा के खिलाफ स्वतःस्फूर्त प्रतिवाद था। आज तक पुलिस प्रशासन न्यायालय में मजदूर बिगुल जिसके नाम पर तमाम लोगों का उत्पीड़न किया जा रहा है, उसमें किसी भी उकसावामूलक या हिंसा भड़काने वाली सामाग्री को प्रस्तुत नहीं कर पाई है। पुलिस प्रशासन का कहना कि सत्यम के खाते से एक करोड रुपए बरामद हुआ है यह भी अपने आप में कपोल कल्पित है। सच यह है कि सत्यम देश के कुछ चुनिंदा बेहतर अनुवादकों में एक थे जो देश-विदेश की तमाम किताबों का अनुवाद करते थे और उसके जरिए अपनी आजीविका चलाते थे और यह कोई अपराध नहीं है। 

वक्ताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार से चंद पूंजी घरानों के मुनाफे के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्ति की गरिमा के ऊपर किए जा रहे हमलों को रोकने की मांग करते हुए कहा कि असहमति की आवाज पर यह हमले लोकतंत्र के लिए बेहतर नहीं है। 

प्रतिवाद कार्यक्रम में समाजवादी चिंतक प्रोफेसर रमेश दीक्षित, वरिष्ठ पत्रकार अजय सिंह, एडवा की मधु गर्ग, ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के दिनकर कपूर, कांग्रेस से दिनेश सिंह, समाजवादी मजदूर सभा के प्रदेश अध्यक्ष धनीराम श्रमिक, एटक के प्रदेश महामंत्री चंद्रशेखर, आइसा के शांतम निधि, दिशा के लालचन्द, अंजली, चित्रकार धर्मेन्द्र कुमार, कवि भगवान स्वरूप कटियार, जन संस्कृति मंच के फरजाना मेहदी, सुचित माथुर, सीटू की बबिता, एपवा से सरोजिनी बिष्ट, स्त्री मुक्ति लीग से शिप्रा, बीएसएस के गंगासागर, असगर मेहदी, निर्माण मजदूर यूनियन से नौमीलाल, कुली यूनियन के राम सुरेश यादव, आरवाईये से विवेक शर्मा, हर्ष, राजू, मृत्युंजय, संजय आदि शामिल रहे। 

 

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