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नोएडा मज़दूर आंदोलन: अब अपनों की तलाश में भटक रहे परिजन, पुलिस नहीं दे रही कोई जवाब

नोएडा के फेस-2 थाना क्षेत्र में बड़ी संख्या में परिवार अपने परिजनों की तलाश में भटक रहे हैं। कोई अपने बेटे को ढूंढ रहा है, तो कोई अपने पति या भाई को। कई लोगों का आरोप है कि उनके परिजनों को पुलिस उठाकर ले गई, लेकिन यह तक नहीं बताया जा रहा कि उन्हें कहां रखा गया है।
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नोएडा में सोमवार 13 अप्रैल को हुए मज़दूर आंदोलन के बाद माहौल फ़िलहाल शांत है लेकिन मज़दूर परिवारों की परेशानी अब और बढ़ गई है और हर कोई अपनों को तलाश रहा है। 

नोएडा के फेस-2 थाना क्षेत्र में बड़ी संख्या में परिवार अपने परिजनों की तलाश में भटक रहे हैं। कोई अपने बेटे को ढूंढ रहा है, तो कोई अपने पति या भाई को। कई लोगों का आरोप है कि उनके परिजनों को पुलिस उठाकर ले गई, लेकिन यह तक नहीं बताया जा रहा कि उन्हें कहां रखा गया है।

परिजनों का कहना है कि वे लगातार थानों, अदालतों और जेलों के चक्कर काट रहे हैं—सूरजपुर कोर्ट, डासना जेल, अलग-अलग थाने—लेकिन कहीं से भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही। कुछ लोगों का यह भी आरोप है कि थाने के बाहर खड़े होने तक की अनुमति नहीं दी जा रही और पूछताछ करने पर उन्हें डांटकर भगा दिया जाता है।

मेरा पति कहां है?”

नेहा बार-बार थाने के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन उन्हें हर बार धक्के देकर और डांटकर वहाँ से हटा दिया जा रहा है। नेहा, के पति सोमवार राकेश गायब हैं। उनके साथ उनकी माँ, जो राकेश की सास हैं, भी मौजूद थीं। दोनों ही बेहद व्याकुल और भावनात्मक स्थिति में थीं। बातचीत के दौरान नेहा इतना घबराई हुई थीं कि ठीक से बोल भी नहीं पा रही थीं और बार-बार सिर्फ एक ही सवाल दोहरा रही थीं—“मेरा पति कहां है, मुझे बता दीजिए, वो कहाँ है?”

नेहा का कहना है कि उनके पति राकेश किसी भी तरह की हिंसा में शामिल नहीं थे। उनके अनुसार, राकेश सुबह काम के सिलसिले में शक्ति (संभवतः किसी औद्योगिक क्षेत्र) गए थे, लेकिन वहाँ काम बंद होने के कारण वे दिल्ली स्थित अपने ससुराल चले गए। बाद में जब वे वहाँ से वापस लौट रहे थे और फेस-2 इलाके में पहुँचे, तभी रास्ते से पुलिस ने उन्हें अपने साथ ले लिया। इसके बाद से उनका कोई पता नहीं है।

नेहा ने बताया कि पिछले 24 घंटों में वह कम से कम 5 से 10 बार थाने जा चुकी हैं, लेकिन हर बार उन्हें बिना कोई स्पष्ट जानकारी दिए भगा दिया गया। उनका कहना है कि पुलिस न तो यह बता रही है कि उनके पति को गिरफ्तार किया गया है या नहीं, और न ही यह कि उन्हें कहाँ रखा गया है।

नेहा के दो छोटे बच्चे हैं, जिन्हें वह घर पर छोड़कर अपने पति की तलाश में भटक रही हैं। उनकी स्थिति बेहद चिंताजनक है और वे लगातार यही मांग कर रही हैं कि अगर उनके पति को पुलिस ने हिरासत में लिया है, तो कम से कम इसकी आधिकारिक जानकारी दी जाए। अन्यथा, यदि वे लापता हैं, तो उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की जाए।

इसे भी देखें– ग्राउंड रिपोर्ट: क्या है नोएडा मज़दूर आंदोलन का पूरा सच?

यह मामला भी उन कई घटनाओं में से एक है, जिनमें परिजन अपने प्रियजनों के बारे में जानकारी पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उन्हें स्पष्ट उत्तर नहीं मिल पा रहा है। ऐसी स्थिति में परिवारों की चिंता और असुरक्षा लगातार बढ़ती जा रही

बेटे की तलाश में भटकता पिता

एक और मामला अनिल कुमार का है, जो अपने 18 वर्षीय बेटे अंकुश की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। अनिल कह रहे है कि उनके बेटे अंकुश हाल ही में गांव से नोएडा आया था और किसी भी तरह की मज़दूरी या प्रदर्शन से उसका कोई संबंध नहीं था।

अनिल कुमार का कहना है कि उन्हें जानकारी मिली कि कुछ लोगों को एक फैक्ट्री के पास से उठाया गया था, जिसमें उनका बेटा भी हो सकता है। तब से वे सूरजपुर कोर्ट, डासना जेल और थानों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है।

अभिलाषा अपने एक रिश्तेदार के साथ थाना परिसर के बाहर खड़ी थीं और अपने भाई के बारे में जानकारी पाने की कोशिश कर रही थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस बार-बार उन्हें वहाँ से हटने के लिए कह रही थी और डांटकर भगा रही थी। पुलिस का तर्क था कि थाने के बाहर भीड़ इकट्ठा न हो और इस तरह की चर्चाएँ फैलने से रोकी जा सकें, ताकि स्थिति और न बिगड़े या मीडिया तक बात न पहुँचे।

अभिलाषा के भाई अशित, जिन्हें आसिश के नाम से भी जाना जाता है, पिता बच्चेलाल के पुत्र हैं और उनकी उम्र लगभग 26 वर्ष बताई जा रही है। परिजनों के अनुसार, वे मंगलवार सुबह लगभग 11 बजे से ही थाने में हैं, लेकिन तब से अब तक उनके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है।

अभिलाषा ने बताया कि उनकी अपने भाई से आखिरी बार सोमवार सुबह करीब 10 बजे बातचीत हुई थी। उस दौरान उन्होंने बताया था कि इलाके में तनाव बढ़ रहा है और झगड़े की स्थिति बन रही है, जिससे वे काफी परेशान और घबराए हुए थे। इसके बाद से ही उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है।

परिवार का आरोप है कि इसके बाद से उनका फोन बंद जा रहा है और पुलिस की ओर से भी कोई ठोस जानकारी नहीं दी जा रही है कि उन्हें कहाँ रखा गया है या उनकी क्या स्थिति है। अभिलाषा लगातार अपने भाई की तलाश में इधर-उधर भटक रही हैं और सिर्फ यह जानना चाहती हैं कि उनका भाई किस हाल में है।

विजय का परिवार और डासना जेल का सफ़र

विजय कुमार के छोटे भाई नवीन को पुलिस अपने साथ ले गई थी। परिवार ने पूरी रात अलग-अलग जगहों पर तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। बाद में किसी के जरिए पता चला कि उन्हें डासना जेल में रखा गया है।

विजय कुमार के अनुसार, उनके छोटे भाई नवीन कुमार, जिनकी उम्र लगभग 21–22 वर्ष है, उनके साथ ही एक फैक्ट्री में सिलाई का काम करते थे। विजय खुद उनसे थोड़े बड़े हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार शाम पुलिस उनके भाई को अपने साथ लेकर गई, लेकिन यह नहीं बताया गया कि उन्हें कहाँ ले जाया जा रहा है। इसके बाद से परिवार लगातार परेशान रहा और रात भर विभिन्न थानों और स्थानों पर जाकर जानकारी जुटाने की कोशिश करता रहा।

विजय कुमार ने बताया कि उन्होंने फेस-2 थाना, सूरजपुर कोर्ट समेत कई जगहों पर जाकर पूछताछ की, लेकिन कहीं से भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिली। अंततः मंगलवार को किसी व्यक्ति के माध्यम से उन्हें पता चला कि उनके भाई को डासना जेल में रखा गया है। इसके बाद वे अपने परिजनों के साथ डासना पहुँचे, लेकिन अब तक उनसे मुलाकात नहीं हो सकी है।

फोन पर बातचीत में विजय कुमार ने कहा कि पूरा परिवार बेहद परेशान है और किसी भी अधिकारी द्वारा सही जानकारी नहीं दी जा रही है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को यह जानकारी मिली है कि उनके भाई को डिटेन किया गया है और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है, उनकी जांच की जाएगी और यदि कोई निर्दोष पाया जाता है, तो उसे छोड़ दिया जाएगा।

हालांकि, परिवार की चिंता अभी भी बनी हुई है। विजय कुमार को आशंका है कि उनके भाई के साथ हिरासत के दौरान मारपीट की गई हो सकती है, क्योंकि अब तक उनकी स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। उन्होंने कहा कि वे फिर से अपने भाई से मिलने की कोशिश करेंगे, ताकि उनके हालात के बारे में पता चल सके।

पुलिस कार्रवाई पर उठते सवाल

पूरे घटनाक्रम में एक बड़ा सवाल लगातार उठ रहा है—क्या कार्रवाई के दौरान कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है?

कानून के मुताबिक, गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर व्यक्ति को कोर्ट में पेश करना और उसके परिजनों को सूचित करना जरूरी होता है। लेकिन कई परिवारों का दावा है कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई।

साथ ही, कुछ वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग और मारपीट के आरोप लगाए गए हैं—यहां तक कि महिलाओं के साथ भी।

आपको बता दें कि नोएडा के औद्योगिक इलाकों में न्यूनतम वेतन बढ़ाने और काम की शर्तों में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ मज़दूरों का आंदोलन सोमवार को कई जगहों पर हिंसा में बदल गया था। कुछ फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ और आगज़नी की घटनाएं सामने आईं, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया।

इसे भी देखें– दुख, ग़ुस्सा, तकलीफ़: मज़दूरों की कहानी-मज़दूरों की ज़ुबानी

पुलिस का कहना है कि अब तक 300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है और इस मामले में 7 से ज्यादा एफ़आईआर दर्ज की गई हैं। अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर उनके ख़िलाफ़ कानूनी कदम उठाने के लिए की जा रही है। साथ ही, पुलिस ने यह भी संकेत दिए हैं कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है और “बाहरी तत्वों” या किसी साज़िश की भी पड़ताल की जा रही है।

लेकिन इन आधिकारिक दावों के बीच जो ज़मीनी हक़ीक़त सामने आ रही है, वह कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

तनावपूर्ण माहौल और अनिश्चितता

फिलहाल नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में शांति है लेकिन एक तनाव बराबर बना हुआ है। एक तरफ पुलिस की सख्ती और लगातार गिरफ्तारियां हैं, तो दूसरी तरफ अपने परिजनों की तलाश में भटकते परिवारों की बेबसी। यह मामला अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं रह गया है, बल्कि एक मानवीय संकट का रूप लेता दिख रहा है—जहां लोग सिर्फ यह जानना चाहते हैं कि उनके अपने आखिर हैं कहाँ।

ऐसे में सबसे जरूरी सवाल यही है—क्या जांच और कार्रवाई के बीच पारदर्शिता और मानवीय संवेदनशीलता बनी रह पाएगी, या यह संकट और गहराता जाएगा?

 

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