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ख़बरों के आगे-पीछे: उलटा पड़ सकता है राहुल पर मुक़दमे का दांव

अपने साप्ताहिक कॉलम में वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कई मुद्दों पर बात कर रहे हैं। ख़ासकर असम चुनाव में हिंदू-मुस्लिम और भारत-पाकिस्तान मैच की राजनीति पर।
RAHUL GADHI

राहुल गांधी वैसे तो मुकदमों के आदी हो गए हैं। देश का शायद ही कोई राज्य होगा, जहां उनके खिलाफ मुकदमा नहीं हुआ है। इसलिए दिल्ली पुलिस ने जो नया मुकदमा दर्ज किया है वह कायदे से उनके लिए ज्यादा चिंता की बात नहीं होनी चाहिए। लेकिन सरकार को उम्मीद है कि वह इस मुकदमे के जरिए दबाव बढ़ाएगी। वह दबाव राहुल के साथ साथ कुछ दूसरे लोगों पर भी हो सकता है। यह मुकदमा लोकसभा में पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब लेकर जाने का है। 

बहरहाल, दिल्ली पुलिस जब इस बात की जांच करेगी कि राहुल गांधी को किताब कहां से मिली तो उसके साथ कई चीजों की जांच होगी। जांच की आंच पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे तक भी पहुंचेगी क्योंकि अगर प्रकाशक ने नहीं लीक की तो किसने लीक की। सरकार के संसदीय प्रबंधक उम्मीद कर रहे हैं कि इससे वे कांग्रेस और विपक्ष पर दबाव बना पाएंगे। 

दूसरी ओर राहुल गांधी की टीम का कहना है कि यह विवाद, जितना बढ़ेगा उतना सरकार को नुकसान होगा। लोगों के मन में सवाल उठेगा कि आखिर सरकार क्यों एक पूर्व सेना प्रमुख की किताब की बातें बाहर आने से रोकना चाहती है। लोगों को यकीन हो गया कि पूर्व सेना प्रमुख कुछ ऐसा बताना चाहते हैं, जो सरकार छिपाना चाहती है तो उसका उलटा असर होगा। सेना को लेकर सरकार, जो भी नैरेटिव बनाती है वह खराब होगा। इसलिए मुकदमा दोधारी तलवार है। सरकार को उलटा भी पड़ सकता है।

अजित पवार की मौत से जुड़े सवाल

शरद पवार के पोते और उनकी पार्टी के विधायक रोहित पवार ने अपने चाचा अजित पवार की मौत के पीछे साजिश की बात कही है। बीते मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन देकर रोहित ने आरोप लगाया कि अजित पवार के विमान हादसे के पीछे बड़ी साजिश है। जिस समय रोहित पवार पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन दे रहे थे उसी समय सुनेत्रा पवार ने औपचारिक रूप से उप मुख्यमंत्री का पद संभाला। अभी उनकी या उनके दोनों बेटों की तरफ से इस तरह का कोई बयान सामने नहीं आया है। इसीलिए सवाल है कि शरद पवार खेमे के नेता क्यों ऐसी बात कर रहे हैं? खुद शरद पवार ने पहले दिन साजिश की बात से इनकार किया था। 

बहरहाल, रोहित पवार ने यह सवाल भी उठाया कि जो विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ वह दो दिन पहले सूरत क्यों गया था? उन्होंने पायलट सुमित कपूर के आचरण का सवाल उठाया और कहा कि वे शराब पीने की लत की वजह से कई बार विवाद में रहे हैं। पहले उनको अजित पवार का विमान लेकर बारामती नहीं जाना था, लेकिन अचानक पहले से तय पायलट की जगह उनको भेजा गया। रोहित ने कहा कि हादसे से पहले पायलट ने 'मे डे’ अलर्ट नहीं किया, बल्कि वे पूरी तरह से शांतचित्त बने रहे। पहली नजर में सवाल जायज लग रहे हैं लेकिन अगर ये आरोप लगाते समय अजित पवार की पत्नी या बेटे भी साथ होते तो इनकी गंभीरता बढ़ जाती। 

एआई सम्मेलन के लिए होटल की मारामारी

राजधानी दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 16 से 20 फरवरी के होने जा रहा है। इसमें हिस्सा लेने के लिए दुनिया भर की एआई कंपनियां और स्टार्टअप्स के लोग आ रहे हैं। इस मौके पर एआई अनुसंधान संगठन ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन सैकड़ों सीईओ और टेक्नोक्रेट भी दिल्ली आएंगे। लेकिन इस सम्मेलन को लेकर भारत में अभी तक मुख्य रूप से जो खबर चर्चा में है वह होटलों हो रही मारामारी को लेकर है। इस सम्मेलन के लिए भारत की क्या तैयारी है या भारत की कितनी कंपनियां इसमें हिस्सा लेंगी और इससे भारत में एआई इकोसिस्टम पर क्या असर होगा, इसकी चर्चा की बजाय होटल के कमरे महंगे होने की खबर है।

दिल्ली के सभी पांच सितारा होटल 16 से 20 फरवरी तक के लिए भर गए हैं और एक भी कमरा खाली नहीं है। यह भी खबर है कि कमरे का किराया जो पहले 20 हजार रुपये था, वह अब 50 हजार रुपये से ऊपर है और 40 हजार के सूट रूम का किराया डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा हो गया है। सवाल है कि क्या इतना बड़ा सम्मेलन दिल्ली में हो रहा है तो सरकार को सर्ज प्राइसिंग पर नियंत्रण नहीं रखना चाहिए? 

लेकिन भारत में हर मौके पर चाहे वह इस तरह का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हो या कोई आपदा हो, विमानन कंपनियों से लेकर होटल वाले और कैब सर्विस वाले अनाप शनाप किराया वसूलने लगते हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय मेहमानों को परेशानी होती है और भारत की छवि पर भी असर पड़ता है। 

असम में भाजपा सिर्फ़ हिंदू-मुस्लिम के सहारे

असम में कुछ ही दिनों बाद चुनाव होने वाले हैं लेकिन वहां दूसरे सारे मुद्दे गौण हो गए होते जा रहे हैं। वहां 10 साल से भाजपा की सरकार है और इन 10 सालों में केंद्र में भी भाजपा की ही सरकार रही है। लेकिन 10 साल से अपनी इस डबल इंजन सरकार के कामकाज की बजाय भाजपा सिर्फ हिंदू-मुस्लिम के मुद्दे पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। उसकी जो चुनाव सामग्री तैयार की जा रही है उसमें सबका फोकस हिंदू-मुस्लिम पर है। एक प्रयोग के तौर पर पिछले दिनों एआई से बना एक वीडियो वायरल कराया गया, जिसमें मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा गोल टोपी और दाढ़ी वाले दो मुस्लिम दिखते लोगों पर बंदूक से निशाना साध रहे थे। बाद में उसे हटा लिया गया है। 

असल में पहले थोड़ा बारीक तरीके से यह मुद्दा उठाने की कोशिश की गई थी। घुसपैठियों के नाम पर हिंदू-मुस्लिम विभाजन का प्रयास हुआ। फिर मियां मुस्लिम वाला जुमला आया। कहा गया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को मियां मुस्लिम कहा जाता है। सरमा ने उन्हें प्रताड़ित करने की सार्वजनिक अपील की। अब लग रहा है कि उससे भी बात नहीं बन रही है तो सीधे गोली मारने का नैरेटिव बनाया जा रहा है। सरमा ने इसी तरह का जहरीला प्रचार 2024 के झारखंड चुनाव में भी किया, लेकिन भाजपा बुरी तरह से चुनाव हारी। वहां घुसपैठ और जमाई जिहाद का उनका मुद्दा नहीं चल पाया। अब देखना है कि असम में वे इस मुद्दे को कितना चला पाते हैं।

सब चाहते थे कि पाकिस्तान मैच खेले

आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकती, पाकिस्तान के संदर्भ में यह बात भारत सरकार के शीर्ष नेता अक्सर कहते रहते हैं। इसी तर्ज पर भारत के क्रिकेट प्रशासक और प्रसारणकर्ता भी कहते हैं कि आतंकवाद और क्रिकेट दोनों साथ-साथ नहीं चल सकता। लेकिन बात जब धंधे की आती है तो सब चलने लगता है। इस बार भी करीब 10 दिन के ड्रामे के बाद टी20 विश्व कप में पाकिस्तान 15 फरवरी को कोलंबो में भारत से मैच खेलने को तैयार हो गया। यह भी कमाल का संयोग है, जो आईसीसी के हर टूर्नामेंट में होता है कि भारत और पाकिस्तान एक ही ग्रुप में रखे जाते हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि कम से कम एक मैच दोनों देशों के बीच जरूर हो। इसके बाद अगर दोनों टीमें नॉकआउट राउंड में पहुंचती है तो दूसरा मैच होता है और कई बार तीसरा मैच यानी फाइनल भी हुआ है। यह सबके लिए फायदे का धंधा होता है। 

बहरहाल, भारतीय मीडिया यह माहौल बना रहा है कि पाकिस्तान झुक गया। लेकिन यह कोई नहीं बता रहा है कि बीसीसीआई भी चाहता था कि मैच हो और टुर्नामेंट के प्रसारण का अधिकार लेने वाली रिलायंस समूह की कंपनी जियो को भी मैच की जरुरत थी। अगर मैच नहीं होता तो बीसीसीआई को भी नुकसान था और जियो को तो बड़ा नुकसान होता। इसलिए सब चाहते थे कि पाकिस्तान से मैच हो। फिर भी पाकिस्तान ने इतनी हिम्मत तो दिखाई कि बहिष्कार की घोषणा की। कायदे से तो भारत को बहिष्कार करना चाहिए था। लेकिन बहिष्कार की घोषणा की पाकिस्तान ने।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

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