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ख़बरों के आगे-पीछे: हर चुनाव से पहले राज्यों में ईडी के छापे

वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन अपने साप्ताहिक कॉलम में पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ महाराष्ट्र और दिल्ली की बात कर रहे हैं। साथ ही इसरो के अभियान की भी समीक्षा कर रहे हैं।
MAMTA-ED

पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के छापे को लेकर खूब राजनीति हो रही है और विवाद भी बढ़ा हुआ है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दूसरे विपक्षी नेताओं या मुख्यमंत्रियों से अलग हैं। वे जो होता है, उसे होते देने रहने वाली नेता नहीं हैं। इसलिए उन्होंने प्रतिकार किया और सड़क पर उतर कर भी आंदोलन किया। उनकी पुलिस ने उनका साथ दिया और ईडी के अधिकारियों के खिलाफ ही कई मुकदमे दर्ज हो गए। 

लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि किसी राज्य में चुनाव होने वाला हो और ईडी ने वहां छापे मारे। यह पिछले कई सालों से एक परंपरा बन गई है कि जिस राज्य में चुनाव होने वाला होता है वहां चुनाव से ठीक पहले ईडी छापा मारने पहुंच जाती है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में छापा पांच साल पुराने कोयला तस्करी के मामले में मारा गया है। उसकी एफआईआर 2020 में दर्ज की गई थी और छापा मारा गया 2026 के चुनाव से पहले। इसी तरह झारखंड और दिल्ली में भी ईडी ने पुराने मामलों में कार्रवाई के लिए चुनाव के ऐन पहले का वक्त चुना और वहां के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को गिरफ्तार किया। महाराष्ट्र में भी ऐसा ही हुआ था। अंतर यह है कि बाकी राज्यों में नेता उतने लड़ाकू नहीं हैं, जितनी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं। इसलिए बंगाल का मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है और ममता ने इसे अपने पक्ष में इस्तेमाल कर लिया है।

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को गहरा झटका 

पीएसएलवी रॉकेट की 62वीं उड़ान की नाकामी से भारत की उपग्रह संबंधी महत्त्वाकांक्षा को गहरा झटका लगा है। यह झटका इसलिए अधिक गंभीर है, क्योंकि पिछले साल मई में पीएसएलवी की 61वीं उड़ान भी फेल हो गई थी। पीएसएलवी-सी62 एक साथ 16 उपग्रहो को लेकर 12 जनवरी को उड़ा, लेकिन उड़ान के तीसरे चरण में उससे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का संपर्क टूट गया। वे उपग्रह कहां गए, यह भी पता नहीं चल सका था। पीएसएलवी-सी61-ईओएस-०9 के साथ भी ठीक यही हुआ था। यानी इसरो के वैज्ञानिक सात महीनों के दौरान उस खामी से निजात नहीं पा सके, जिस कारण बीते मई में उनका मिशन नाकाम हुआ। 

उस नाकामी की जांच के लिए समिति बनी थी, जिसकी रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी गई, जहां उसे गोपनीय श्रेणी में डाल कर रखा गया है। यानी जिन करदाताओं के पैसे से इसरो चलता है, उन्हें इस सूचना से वंचित रखा गया है कि उनका पैसा क्यों बर्बाद हुआ। अब फिर वैसा ही हादसा ज्यादा बड़े पैमाने पर हुआ है। विश्वास का जो संकट पैदा हुआ है, वह इसके अलग है। इस विकट स्थिति से निकलने का उचित तरीका यही होगा कि भारत सरकार और इसरो पूरी पारदर्शिता बरते। नाकामियों के लिए जवाबदेही तय करना भी जरूरी है। आखिर बिना पुरानी खामी को दूर किए अगले लॉन्च को कैसे हरी झंडी दी गई, यह देश को मालूम होना चाहिए। पीएसएलवी-सी62 डीआरडीओ का अन्वेष उपग्रह भी ले जा रहा था। यानी इस नाकामी का असर भारत की रक्षा तैयारियों पर भी पड़ेगा। 

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगेगा?

पश्चिम बंगाल में कमाल हो रहा है। तृणमूल कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा भी चुनाव आयोग से नाराज है। भाजपा के नेता भी ताल ठोक रहे हैं कि चुनाव नहीं होने देंगे। माना जा रहा है कि यह कोई डिजाइन है, जिसका मकसद ऐसे हालात पैदा करना है, जिसमे चुनाव टल जाए। अगर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की गड़बड़ियों के बहाने चुनाव टलता है तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ेगा और भाजपा के कई नेता मानते हैं कि बिना राष्ट्रपति शासन लगाए बंगाल में ममता बनर्जी को हराना मुश्किल होगा। 

बहरहाल, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शामिक भट्टाचार्य ने कहा है कि उनकी पार्टी के लोग फॉर्म सात जमा कर रहे हैं लेकिन आयोग सबके नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं कर रहा है। भट्टाचार्य का कहना है कि अगर भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से जमा कराए गए फॉर्म सात के आधार पर मतदाता सूची में सुधार नहीं होता है तो भाजपा चुनाव नहीं होने देगी। दूसरी ओर ममता बनर्जी चार चिट्ठियां चुनाव आयोग को लिख चुकी हैं और कहा है कि मनमाने आधार पर लोगों के नाम काटे जा रहे हैं या लोगों को परेशान किया जा रहा है। हालांकि मोटे तौर पर पश्चिम बंगाल में एसआईआर का पहला चरण कामयाब रहा है। कुल 58 लाख लोगों के नाम कटे हैं। उसमें भी यह शिकायत नहीं है कि किसी खास जाति, समुदाय या क्षेत्र विशेष के लोगों के नाम ज्यादा कटे हैं। फिर भी दोनों मुख्य पार्टियां चुनाव आयोग से नाराज हैं।

राज ठाकरे ने कहा मुंबई अब अदाणीस्तान

मुंबई में बीएमसी चुनाव से पहले उद्धव और राज ठाकरे की साझा रैली हुई और उस रैली में राज ठाकरे ने तमिलनाडु या बिहार, उत्तर प्रदेश के लोगों को लेकर जो कहा उसकी बड़ी चर्चा हुई कि राज ठाकरे ने 'बजाओ पुंगी, हटाओ लुंगी’ का नारा दोहराया, उन्होंने हिंदी भाषी लोगों को पीटने की बात कही। लेकिन राज ठाकरे ने देश के दूसरे सबसे बड़े कारोबारी गौतम अदाणी पर जो हमला किया उसकी खबर अखबारों और टीवी चैनलों से पूरी तरह से गायब हो गई। यह बहुत बड़ी बात है कि राज ठाकरे ने गौतम अदाणी का नाम लेकर हमला किया और कहा कि मुंबई को अदाणीस्तान बनाया जा रहा है। ऐसा कह कर उन्होंंने एक तरह से लोकप्रिय धारणा को आवाज दी। राज ठाकरे ने कहा कि मुंबई और नवी मुंबई हवाईअड्डे पर अदाणी का कब्जा हो गया। उन्होने कहा कि धारावी विकास परियोजना और मुंबई हवाईअड्डे की सारी जमीनें अदाणी को देने की तैयारी हो रही है। राज ठाकरे ने एक नक्शे के जरिए दिखाया कि 2014 के बाद से अदाणी को कौन-कौन सी परियोजनाएं मिली हैं। उन्होंने कहा कि 10 साल पहले अदाणी सीमेंट के कारोबार में नहीं थे लेकिन आज दूसरी सबसे बड़ी सीमेंट उत्पादक कंपनी उनकी है। राज ठाकरे ने यह भी कहा कि उनकी सीमेंट कंपनी से ही सरकारी परियोजनाओं में सीमेंट की आपूर्ति हो रही है। लेकिन अदाणी पर इस हमले की खबर अखबार, चैनल और यहां तक कि वेबसाइट्स से भी गायब रही।

मैली यमुना में क्रूज चलाने की तैयारी

एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल में दिल्ली में यमुना और ज्यादा मैली हो गई है। साफ होने की बजाय उसमे पहले से ज्यादा झाग बनने लगे है और नालों से आने वाली गंदगी के कारण पानी में मल की मात्रा पहले से ज्यादा बढ़ गई है। अब दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता कह रही कह रही हैं कि उन्हें तो एक ही साल मिला है, जबकि आम आदमी पार्टी की सरकार 11 साल रही थी। वे भी अब यमुना की सफाई के लिए 11 साल का समय मांग रही हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि उनके पर्यटन मंत्री उसी यमुना में क्रूज चलाने की तैयारी में जुटे हैं। 

यह सबको पता है कि यमुना की सफाई का सिर्फ दिखावा हो रहा है। सरकार कोई गंभीर कदम नहीं उठा रही है। आखिर साढ़े ग्यारह साल के नरेंद्र मोदी के राज में हजारों करोड़ खर्च करके भी गंगा कां साफ नहीं हुई है। इसलिए 11 साल भी मिल जाएं तब भी यमुना साफ नहीं होगी। लेकिन यह दिखाने के लिए यमुना सफाई का काम चल रही है और धारणा बनवाने के लिए पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा क्रूज चलाने की तैयारी में जुटे हैं। इसके लिए वे मुंबई पहुंचे और वहां क्रूज कंपनी के साथ मीटिग की है। यमुना रिवरफ्रंट परियोजना के तहत लक्जरी क्रूज चलाने की योजना बनी है। लेकिन अभी एक प्रतिशत भी सफाई नहीं हुई है और न रिवरफ्रंट का काम शुरू हुआ लेकिन पर्यटन मंत्री एक क्रूज के सामने फोटो खिंचवा आए हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

 

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