तिरछी नज़र: नागरिकता बताएं तो बताएं कैसे!
जब से सरकार-जी की सरकार के विदेश मंत्रालय ने बताया है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तब से मुझे अपने ही देश में अपनी नागरिकता फिर से याद करना पड़ रही है। अब तक मैं पूरे आत्मविश्वास से हर फ़ॉर्म में नागरिकता वाले खाने में हिंदी में 'भारतीय' और अंग्रेजी में 'इंडियन' लिखता आया था। आज पता चला कि मैं यह काम वर्षों से बिना किसी प्रमाण के करता रहा हूँ। यह तो अच्छा हुआ कि सरकार जी ने समय रहते बता दिया, वरना कहीं ऐसा न हो कि चालीस साल पुराने किसी फ़ॉर्म में "भारतीय" लिखने के अपराध में मुझे झूठा घोषणा-पत्र देने का अभियुक्त बना दिया जाए, देशद्रोही मान लिया जाये।
मेरे पास आधार कार्ड है। वही आधार जो सरकार जी की हर योजना के लिए जरूरी है। देश में अंदरूनी हवाई यात्रा के लिए आधार, रेल गाड़ी में में आने जाने के लिए आधार, होटल में कमरा बुक करवाते समय आधार, बैंक में खाता खुलवाते समय आधार, मोबाइल का सिम खरीदने के लिए आधार, गैस का कनेक्शन लेने के लिए भी आधार, हर समय आधार, सभी चीजों में आधार जरूरी है। आपके अस्तित्व का आधार है आधार। आधार वैसे तो बहुत उपयोगी है पर इतना उपयोगी भी नहीं है कि इसे नागरिकता का प्रमाणपत्र मान सकें। नागरिकता साबित करने में यह फिसड्डी है।
मेरे पास भारत सरकार द्वारा दिया गया, इशू किया गया, पैन कार्ड भी है। यह बहुत वैल्यू रखता है पर इतनी भी नहीं कि यह मेरे भारत का नागरिक होने का सबूत बन सके। सरकार जी के लिए यह पैसा पाने का साधन है और मेरे लिए पैसा खोने का। इससे मैं देश की सरकार को अपनी आय पर कर (टैक्स) देता हूँ। मेरे से आय कर वसूल कर सरकार जी अपनी फोटो लगे थैलों में अस्सी करोड़ लोगों को फ्री का राशन देते हैं। वे हमारे लिए एक्सप्रेस बनवाते हैं जिन पर हम जिंदगी भर टोल देते देते थक जाते हैं पर उनका दोस्त टोल लेते लेते नहीं थकता है। इसी पैसे से हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन और पोर्ट बनवा कर सरकार जी अपने दोस्त को देते हैं कि जा दोस्त, कमा और खा। सरकार जी इस पैन कार्ड से मुझसे टैक्स तो ले लेते हैं पर मुझे देश का नागरिक मानने से इनकार कर देते हैं।
मेरे पास भारत सरकार द्वारा दिया गया भारत का पासपोर्ट भी है। वही पासपोर्ट जो तरह तरह के प्रमाण पत्र देने के बाद बना है। उसमें तो पुलिस वेरिफिकेशन भी हुआ था। उसके बल पर मैं तीन चार बार भारी वीसा फीस दे कर देश के बाहर भी हो आया हूँ। विदेश में मेरे इसी पासपोर्ट के कारण इमाइग्रेशन अफसर मुझसे कहता है, "ओह, यू आर इंडियन"। मेरे इसी पासपोर्ट के कारण वह मुझे एक तरफ कर देता है और तरह तरह के प्रश्न पूछता है। इसी पासपोर्ट की वजह से उसे संदेह है कि मैं वापस नहीं जाऊंगा, यहीं बस जाऊंगा। उसे संदेह मेरी नागरिकता पर नहीं, मेरे वापस जाने पर है। जिस पासपोर्ट के कारण मुझे बाकी के सारे देश इंडियन मानते हैं और उसी तरह का व्यवहार करते हैं, उस पासपोर्ट को मेरी सरकार मेरे इंडियन होने का सबूत नहीं मानती है। वह तो इसे सिर्फ ट्रैवल डॉक्यूमेंट मानती है।
मेरे पास वोटर कार्ड भी है। उस पर मेरी फोटो भी है और घर का पता भी। एसआईआर की कार्यवाही के बावजूद वह अभी तक बचा हुआ है। उस कार्ड की बदौलत ही मैं कई सारे चुनावों में मतदान भी कर चुका हूँ। सरकार बदलने के लिए भी वोट डाल चुका हूँ। वोट देने के लिए मैं पर्याप्त भारतीय हूँ, लेकिन नागरिक कहलाने के लिए पर्याप्त भारतीय नहीं। लोकतंत्र को मेरे वोट पर भरोसा है, नागरिकता पर नहीं। इससे बड़ा और आत्मनिर्भर लोकतंत्र और क्या होगा?
अब सरकार जी की मर्जी है। वे जब चाहें मेरे द्वारा भरा गया कोई भी फॉर्म, भले ही वह तीस चालीस साल पहले भरा गया हो, निकाल कर पूछ सकते हैं कि तुमने नागरिकता के कॉलम में भारतीय कैसे भरा? सबूत कहाँ है, सबूत? और फिर गलत बयानी के कारण मुझे जेल में डाल सकते हैं। किस धारा में? धारा तो वे कोई सी भी लगा सकते हैं। पुरानी चार सौ बीसी से लेकर नई देशद्रोह तक की। आखिर सरकार उन्हीं की है।
पर मेरे पास भी इसका तोड़ है। मैं अपनी सारी वैचारिक प्रतिबद्धताएँ, सारे सिद्धांत और सारी पुरानी बातें समर्पित कर बीजेपी की सदस्यता ले लूँगा। उसके बाद नागरिकता तो क्या, चरित्र प्रमाणपत्र भी स्वतः उपलब्ध हो जाएगा। आखिर इस देश में सबसे मजबूत दस्तावेज़ कागज़ नहीं, राजनीतिक निष्ठा होती है।
(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)
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