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तिरछी नज़र: सरकार जी और उनका सेशेल्स से पुराना नाता

सरकार जी सेशेल्स गए वहाँ की तो कई कहानियां बनी। अब झूठी हों या सच्ची, कहानियां तो कहानियां हैं, आप भी ग़ौर फ़रमाइए…
MODI Seychelles

हमारे सरकार जी जहाँ भी जाते हैं, नई कहानियां बना कर आ जाते हैं। अभी अमेरिका में प्रेजिडेंट ट्रंप के सामने फर्रे निकाल कर पढ़ना और बार बार मिस्टर प्रेजिडेंट की बजाय योर एक्सलेंसी बुलाना कुछ कुछ ऐसा ही था जैसे 'मोगौंबो ख़ुश हुआ' की तर्ज पर 'ट्रंप ख़ुश हुआ' बुलवाने की कोशिश की जा रही हो।

फिर सरकार जी सेशेल्स गए वहाँ की तो कई कहानियां बनी। अब झूठी हों या सच्ची, कहानियां तो कहानियां हैं और अगर उन्हें कोई व्यंग्यकार सुनाए तो उसमें कुछ और ही मज़ा (अर्थ) है। सो उनमें से कुछ किस्से-कहानियां पेश हैं—

सरकार जी जहाँ भी जाते हैं, वहाँ से अपना नाता जोड़ कर आते हैं। तो पहली कहानी नाता जोड़ने के बारे में ही है। कहानी यह है कि सरकार जी ने सेशेल्स के लोगों को बताया कि उनका सेशेल्स से पुराना नाता है। जिसमें कुछ भी नया नहीं था। यह बात वे जहाँ भी जाते हैं, वहाँ के बारे में बोलते हैं। उन्होंने बताया कि बचपन में एक बार जब वे साबरमती नदी में तैर रहे थे तो तैरते तैरते वे पहले हिन्द महासागर पहुँचे और फिर सेशल्स। उस समय उन्हें वहाँ अंग्रेजों का शासन देख बहुत दुख हुआ था। उसके बाद हर पल वे सेशेल्स की आजादी के बारे में ही सोचते रहते थे। जब भारत में इमरजेंसी लगी तो वे भूमिगत रास्ते से सेशेल्स पहुँचे और उसे आज़ाद करवाया।

दूसरी कहानी मैडल से रिलेटेड है। जब टूर प्रोग्राम बना तब पीएमओ ने सेशेल्स के राष्ट्रपति जी ने कहा कि आपको हमारे सरकार जी का सम्मान करना चाहिए। सेशेल्स के राष्ट्रपति महोदय ने पूछा, बताइये सम्मान कैसे करें। पीएमओ ने बताया, कोई मैडल वैडल दे दो। सब देश यही करते हैं। सेशल्स के राष्ट्रपति श्री पेट्रिक हर्मोनी जी ने बताया कि यह मैडल देने की प्रथा उनके देश में नहीं है। और तो और उनके देश में मैडल ढालने का कारखाना भी नहीं है। पीएमओ ने उनकी चिंता दूर की। बताया कि, चिंता नहीं करें, दो चार मैडल सरकार जी की टूरिंग किट में हमेशा ही पड़े रहते हैं। उन्हीं में से एक दे देना।

तो सेशेल्स के राष्ट्रपति महोदय ने आनन फानन में वहाँ की संसद से एक मैडल स्वीकृत कराया। देश छोटा जरूर है पर संसद का सम्मान बरकरार है। फिर सरकार जी के सेशेल्स पहुंचने पर उनको मैडल प्रदान किया। वह मैडल हमारे देश में बना था, बीजेपी की आईटी सेल ने बनाया था इसीलिए उसमें स्पेलिंग गलत हैं। इस बारे में हमारे देश का मीडिया तो चुप है पर ब्रिटिश अख़बार 'गर्डियन' ने इसकी स्टोरी विस्तार से छापी है।

सरकार जी के सेशेल्स के टूर के बारे में दो और कहानियाँ बताई जाती हैं। पहली तो यह कि सरकार जी ने मैडल मिलने के बाद वहाँ के राष्ट्रपति जी से कहा, आपने मुझे मैडल दिया है, मैं भी आपको कुछ देना चाहता हूँ। मैं आप को सोलह हज़ार करोड़ देता हूँ। राष्ट्रपति पेट्रिक हर्मोनी जी ने कहा, मैडल तो आप ही लाये थे। मैंने तो बस प्रदान ही किया है। हमारा देश छोटा जरूर है पर हमें मदद की जरूरत नहीं है। हमारे देश की प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष आय करीब 45,000 डॉलर है और हर व्यक्ति अपना राशन खुद खरीदता है। आपके यहाँ प्रति व्यक्ति आय 3000 डॉलर सालाना से नीचे टिकी हुई है। आधे से अधिक जनसंख्या खाने के लिए सरकार के मुफ्त राशन पर निर्भर है। राष्ट्रपति महोदय ने यह भी कहा कि सुनते हैं, आपके यहाँ स्कूल बंद हो रहे हैं। नब्बे हज़ार बंद भी हो भी चुके हैं। आप यह पैसा अपने लोगों के लिए रखिये, उन पर खर्च कीजिये।

पर सरकार जी कहाँ मानने वाले थे। पैसा दे कर ही आए। बोले, आप इसे रखिये। हमारे यहाँ नेक (नियम) है कि कोई किसी को शगुन दे तो उसमें कुछ और रकम मिला कर वापस की जाती है। अभी थोड़े दिन में मेरा मित्र यहाँ आएगा, मैंने सोलह हज़ार करोड़ दिये हैं, आप उसमें कुछ जोड़ कर उसे अठारह बीस हज़ार करोड़ के ठेके दे देना। हिसाब बराबर हो जायेगा। रही बात स्कूलों की, तो हमारे यहाँ मोबाइल डाटा बहुत सस्ता है। सारे बच्चे हिस्ट्री, इकोनॉमिक्स, जियोग्राफी सब कुछ व्हाट्सप्प पर ही पढ़ते रहते हैं। छोटे छोटे बच्चे रील बनाने में माहिर हो गए हैं।

अगली कहानी यह है कि सरकार जी सेशेल्स में कछुए से भी मिले। सेशेल्स के कछुए बहुत मशहूर हैं। विशालकाय भी होते हैं और जीते भी बहुत लम्बा हैं। सरकार जी वहाँ के एक बुजुर्ग कछुए से मिले और बोले, "हे कच्छप देवता, मगरमच्छ से तो मैं बचपन में मिल चुका हूँ। उससे मगरमच्छी आँसू बहाना भी सीख चुका हूँ। संसद में और सभाओं में बहाता भी रहता हूँ। खाल मेरी भी तुम्हारे जैसी मोटी है। किसी प्रदर्शन, हड़ताल, भूख हड़ताल का मुझ पर कोई असर नहीं होता है। न तो मैं छात्रों के प्रदर्शन से विचलित होता हूँ न ही बेरोजगारी के बढ़ते आकड़ों से। न कमरतोड़ महंगाई से और न ही बढ़ते भ्रष्टाचार से। और तो और राम जन्मभूमि मंदिर की चंदा चोरी भी मेरी खाल पर कोई असर नहीं डाल सकी। मेरे जैसे ही मेरे मंत्री हैं। हे कच्छप देवता, मैं भी वैसा ही हूँ जैसे आप हैं। और तो और मेरे पास आपके कवच (शैल) जैसा भी कुछ है जिसमें मैं मुसीबत के समय दुबक जाता हूँ। आपका प्रत्यक्ष दर्शन कर मैं अनुग्रहित हुआ"।

उस विशालकाय कछुए ने उत्तर दिया, "हे महामानव, अनुग्रहित तो मैं आपको देख कर हुआ हूँ। कछुओं की खाल तो मोटी प्राकृतिक रूप से होती है पर किसी मानव की खाल भी इतनी मोटी हो सकती है, मैंने सपने में भी नहीं सोचा था। मैं आपको प्रणाम करता हूँ। मेरा प्रणाम स्वीकार करें"।

तो इस तरह सरकार सेशेल्स की यात्रा समाप्त कर स्वदेश लौट आए। देश में कुछ दिन आराम कर अब सरकार जी तीन देशों की यात्रा पर निकल चुके हैं। वहाँ की कहानियां जब पता चलेंगी, सुनाई जाएंगी।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

 

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