बेशक, सोवियत संघ की नामौजूदगी से पूरे विश्व पर प्रभुत्व कायम करने के साम्राज्यवाद के हौसले तो बढ़ गए हैं, फिर भी प्रभुत्व का उसका सपना एक सपना ही रह जाएगा।
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