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तिरछी नज़र: तेल मत देखो, तेल की धार देखो!

“अरे मैडम, तुम भी बेकार के चक्कर में पड़ी हो। ये तीस पैंतीस लीटर पेट्रोल के चक्कर में अमेरिका पीछे नहीं पड़ेगा। हाँ, हमारी सरकार जरूर पीछे पड़ सकती है। ईडी और इनकम टैक्स जरूर पीछे पड़ सकते हैं।”
OIL TRUMP

उस दिन सुबह सुबह पत्नी ने महीने के राशन की लिस्ट पकड़ाई और बोली, "यह आते हुए बाजार से लेते आना"। मैंने लिस्ट पढ़ी तो देखा, लिस्ट में खाने का तेल सिर्फ 200 ग्राम लिखा है। मैंने पूछा, "इस बार खाने का तेल सिर्फ 200 ग्राम लिखा है। क्या पुराना वाला अभी बचा हुआ है जो इतना कम मंगा रही हो"।

"अरे नहीं, वह तो परसों ही खत्म हो गया था। वह तो मैं जैसे तैसे काम चला रही हूँ"। 

"तो फिर सिर्फ 200 ग्राम तेल क्यों"?

"अरे, तुम्हें नहीं पता। वह जो ट्रम्प है ना। वही अमेरिका वाला। अमेरिका का राष्ट्रपति। वह ना तेल के पीछे पड़ा है। जहाँ देखता है, तेल ज्यादा है, वहां कब्जा कर लेता है और वहां के सर्वेसर्वा को हथकड़ी लगा कर अमेरिका ले जाता है। उसकी फोटो नहीं देखी हथकड़ी लगी हुई। मुझे तेल की नहीं, तुम्हारी चिंता है। और मुझे भी साथ ले गया तो। वो पढ़ा नहीं, वेनेजुएला वाले की तो पत्नी को भी साथ ले गया था"। 

"देखो, तुम चिंता मत करो। एक तो यह वह तेल नहीं है जिसके पीछे अमेरिका पड़ा है। दूसरी बात, दो चार लीटर तेल इतना नहीं है कि अमेरिका उसे जब्त करने हमारे घर तक आए। और तीसरी बात उसे कैसे पता कि हमने इतना तेल ख़रीदा है। और यह भी कि हमारे घर में इतना तेल है"।

"यह तो तुम रहने ही दो जी", पत्नी जी ने कहा, "पहली बात तो तेल तेल है कोई सा भी हो। दूसरी बात, ठीक है वेनेजुएला में बहुत अधिक तेल है पर जब अधिक वालों पर कब्जा हो जायेगा तो छोटों की बारी भी तो आएगी ही ना। और तीसरी बात, अमेरिका को कैसे पता कि हमारे यहाँ कितना तेल है। तो उसके जासूस तो सब जगह फैले हुए हैं। उसकी सीआईए सब जगह मौजूद है। कहते हैं कुछ प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों के ऑफिसों तक में उसकी सीआईए मौजूद है। और एक चौथी बात और, यह जो तुम गाड़ी का टैंक फुल करवाते हो ना। आगे से मत करवाया करो। उसमें भी खतरा है। वह तो वही तेल है ना, जिसके पीछे अमेरिका पड़ा है"।

"अरे मैडम, तुम भी बेकार के चक्कर में पड़ी हो। ये तीस पैंतीस लीटर पेट्रोल के चक्कर में अमेरिका पीछे नहीं पड़ेगा। हाँ, हमारी सरकार जरूर पीछे पड़ सकती है। ईडी और इनकम टैक्स जरूर पीछे पड़ सकते हैं। पूछ सकते हैं कि इतना पैसा कहाँ से लाते हो, हर हफ्ते तीन हज़ार का तेल डलवाते हो। इतनी गाड़ी क्यों चलाते हो, कहाँ जाते हो, किससे मिलते हो, किन किन गतिविधियों में शामिल हो। इस पेट्रोल की फंडिंग कहाँ कहाँ से हो रही है। किसी हवाला रैकेट में तो शामिल नहीं हो, आदि, आदि", मैंने मुस्कुराते हुए कहा। "हाँ, ये लोग, ये ईडी, इनकम टैक्स, सीबीआई जरूर मेरे आठ दस घंटे खराब कर सकते हैं। मुझे देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की धाराएं लगा, जेल में डाल सकते हैं"। 

"चलो जी ठीक है, लेकिन अब तुम आगे से गाड़ी में एक बार में एक हज़ार से अधिक का पेट्रोल मत डलवाना। अमेरिका से मत डरो, पर अपनी सरकार से तो खौफ खाओ", पत्नी जी ने समझाया, "अमेरिका से तो सरकार डर लेगी"।

"और सुनो जी, ये रेयर अर्थ एलिमेंट क्या बला है", श्रीमती जी ने पूछा, "वही ना जो जमीन के नीचे से निकलता है, जैसे सोना, चांदी, हीरे वगैहरा। इसके पीछे भी तो अमेरिका पड़ा है। वैसे हमें इसका क्या डर। मायके से सोना मिला नहीं, सासूजी ने चढ़ाया नहीं और तुमने दिलवाया नहीं। मुझसे तो अधिक चिंता तो गुप्ताइन को होगी। हर वक़्त सोने से लदी रहती है"।

"अरे भाई, ये रेयर अर्थ एलिमेंट में सोना-चांदी, हीरे-जवाहरात नहीं आते हैं। कुछ और ही चीजें आती हैं। उनके नाम भी अज़ीब अज़ीब से हैं। नियोडीमियम, सीरियम, यट्रियम आदि। अमेरिका ही नहीं, हमारे सरकार जी भी इसके पीछे पड़े हैं। हमारे यहाँ भी यह लद्दाख में बहुतायत में हैं। इसीलिए तो सरकार जी लद्दाख में वायदे के बाद भी छठी अनुसूची लागू नहीं कर रहे हैं। जनता को दिया वायदा पूरा करें या फिर अपने मित्रों को दिया गया वायदा। जनता के भले की सोचें या फिर अपने दोस्तों के भले की सोचें"।

"समझ गई", पत्नी ने समझाया, "इसीलिए सोनम वांगचुक जेल में है। जब जनता और दोस्तों में से चुनना होता है तो सरकार जी दोस्तों को ही चुनते हैं"।

"इसीलिए तो कहते हैं, 'तेल मत देखो, तेल की धार देखो'।

सरकार जी के वायदे मत देखो, सरकार जी के बयान मत देखो, सरकार जी के भाषण मत देखो, सरकार जी के काम देखो", यह कह कर मैंने बात समाप्त की।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

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