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ख़बरों के आगे-पीछे: चंदा चोरी और छात्र आंदोलन, बीजेपी बैकफुट पर

वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन अपने साप्ताहिक कॉलम में बीजेपी की चंदा चोरी और छात्र आंदोलन पर रणनीति पर बात करते हुए विभिन्न राज्यों की राजनीति पर बात कर रहे हैं।
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फ़ाइल फ़ोटो

भाजपा नेताओं को मुंह बंद रखने के निर्देश 

भाजपा के शीर्ष नेताओं को अब जाकर एहसास हुआ है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी और छात्र आंदोलन के मामले में पार्टी के कुछ नेताओं के बयानों से पार्टी को नुकसान हो रहा है। इसीलिए अब ऐसे नेताओं को मुंह बंद रखने के लिए कहा गया है। इसके बाद ही पार्टी के प्रवक्ता ज्यादा सक्रिय हुए। चढ़ावा चोरी से लेकर छात्रों के प्रदर्शन तक के मुद्दे पर संबित पात्रा की प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू हुई। 

असल में भाजपा के कई नेताओं के बयानों से पार्टी का ठोस वोट बैंक भी नाराज हो रहा था। ऐसे नेताओं में सांसद कंगना रनौत भी एक हैं, जिनके बयानों ने पिछले कुछ दिनों में बड़ी हलचल मचाई। उन्होंने 'जेन ज़ीको लेकर जो बयान दिया उससे भाजपा को नुकसान हुआ। ऊपर से लोगों ने उनकी पुरानी पोस्ट, वीडियो आदि निकाल कर शेयर किए और उनके संस्कारों पर सवाल उठाया। इससे वे खुद भी बैकफुट पर आईं और पार्टी को भी उनके बयानों के बारे में सोचना पड़ा। 

जानकार सूत्रों के मुताबिक ऐसे सभी नेताओं से कहा गया है कि वे बिना मंजूरी के बयान न दें। नीतिगत मामलों में या संवेदनशील राजनीतिक मामलों में उनको अपनी सोशल मीडिया पोस्ट पार्टी के मीडिया विभाग से मंजूर करानी होगी। अपने बयानों से अक्सर मजाक का पात्र बनने वाले फिल्मों से ही जुड़े सांसद रवि किशन और मनोज तिवारी को भी चुप रहने को कहा गया है। इसीलिए रवि किशन ने संसद परिसर में कहा कि वे कुछ दिन मौन रखेंगे। 

चुनाव से पहले पंजाब में छापे

अगले साल के शुरू में जिन पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं, उनमें से चार राज्यों- उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भाजपा की सरकार है। एकमात्र पंजाब है, जहां आम आदमी पार्टी की यानी विपक्ष की सरकार है। भाजपा शासित चारों राज्यों में शांति है। वहां की सरकारें विज्ञापनों के जरिये अपनी झूठी-सच्ची उपलब्धियों का जम कर प्रचार कर रही हैं। सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के प्रयास भी जोर-शोर से हो रहे हैं। लेकिन पंजाब में आम आदमी पार्टी और उसकी सरकार को चुनाव की तैयारी नहीं कर पा रही है। वहां अचानक अलग-अलग समूहों के आंदोलन शुरू हो गए हैं। यही नहीं, हाई कोर्ट ने आदेश दे दिया कि पंजाब सरकार जब तक कर्मचारियों को महंगाई भत्ते का पैसा नहीं देती है तब तक कोई बड़ा विज्ञापन अभियान नहीं शुरू कर सकती है।

पंजाब सरकार की मुश्किल इतने पर ही खत्म नहीं हो रही हैं। अचानक केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता भी बढ़ गई है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने बीते मंगलवार को पंजाब इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन पर छापा मारा। यह कार्रवाई दो साल पहले 2024 में दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई। पहले ईडी या सीबीआई आदि के छापे गड़बड़ी करने वाले व्यक्तियों या निजी कंपनियों पर पड़ते थे। अब विपक्षी पार्टियां और उनकी सरकारों के विभाग भी निशाने पर है। पिछले कुछ दिनों से अचानक ड्रग्स के खिलाफ भी केंद्र की नींद खुली है। सीमा पार से होने वाली तस्करी के बहाने भी पंजाब में कार्रवाई शुरू हुई है। 

एयरपोर्ट ऑथोरिटी का नायाब कारनामा

भारत में विमानन सेक्टर को विनियमित करने के लिए बने निकाय चाहे वह एयरपोर्ट ऑथोरिटी ऑफ इंडिया यानी एएआई हो या विमानन महानिदेशालय यानी डीजीसीए हो, सब मिल कर भी यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पाते हैं। उलटे विमानन कंपनियां अपनी मनमानी करती हैं। बहरहाल एयरपोर्ट ऑथोरिटी ने एक नया कारनामा कर दिया है, जिसकी बड़ी चर्चा हो रही है। उसने यात्रियों की संतुष्टि को लेकर एक कथित सर्वे कराया है, जिसके आधार पर खजुराहो हवाईअड्डे को कस्टमर सेटिस्फ़ेक्शन इंडेक्स यानी यात्री संतुष्टि सूचकांक में सबसे ऊपर रखा गया है। इस पर विवाद इसलिए शुरू हो गया है कि एक जुलाई से इस हवाईअड्डे से एक भी उड़ान संचालित नहीं हुई है। खजुराहो से वाराणसी की जो सीमित उड़ान थी वह भी बंद हो गई है और इसके अक्टूबर तक शुरू होने की कोई संभावना नहीं है। 

अधिकारियों का कहना है कि यह इंडेक्स इस साल के पहले छह महीने के फीडबैक के आधार पर किया गया है। लेकिन पहले छह महीने में भी इस हवाईअड्डे से बहुत सीमित विमान संचालन होता था। सिर्फ दो ही उड़ानें वहां से संचालित होती थीं। एक खजुराहो से दिल्ली और दूसरी खजुराहो से वाराणसी। इसमें भी दिल्ली की उड़ान पहले बंद हो गई थी और वाराणसी वाली एक जुलाई को बंद हो गई। है ना हैरानी की बात कि जिस एयरपोर्ट पर न विमान है, न यात्री हैं, वह एयरपोर्ट यात्रियों की संतुष्टि के सूचकांक में पहले नंबर पर है! 

हिंदू आख़िर कितने बच्चे पैदा करें?

बच्चे पैदा करने के सवाल ने हिंदुओं के लिए उलझन पैदा कर दी है। दरअसल दिल्ली में राज्य सरकार ने महिला सम्मान निधि के नाम पर महिलाओं को ढाई हजार रुपये देने की जो लक्ष्मी योजना शुरू की है उसमें एक प्रावधान किया गया है कि जिन महिलाओं के तीन या उससे ज्यादा बच्चे हैं, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार ने लाभार्थी महिलाओं की संख्या कम से कम रखने के लिए ऐसे कई प्रावधान किए हैं। ऐसे ही प्रावधानों की वजह से दिल्ली में लाभार्थियों की संख्या सिर्फ 17 लाख बताई जा रही है। उसमें भी दिल्ली सरकार डोर टू डोर जाकर महिलाओं का सत्यापन करेगी। 

बहरहाल, तीन या तीन से ज्यादा बच्चों वाली महिलाओं को योजना से बाहर करने के प्रावधान पर आम आदमी पार्टी और दूसरी भाजपा विरोधी पार्टियां चुटकी ले रही हैं। उनका कहना है कि भाजपा और संघ परिवार मिल कर एक बार बता दें कि हिंदुओं को क्या करना है। एक तरफ संघ प्रमुख मोहन भागवत और संघ से जुड़े तमाम साधु-संत और कथावाचक अपील कर रहे हैं कि हिंदुओं को कम से कम तीन बच्चे पैदा करने चाहिए औऱ दूसरी ओर भाजपा की सरकार तीन बच्चों वाले परिवार की महिलाओं को लक्ष्मी योजना से बाहर कर रही है। 

यह देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली की इस योजना के बाद भी क्या संघ के लोग हिदुओं से तीन बच्चे पैदा करने की अपील करेंगे?

ममता बनर्जी की चिंता बढ़ी 

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शभेंदु अधिकारी चार अगस्त को दिल्ली में थे। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 सांसदों से मुलाकात की। इन सांसदों की संवैधानिक स्थिति को लेकर अभी विवाद है। तकनीकी रूप से इन्हें अब भी तृणमूल कांग्रेस का ही सांसद माना जा रहा है। लेकिन ये एनडीए की बैठकों में शामिल हो रहे हैं। संसद सत्र के दौरान हर मंगलवार को होने वाले मंगल मिलन कार्यक्रम में ये सांसद शामिल हुए। बाद में शुभेंदु अधिकारी ने इन सांसदों के साथ बैठक की। शुभेंदु की इस दिल्ली यात्रा ने ममता बनर्जी की चिंता बढ़ा दी है। 

बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी की पार्टी के बचे हुए आठ लोकसभा सांसदों में से कम से कम दो और सांसद भाजपा के संपर्क में हैं। ममता की चिंता किसी तरह से इन दो सांसदों को रोकने की है। असल में इससे पहले खबर आई थी कि ममता बनर्जी का साथ छोड़ कर गए 20 सांसदों में से तीन वापस लौटना चाहते हैं। हालांकि भाजपा के नेता इसका खंडन कर रहे हैं। लेकिन अगर तीन सांसद वापस तृणमूल कांग्रेस में लौटेंगे तो फिर अलग हुए सांसदों पर दलबदल निरोधक कानून लागू हो जाएगा। दो तिहाई की संख्या पूरी करने के लिए 19 सांसदों का होना जरूरी है। इसलिए भाजपा की ओर से कोशिश शुरू हुई है कि कम से कम दो और सांसद तोड़े जाएं। क्योंकि अगर पहले से अलग हुए 20 में से तीन लौट जाते हैं और दो नए आते है तब भी संख्या 19 हो जाएगी।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

 

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