Skip to main content
xआप एक स्वतंत्र और सवाल पूछने वाले मीडिया के हक़दार हैं। हमें आप जैसे पाठक चाहिए। स्वतंत्र और बेबाक मीडिया का समर्थन करें।

एंटी पेपर लीक बिल लोकसभा से पास, जानिए नए बिल में क्या है नया!

लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा से पास हो गया है। जानिए इस बिल में क्या कुछ नया है–
Anti-Paper Leak Bill

छात्र-युवाओं के आंदोलन के बाद पेपर लीक पर नया क़ानून बन रहा है। बुधवार 29 जुलाई को इसे लोकसभा में ध्वनिमत से पास कर दिया गया। अब राज्यसभा की बारी है।

इस बिल का नाम है पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफ़ेयर मीन्स) अमेंडमेंट एक्ट, 2026 यानी लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026। 
क्या आप जानते हैं ऐसा ही क़ानून 2024 में भी बनाया गया था, यह उसका संशोधन है। क्या है ये संशोधन और इससे क्या और कितना फ़र्क पड़ेगा। आइए जानते हैं। जानते हैं कि पहले क़ानून में क्या था और अब क्या बदलाव लाए गए हैं।
सबसे पहले बात कर लेते हैं नये संशोधित क़ानून के उद्देश्य की। तो इसका भी उद्देश्य पेपर लीक और नकल रोकना है जो 2024 में बनाए गए क़ानून का था। बस इसमें इसके लिए जांच और ट्रायल की प्रक्रिया तेज़ करने की बात कही गई है। 
पहले पेपर लीक और अनुचित साधन के प्रयोग में 3 से 5 साल की जेल का प्रावधान था। अब कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल की जेल का प्रावधान और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। अगर यह संगठित अपराध साबित होता है तो कम से कम 7 साल की जेल और 10 करोड़ जुर्माना हो सकता है।
जो दो महत्वपूर्ण बदलाव हैं वो ये हैं कि 2024 के कानून में  जांच के लिए कोई समय सीमा तय नहीं थी, अब दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी और चार्जशीट दायर होने के तीन महीने के भीतर फ़ैसला देना होगा। इसके लिए राज्यों द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। ज़रूरत पड़ने पर विशेष जांच दल यानी एसटीएफ का भी गठन राज्य कर सकेंगे। 
अपराधों की सूची भी स्पष्ट की गई है, इसमें 15 तरह के अपराध रेखांकित किए गए हैं जिनमें पेपर लीक, OMR शीट से छेड़छाड़, फ़र्ज़ी वेबसाइट, फ़र्ज़ी एडमिट कार्ड बनाना शामिल है। 
और फिर है परीक्षा सुरक्षा यानी परीक्षा कराने में किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिससे लीक रोका जा सके तो उसके लिए बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन, परीक्षा केंद्रों का प्री ऑडिट, स्क्रीनिंग, सीट आवंटन आदि को शामिल किया गया है। पहले भी ये था, लेकिन कोई तय मानक नहीं थे, इस संशोधित कानून में मानक तय किए गए हैं। 
कुल मिलाकर युवाओं का आंदोलन रंग लाया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना पड़ा है। और पेपर लीक रोकने के लिए नए सख़्त क़दम उठाए जा रहे हैं। यह कितने कारगर होते हैं ये तो आने वाला समय ही बताएगा। 
विपक्ष ने इस बिल का समर्थन है। हालांकि लोकसभा में बिल पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी बहस और नोक-झोंक हुई, लेकिन वो जंतर-मंतर समेत देशभर में हुए छात्र-युवाओं के आंदोलन से निपटने की लिए किए गए बल प्रयोग को लेकर थी। विपक्ष ख़ासतौर पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गृहमंत्री अमित शाह से लाठी-गोली का हिसाब मांगा। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने भी इसे दोहराया। इसे लेकर सदन में ख़ूब में हंगामा रहा। 

ख़ैर अब इस बिल पर राज्यसभा में चर्चा होगी और फिर वहां से पास होकर यह बिल राष्ट्रपति के पास पहुंचेगा और उनके हस्ताक्षर से यह नया क़ानून बन जाएगा। 

  

अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।

टेलीग्राम पर न्यूज़क्लिक को सब्सक्राइब करें

Latest