कुरुक्षेत्र में एक मुसलमान के ढाबे में तोड़फोड़, हनुमान चालीसा का पाठ
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में हिंदुत्ववादी संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने रेलवे रोड पर एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा चलाये जा रहे 'पंजाबी ढाबे' पर तोड़फोड़ की। आरोप है कि इसमें विश्व हिन्दू परिषद् और बजरंग दल के कार्यकर्ता शामिल थे। ढाबे की कुर्सियां, सामान तोड़ कर 'जय श्री राम' के नारे लगाते हनुमान चालीसा का पाठ किया और बेहद साम्प्रदायिक भाषण दिए। पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर घूम रहा है, जिसमें पुलिस पूरी घटना को मूक दर्शक बन कर देख रही है।
घटना 24 मार्च की शाम की है। आरोप है कि विश्व हिन्दू परिषद के प्रांत अधिकारी राकेश कठवाड़ की अगुवाई में यह भीड़ इकट्ठी हुई थी। इसका एक वीडियो भी वायरल है। जिसमें राकेश कठवाड़ कह रहा है कि ढाबा चलाने वाला व्यक्ति मुस्लिम है और वह नाम बदल कर यह ढाबा चला रहा है, अपनी धार्मिक पहचान छिपा कर हिन्दू लोगों की धार्मिक भावना आहत करने के साथ साथ उन्हें अपने ढाबे की ओर आकर्षित कर रहा है|

बजरंग दल का एक पदाधिकारी ने कहा, "कुरुक्षेत्र एक धर्म नगरी है| हम पहले भी कई बार दूसरे समुदाय के लोगों को चेतावनी दे चुके हैं कि अपने धर्म या अपना नाम लिखकर वे अपना व्यवसाय करें|"
विश्व हिन्दू परिषद् का राकेश कठवाड़ यह भी आरोप लगा रहा है कि इस ढाबे में मांस-मछली भी दी जाती है| वीडियो में वह नफरती बोल बोलते हुए कह रहा है, "यहाँ पर ‘सुगन्ध ढाबा’, ‘पंजाबी ढाबा’ आदि नाम हमारे हिन्दू नामों पर रख कर विधर्मी लोगों द्वारा चलाये जाते है। नवरात्रों के दिनों में भी यह खुले हुए हैं और यहाँ मांस सरेआम बेचा जा रहा है| इन दिनों तो हम लहसुन, प्याज से भी परहेज करते हैं| यह ढाबा एक सिख भाई का है जिसने आगे मुसलमान को दे रखा है, मैं तो उसे भी कहूँगा के आप के सिख गुरुओं के साथ इन लोगों ने क्या किया था याद रखें|"
वीडियो में हिन्दुत्ववादी संगठन सरेआम धमकी दे रहे हैं कि कोई भी इन मुस्लिम लोगों को किराये पर दुकान या मकान न दें, नहीं तो आगे की कार्रवाई के लिए आप खुद जिम्मेवार होंगे|
ढाबे के साथ के पड़ोसी हिन्दू दुकादार ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे गुंडागर्दी का नंगा नाच कहा है| अपना नाम ना उजागर करते हुए उस दुकानदार ने हमें बताया, "यह गुंडागर्दी है| यहाँ कोई भी अपना नाम छिपा कर काम नहीं कर रहा| मुश्ताक भाई (ढाबे वाले का नाम) को हम 35 साल से जानते हैं| मीट-मांस और मछली का आरोप बिल्कुल झूठा है, इस ढाबे पर कोई बीड़ी भी पीये तो उसको खाना नहीं दिया जाता| इन लोगों ने इतना उत्पात मचाया, बना-बनाया खाना फेंक दिया और इतनी तोड़ फोड़ की कि हम लोग सहम गए| गैस के सिलेंडर को इतने जोर से दुकान से बाहर फेंका कि उससे कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती थी, साथ की दुकाने भी चपेट में आ सकती थीं|"
ढाबे को चलाने वाले मुश्ताक अली से हमारी बात नहीं हो सकी पर उनके भाई इरशाद अली ने हमारे साथ संक्षेप में बात करते हुए कहा, "यह लोग सिर्फ धर्म के नाम पर नफरत फैला कर राजनीति कर रहे थे| ये लोग झूठ बोल कर उत्पात मचा रहे थे।"
हरियाणा के 'जन संघर्ष मंच हरियाणा' ने इस तोड़ फोड़ के विरुद्ध तुरंत आवाज़ उठायी, एक प्रभावशाली प्रदर्शन किया और पुलिस अधीक्षक कुरुक्षेत्र को ज्ञापन सौंपते हुए उत्पातियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है| 'जन संघर्ष मंच हरियाणा' की एक टीम घटना स्थल पर गई और स्थानीय लोगों से बात भी की।

संगठन की महासचिव सुदेश कुमारी ने हमें बताया कि, "ये हिन्दुत्ववादी संगठन साम्प्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ रहे हैं और समाज में धर्म के आधार पर नफरत फैला रहे हैं |सरकार और प्रशासन की इनको शह दिखाई देती है| इस मामले को यदि हम प्रथम दृष्टि से देखे तो स्पष्ट है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है यहाँ किसी भी धर्म का व्यक्ति अपना व्यवसाय किसी भी नाम से कर सकता है| एक मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति द्वारा 'पंजाबी ढाबा' नाम से ढाबा चलाना कोई अपराध नहीं है| हिन्दू कट्टरवादी संगठनों की यह कार्रवाई ज़रूर दंडनीय अपराध है| जहाँ तक कुरुक्षेत्र शहर में ढाबों पर मांस-मछली बेचे जाने का सवाल है, यदि यह किसी कानून का उल्लघंन है, तो इसकी जाँच और कारवाई करना पुलिस व न्यायालय का क्षेत्र है| ये लोग कौन होते है किसी दुकान या ढाबे पर जा कर तोड़ फोड़ करने वाले और धमकियां देने वाले? अब शहर में कानून का राज चलेगा या बजरंग दल जैसे साम्प्रदायिक संगठनों का? दंगा भड़काने वाली ऐसी ताकतों के आगे पुलिस का असहाय मूकदर्शक बने रहना अत्यंत खेदजनक व चिंता का विषय है|"
‘पंजाबी ढाबा’ के असल मालिक मलकीत सिंह ने पुलिस अधीक्षक को दी अपनी शिकायत में साथ वाले तिरुपती होटल के मालिकों की शह पर यह सब काम इन संगठनों से करवाने का आरोप लगाया है| उन्होंने अपनी शिकायत में लिखा है कि उनके होटल में लोग रहने तो आते हैं लेकिन खाना हमारे ढाबा में खाते हैं इसलिए होटल वालों को यह दिक्कत थी |
सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ता एडवोकेट कविता विद्रोही का कहना है, "असल में ये लोग नफरती के साथ-साथ अक्ल से भी अंधे होते है| उतराखंड में जैसे इस तरह के संगठन ‘बाबा’ शब्द को हिन्दुओं का बता रहे थे उसी तरह हर नाम में इन्हें सिर्फ हिन्दू-मुसलमान दिखता है| इस तरह के संगठनों द्वारा की जाने वाली साम्प्रदायिक हिंसा राज्य में चिंता का विषय है, खासकर कुरुक्षेत्र में पहले भी ये संगठन मुस्लिम विरोधी हिंसा कर चुके हैं| शहर में लगने वाले ‘गीता जयंती’ मेले में इन्ही लोगों ने कश्मीरी मुसलमान दुकानदारों के साथ मारपीट की थी| पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद बजरंग दल जैसे संगठनों ने मुस्लिम रेहड़ी वालों को मार-पीट कर भगा दिया था| पुलिस प्रशासन इनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं करता जिसके कारण इनके हौसले बुलंद हैं| पिछली घटनाओं के विरुद्ध भी हमने सबूत के साथ पुलिस के पास जा कर शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन कोई ठोस करवाई नहीं हुई|”
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
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