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संघर्ष रैली : मज़दूरों-किसानों का ऐलान-सरकार नहीं चेती तो जाना होगा

देशभर से दिल्ली के रामलीला मैदान में जुटे हज़ारों-हज़ार मेहनतकश मज़दूर-किसानों ने केंद्र सरकार को सीधी चेतावनी दी है कि अगर अब भी वह नहीं चेती और जनविरोधी नीतियों को नहीं बदला तो उसे जाना होगा।

देशभर से दिल्ली के रामलीला मैदान में जुटे हज़ारों-हज़ार मेहनतकश मज़दूर-किसानों ने केंद्र सरकार को सीधी चेतावनी दी है कि अगर अब भी वह नहीं चेती और जनविरोधी नीतियों को नहीं बदला तो उसे जाना होगा। आपको मालूम ही है कि 2024 आम चुनाव का साल है और आज किसान-मज़दूरों का इतना बड़ा जमावड़ा इसी का संकेत है कि आम लोगों में इस सरकार की नीतियों को लेकर किस क़दर असंतोष है।

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क्या है मांगें

इस रैली-प्रदर्शन के माध्यम से देश के मेहनतकश लोगों की बुनियादी मांगों को दोहराया जा रहा है, जैसे कि न्यूनतम मज़दूरी 26,000 रुपये प्रति माह और पेंशन 10,000 रुपये प्रतिमाह सुनिश्चित करें, कानूनी रूप से गांरंटीकृत खरीद, सभी कृषि उत्पादों के लिए C2 + 50% पर आधारित एमएसपी सुनिश्चित करें।

चार श्रम संहिताएं और बिजली संशोधन विधेयक 2020 को निरस्त करें, मनरेगा के तहत 600 रुपये मज़दूरी कर 200 दिन काम प्रदान करें। मनरेगा का शहरी क्षेत्रों में विस्तार किया जाए। गरीब तथा मध्यम किसानों एवं खेत मजदूरों की एकमुश्त कर्जा माफी। इसके अलावा संयुक्त सम्मेलन ने सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण को रोकने, नई शिक्षा नीति को वापस लेने, अग्निपथ को बंद करने, मूल्य वृद्धि को रोकने, सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने जैसी मांगे सामने रखीं। इसके अलावा सभी श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक 10,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन और धनाढ्य वर्ग पर कर लगाने जैसी मांगे भी दोहराईं गई हैं। इसके साथ ही संविधान पर बढ़ते हमलों को रोकने और सांप्रदायिकता के बढ़ते खतरों की ओर भी इशारा किया गया है।

सितंबर 2022 से चल रही थी तैयारी

इस किसान मज़दूर संघर्ष रैली का आह्वान 5 सितंबर, 2022 को दिल्ली के तालकटोरा में हुए एक संयुक्त अधिवेशन में किसान संगठन अखिल भारतीय किसान सभा, मज़दूर संगठन सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन और खेत मजदूरों के संगठन अखिल भारतीय खेत मज़दूर यूनियन ने किया था। इस ऐतिहासिक रैली से पहले देशभर मे तीनों संगठनों और इनके कार्यकर्ताओं ने जमीनी स्तर पर जिला,ब्लॉक और गांवों के स्तर पर सभी वर्गों की एकता बनाई और सांझे कार्यक्रम किए। 5 सितंबर के अधिवेशन के बाद ही अपने मांगों को देशभर के मजदूरों, किसानों और खेतिहर मजदूरों तक पहुँचाने के लिए तीनों संगठनों की सभी इकाइयों ने अक्टूबर 2022 से फरवरी 2023 तक एक गहन और व्यापक अभियान चलाया। बीते चार महीनों के दौरान स्थानीय मांगों सहित मुद्दों और मांगों पर पर्चा, पोस्टर वितरण, दीवार लेखन, बैठकों, जत्थे, जुलूस आदि के माध्यम से, राज्य और जिला संयुक्त बैठके कर तथा योजना बनाकर बहुमत लोगो तक पहुंचाया गया है।

संघर्ष रैली वर्गीय एकता का अद्वितीय उदाहरण

आपको बता दे ये संघर्ष रैली अपने आप ऐतिहासिक है क्योंकि देश के हर तबके के मज़दूर,कर्मचारी और किसानों की एकता शायद ही इससे पहले देखी गई हो। ये एकता कोई सिर्फ नेताओ या फिर संगठनों के स्तर पर नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर दिखती है। इसमें शामिल किसान कर्मचारियों के हक में पुरानी पेंशन की बात करते है तो कर्मचारी भूमिहीन किसान और खेत और मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी का सवाल उठा रहे हैं, वही खेत मज़दूर किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग को दोहरा रहे हैं।

सेंट्रल दिल्ली किसानों-मज़दूरों से पटी

रामलीला मैदान और उसके आस पास सेंट्रल दिल्ली की सड़कों किसान मजदूरों से पटा हुआ है जबकि इनके लाल झंडों और बैनरों ने इस पूरे इलाके की एक अलग ही तस्वीर बना दी है।

इसके साथ ही मैदान के भीतर ऐसा लग रहा है जैसे किसान मजदूरों का एक सैलाब पहुंचा है और इनके लाल झंडे ने पूरे मैदान को लाल समंदर में तब्दील कर दिया है। सुबह में ही इतनी बड़ी संख्या में किसान रामलीला मैदान पहुंच गए, जबकि जितने किसान मज़दूर अंदर है उससे कही ज्यादा अभी भी मैदान के बाहर सड़कों पर हैं।

सुबह से ही मेहनतकश जनता का काफ़िला पहुंच रहा है रामलीला

दिल्ली के कई इलाकों से हजारों हजारों के जत्थों के साथ मार्च करता हुआ किसान मजदूरों का अलग काफिला सुबह से ही रामलीला मैदान की ओर बढ़ रहा है। ये अभी भी जारी ही है।

दिल्ली के दूर के राज्यों जैसे बिहार , असम , बंगाल , केरल ,तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कश्मीर , हिमाचल आदि राज्यों के किसान 2 अप्रैल से ही दिल्ली पहुँचने लगे थे और इनके रुकने की व्यवस्था दिल्ली के आस पास कई कैम्प बनकर की गई थी। इसके साथ ही दिल्ली के कई गुरुद्वारों में भी मज़दूर किसान रुके थे।

दिल्ली के शीशगंज, रकाबगंज और बंगलासाहिब गुरुद्वारों मे रुके प्रदर्शनकारी मार्च करते हुए रामलीला पहुँच रहे हैं। जबकि इसी तरह गाजियाबाद और बाकी अन्य जगह रुके किसान स्टेशन से ही मानव शृंखला बनाकर रैली स्थल पर आ रहे थे। एक बड़ा जत्था दिल्ली के अंबेडकर भवन में रुका था वो भी अपने लाल झंडे और बुलंद नारों के साथ पैदल ही रामलीला मैदान कूच कर गया। इसी तरह दिल्ली और उसके आसपास के मज़दूर और कर्मचारी राजघाट के पास समता स्थल पर जुटे और वहाँ से मार्च करते हुए रामलीला मैदान पहुँचे।

तस्वीरों में देखिए दिल्ली की सड़कों और रामलीला मैदान का नज़ारा

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"हम एपीसीओएस का विरोध करते हैं, हम इसका नियमितिकरण चाहते हैं।"

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हजारों के जत्थे में संघर्ष रैली के लिए रामलीला मैदान पहुंचे किसान !

आशा कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर रामलीला मैदान में एकजुट

असम और पंजाब की आशा कार्यकर्ता अपने-अपने राज्यों की समस्याओं पर चर्चा के लिए दिल्ली के रामलीला मैदान में पहुंचीं और सभी एक दूसरे के साथ एकजुटता से खड़ी हैं।

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रैली में खेतिहर मज़दूरों और किसानों का पूरा प्रतिनिधित्व देखा जा सकता है

अपनी मांगों को लेकर राम लीला मैदान में देश भर से आए खेतिहर मज़दूरों, किसानों और मजदूर वर्ग का पूरा प्रतिनिधित्व देखा जा सकता है। इस रैली में भाग लेने के लिए पंजाब, तमिलनाडु, बिहार, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से कार्यकर्ता पहुंचे हैं।image

"हम समान काम के लिए समान वेतन मांग करते हैं।"

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बंगाल के सरकारी कर्चारियों ने महंगाई भत्ता बढ़ाने की मांग की

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"सरकारी कर्मचारियों पर तानाशाही हमले बंद करो"

पश्चिम बंगाल से आए लोगों ने अपनी मांगों में कहा,  सरकारी कर्मचारियों पर तानाशाही हमले बंद करो।

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सीटू ने ट्वीट करते हुए लिखा, "किसानों को लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है।"

अपने अगले ट्वीट में सीटू ने लिखा, "ऐसे समय में जब मनरेगा के तहत काम की मांग लगातार बढ़ रही थी, सरकार ने इसके लिए आवंटन में भारी कमी कर पिछले दो वर्षों में 38,000 करोड़ रुपये तक कर दी है।"

आदिवासियों से उनका वन तथा भूमि का अधिकार छीना जा रहा : सीटू 

आदिवासियों से उनका वन तथा भूमि का अधिकार छीना जा रहा है और इसे कॉर्पोरेट को सौंपा जा रहा है। 

श्रमिकों के लिए न्यूनतम मज़दूरी और पेंशन सुनिश्चित करे सरकार :  सीपीआईएम

सीपीआईएम ने ट्वीट करते हुए लिखा, "सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मज़दूरी 26,000 रुपये प्रति माह और पेंशन 10,000 रुपये सुनिश्चित करें। ठेके पर कोई काम का नहीं चलेगा। अग्निपथ योजना को वापस लो।"

असम से चाय बाग़ान से जुड़े मज़दूर भी दिल्ली पहुंचे

अखिल भारतीय चाह मज़दूर संघ (असम) के बैनर तले बड़ी संख्या में चाय बाग़ान से जुड़े मज़दूर अपनी मांगों को लेकर दिल्ली पहुंचे।image

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