क्या है मांगें
इस रैली-प्रदर्शन के माध्यम से देश के मेहनतकश लोगों की बुनियादी मांगों को दोहराया जा रहा है, जैसे कि न्यूनतम मज़दूरी 26,000 रुपये प्रति माह और पेंशन 10,000 रुपये प्रतिमाह सुनिश्चित करें, कानूनी रूप से गांरंटीकृत खरीद, सभी कृषि उत्पादों के लिए C2 + 50% पर आधारित एमएसपी सुनिश्चित करें।
चार श्रम संहिताएं और बिजली संशोधन विधेयक 2020 को निरस्त करें, मनरेगा के तहत 600 रुपये मज़दूरी कर 200 दिन काम प्रदान करें। मनरेगा का शहरी क्षेत्रों में विस्तार किया जाए। गरीब तथा मध्यम किसानों एवं खेत मजदूरों की एकमुश्त कर्जा माफी। इसके अलावा संयुक्त सम्मेलन ने सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण को रोकने, नई शिक्षा नीति को वापस लेने, अग्निपथ को बंद करने, मूल्य वृद्धि को रोकने, सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने जैसी मांगे सामने रखीं। इसके अलावा सभी श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक 10,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन और धनाढ्य वर्ग पर कर लगाने जैसी मांगे भी दोहराईं गई हैं। इसके साथ ही संविधान पर बढ़ते हमलों को रोकने और सांप्रदायिकता के बढ़ते खतरों की ओर भी इशारा किया गया है।












