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ख़बरों के आगे-पीछे: पाठ्यक्रम में राजनीतिक दुष्प्रचार और भाजपा नेताओं की ‘ज्ञान गंगा’

अपने साप्ताहिक कॉलम में वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन जीएसटी से लेकर लैटरल एंट्री और सांसद अनुराग ठाकुर के ज्ञान की चर्चा कर रहे हैं।
NCERT-ANURAG

जीएसटी कम होने के इंतज़ार में बाज़ार में मंदी

केंद्र सरकार वस्तु व सेवा कर यानी जीएसटी का ढांचा बदलने जा रही है। खबर है कि 12 और 28 फीसदी का टैक्स स्लैब खत्म कर दिया जाएगा। इसके साथ ही 12 फीसदी के टैक्स स्लैब की कई वस्तुओं को पांच फीसदी के स्लैब में ला दिया जाएगा। इससे आम लोगों को बहुत लाभ होगा क्योंकि रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में अच्छी खासी कमी आएगी। जीवन और स्वास्थ्य बीमा पर प्रीमियम 18 से घटा कर पांच फीसदी करने या शून्य कर देने की संभावना जताई जा रही है। पिछले दिनों मंत्री समूह की बैठक हुई, जिसमें 12 और 28 फीसदी का स्लैब हटाने की सिफारिश जीएसटी काउंसिल को भेजी है। तीन और चार सितंबर को जीएसटी काउंसिल की बैठक में इस पर मुहर लग सकती है। हालांकि कई राज्यों ने इस पर आपत्ति की है और अपना राजस्व घटने की चिंता जताई है। बहरहाल, यह जब होगा तब होगा लेकिन उससे पहले बाजार में मंदी आ गई है। उपभोक्ताओं ने खरीद बंद कर दी है। त्योहार शुरू हो गए हैं लेकिन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की खरीदारी में कमी आई है। उत्तर-पश्चिमी भारत में गणेशोत्सव और दक्षिण भारत में ओणम शुरू हो गया है। दोनों त्योहार सितंबर के पहले हफ्ते तक चलेंगे। इस दौरान खूब खरीदारी होती है, लेकिन इस बार बिक्री कम हुई है। क्योंकि मीडिया मे खबर आ गई कि कौन-कौन सी चीजें कितनी सस्ती होने वाली है। इसलिए लोगों ने खरीद रोक दी है और कंपनियां परेशान हैं। 

राजनीतिक दुष्प्रचार भी पाठ्यक्रम में शामिल 

जो दुष्प्रचार अभी तक वाट्सएप यूनिवर्सिटी के माध्यम से होता था या जिन बातों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित तमाम भाजपा नेता अपने भाषणों दोहराते थे, वह दुष्प्रचार अब स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है। एनसीईआरटी के नए शिक्षा मॉड्यूल के मुताबिक मोहम्मद अली जिन्ना, अंग्रेज सरकार और कांग्रेस पार्टी, तीनों ही भारत के विभाजन के लिए जिम्मेदार थे। पहली बार ऐसा हो रहा है कि छात्रों को यह पढ़ाया जाएगा कि जिन्ना और अंग्रेजों के साथ-साथ कांग्रेस भी उस भयावह मानवीय त्रासदी के लिए जिम्मेदार है, जिसमें करीब छह लाख लोग मारे गए थे और डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोग विस्थापित हुए थे।

एनसीईआरटी की ओर से तैयार किए गए शिक्षा मॉड्यूल में सवाल है कि भारत के विभाजन के गुनहगार कौन लोग है? इसके जवाब में कहा गया है कि पहला, मोहम्मद अली जिन्ना, जिन्होंने इसकी मांग की। दूसरा, कांग्रेस पार्टी, जिसने इस मांग को स्वीकार किया और तीसरा अंग्रेज सरकार, जिसने इसकी मंजूरी दी। इसमें नेहरू के जुलाई 1947 के भाषण का भी जिक्र है, जिसमें उन्होंने कहा है कि देश ऐसी स्थिति में था, जहां या तो विभाजन स्वीकार करना था या चल रहा संघर्ष जारी रहने देना था। उन्होंने इस भाषण में कहा था कि विभाजन बुरा है लेकिन एकता की जो भी कीमत है उसके मुकाबले देश में चल रहे गृह युद्ध की कीमत बहुत बड़ी होगी। इसलिए विभाजन स्वीकार किया गया। इस तरह भारत सरकार ने कांग्रेस विरोधी एक बड़े नैरेटिव को पाठ्यक्रम का हिस्सा बना दिया है।

नए भारत की पुलिस और जांच एजेंसियां 

यह नया भारत है। इसमें जो व्यक्ति आरोप लगाता है उसे सबूत भी खोज कर देना होता है। इस नए भारत में पुलिस और जांच एजेंसियां सबूत नहीं खोजती हैं। जैसे राहुल गांधी ने आरोप लगाए कि कर्नाटक की बेंगलुरू सेंट्रल लोकसभा सीट के तहत महादेवपुरा विधानसभा सीट पर एक लाख वोट की गड़बड़ी हुई। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन देकर बताया कि कितने तरह की गड़बड़ी हुई है। जैसे ही उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस समाप्त हुई चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि वे अपने हलफनामे के साथ सबूत सहित अपने आरोप आयोग को भेजें। 

अब ताजा मामला केरल के कम्युनिस्ट सांसद जॉन ब्रिटास का है। ऑपरेशन सिंदूर के सीजफायर के बाद जब विदेश सचिव विक्रम मिस्री पर सोशल मीडिया में निजी हमले शुरू हुए और उनके परिवार को निशाना बनाना जाने लगा तो ब्रिटास ने इसकी शिकायत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भेजी थी। मिस्री और उनके परिवार की महिलाओं पर हमला करने वाले नफरती और फसादी तत्व थे, जो सीजफायर का गुस्सा उन पर निकाल रहे थे। इस शिकायत के तीन महीने बाद अब पुलिस ने ब्रिटास से कहा है कि उन्होंने जो आरोप लगाए हैं उसके सबूत पेश करें। सोचने वाली बात है कि सब कुछ सोशल मीडिया में है और सारी बातों का डिजिटल प्रिंट मौजूद है। फिर भी जांच करके कार्रवाई करने की बजाय तीन महीने के बाद पुलिस जॉन ब्रिटास से इसलिए सबूत मांग रही है क्योंकि उन्होंने शिकायत की है।

लैटरल एंट्री से नियुक्ति क्यों बंद हुई?

कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अलग-अलग फील्ड के विशेषज्ञों को लैटरल एंट्री के जरिये लाकर केंद्र सरकार मे संयुक्त सचिव बनाना शुरू किया था लेकिन अब उस प्रक्रिया को रोक दिया गया है। पिछले साल आखिरी बार इसकी वैकेंसी निकली थी लेकिन आननफानन में उसे वापस ले लिया गया। पिछले दिनों इसे लेकर सांसदों ने कुछ सवाल पूछे थे, जिनके जवाब में केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि लैटरल एंट्री से होने वाली नियुक्तियों में आरक्षण का प्रावधान नहीं है। इसीलिए सवाल है कि क्या सोशल मीडिया में बन रहे नैरेटिव और आरक्षण विरोधी ठहराए जाने की चिंता में केंद्र सरकार ने इसे रोक दिया? केंद्र में इस योजना के शुरू होने का श्रेय प्रशांत किशोर लेते हैं। उनका दावा है कि उनकी सलाह पर ही प्रधानमंत्री मोदी ने यह योजना शुरू की थी। वे कह रहे है कि बिहार में उनकी सरकार बनी तो वे लैटरल एंट्री के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को नियुक्त करेंगे और नौकरशाही की नकेल कसेंगे। 

गौरतलब है कि इस देश में ज्यादातर बड़े बदलाव नॉन आईएएस यानी लैटरल एंट्री वालों ने ही किए हैं। हरित क्रांति एमएस स्वामीनाथन ने की तो दूध की श्वेत क्रांति जॉर्ज कुरियन ने की थी। अंतरिक्ष की क्रांति विक्रम साराभाई ने तो एटॉमिक क्रांति होमी जहांगीर भाभा ने की। मिसाइल की क्रांति एपीजे अब्दुल कलाम ने तो संचार क्रांति सैम पित्रोदा ने की। जरुरत ऐसे लोगों को खोजने की है। लैटरल एंट्री के जरिये भाई भतीजों की भर्ती होगी तो कुछ नहीं हो पाएगा।

भाजपा नेताओं की ज्ञान गंगा

भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बच्चों के एक कार्यक्रम में अपने 'ज्ञान की गंगाबहाई है। उन्होंने बच्चों से पूछा कि सबसे पहला अंतरिक्ष यात्री कौन था? ज़्यादातर बच्चों ने नील आर्मस्ट्रांग का नाम लिया। लेकिन अनुराग ठाकुर ने उसे सही करने की बजाए चार क़दम आगे बढ़कर कहा कि हनुमान जी पहले अंतरिक्ष यात्री थे। सवाल है कि क्या भारत की पौराणिक कथाओं को इस संदर्भ में समझाया जा सकता है? अगर भारत के धार्मिक आख्यानों को देखें तो हनुमान जी से पहले भी अनगिनत देवताओं के धरती पर आने और वापस स्वर्ग लोक जाने की कथाएं हैं। फिर हनुमान जी का ही जिक्र क्यों? यह अलग बात है कि अनुराग ठाकुर के अपने बच्चे दुनिया के किसी बड़े स्कूल या यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे होंगे, जहां उन्हें यही बताया जाएगा कि पहले अंतरिक्ष यात्री रूस के यूरी गैगरिन थे। पता नहीं, भाजपा के नेताओं को यह बात क्यों समझ में नहीं आती है कि वे इस तरह से अपने देवी-देवताओं के चमत्कार को सामान्य अंतरिक्ष यात्री की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दे रहे हैं। अनुराग ठाकुर ने जो कहा, उसका मतलब यह भी होता है कि जैसे हनुमान जी थे वैसे ही यूरी गैगरिन या राकेश शर्मा या शुभांशु शुक्ला है! इसी तरह की बात कुछ साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक कार्यक्रम में कही थी कि दुनिया के पहले सर्जन भगवान शिव थे, जिन्होंने गणेश जी के धड़ पर हाथी का सिर लगाया था। सोचने वाली बात है कि इससे भगवान शिव की महिमा बढ़ी या उन्हें सर्जरी करने वाले सामान्य डॉक्टर की श्रेणी में ला दिया गया! 

भाजपा का चुनाव लड़ने का नया मॉडल

विपक्षी पार्टियां चुनावों में गड़बड़ी के जो आरोप लगा रही हैं, भाजपा के नेता जाने-अनजाने उन आरोपों की पुष्टि कर रहे हैं। केरल में विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया कि त्रिशूर से भाजपा सांसद सुऱेश गोपी उस इलाके के रहने वाले नहीं है और वोटर बनने के लिए उस इलाके में रहने की अनिवार्य शर्त पूरी करने की अवधि से पहले ही वे वहां के वोटर बन गए थे। यह मामला अदालत तक पहुंचा है। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि त्रिशूर सीट भाजपा इसलिए जीती क्योंकि उसने बाहर से लोगों को लाकर इस क्षेत्र में बसाया और उनके वोट डलवाए। 

बिहार में अलग विवाद हुआ है। भाजपा के संगठन महामंत्री भीखूभाई दलसानिया बिहार में वोटर बने हैं और पिछले साल लोकसभा चुनाव में उन्होने गुजरात में वोट डाला था। विपक्ष आरोप लगा रहा है कि जहां-जहां चुनाव होंगे वहां-वहां वे मतदाता बनेंगे। बहरहाल, केरल भाजपा के उपाध्यक्ष बी. गोपालकृष्णन ने विपक्ष के इन आरोपों पर मुहर लगा दी है। उन्होंने कहा है कि पिछले लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने बाहर के लोगों को त्रिशूर में शिफ्ट किया था और उनको मतदाता बनवाया था ताकि त्रिशूर का चुनाव जीता जा सके। वे इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने कहा कि जिन चुनाव क्षेत्र में भाजपा जीतना चाहती है, वहां दूसरी जगह से लाकर लोगों को वोटर बनवाया जाता है। गोपालकृष्णन ने कहा कि जरुरत पड़ी तो जम्मू कश्मीर से लाकर लोगों को मतदाता बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पहले भी ऐसा किया है और आगे भी करेगी।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

 

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