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तिरछी नज़र: सरकार जी के रात 8 और 8.30 बजे के संबोधन का अंतर

सरकार जी ने आगे बताया कि कांग्रेस के शासन में महिलाएँ इतनी असुरक्षित थीं कि पति विवाह के बाद पत्नी को छोड़कर जा सकता था। पर आज स्थिति बदल चुकी है…
Women's Reservation
कार्टून, कार्टूनिस्ट सतीश आचार्य के X हैंडल से साभार

इस बार सरकार जी ने रात के साढ़े आठ बजे राष्ट्र को संबोधित किया। यह समय अपने आप में ऐतिहासिक था। सरकार जी का राष्ट्र को संबोधन सामान्यतः रात आठ बजे होता है। आठ बजे वाले संबोधन वे होते हैं जिनके बाद जनता की नींद उड़ जाया करती है—जैसे नोटबंदी, लॉकडाउन वगैरह। साढ़े आठ बजे वाले संबोधन जनता के लिए सुरक्षित मान सकते हैं; इनमें विपक्ष की नींद उड़ाई जाती है। काम की 'भाइयों और बहनों' रात आठ बजे होती हैं, और चुनावी काम की 'भाइयों और बहनों' साढ़े आठ बजे।

सरकार जी ने कहा—"माताओं, बहनों और बेटियों,

आज मेरा हृदय अत्यंत व्यथित है। नारी सम्मान के लिए मेरा समर्पण किसी से छिपा नहीं है। मैंने नारी वंदन विधेयक 2023 में पारित कराया, अधिनियम भी बन गया, लेकिन मेरा मन इतने से संतुष्ट नहीं हुआ। मैं उसे फिर से पारित कराना चाहता था, ताकि इतिहास में यह दर्ज हो कि एक ही बिल को दो बार पास कराने का साहस भी केवल मुझमें है। परंतु कांग्रेस ने इसमें भी बाधा डाल दी।"

कांग्रेस की यही पुरानी आदत है। उसने न स्वयं कुछ अच्छा किया, न ही किसी और को करने दिया। आज़ादी से पहले भी उसने आरएसएस को स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल नहीं होने दिया था, और आज भी वह यही कर रही है। नारी सशक्तिकरण के श्रेय में साझेदारी नहीं करने देना चाहती है।

सरकार जी ने आगे बताया कि कांग्रेस के शासन में महिलाएँ इतनी असुरक्षित थीं कि पति विवाह के बाद पत्नी को छोड़कर जा सकता था। पर आज स्थिति बदल चुकी है। अब अगर कोई छोड़कर जाता भी है, तो लोग उसके जीवन से प्रेरणा लेते हैं। उसके जीवन पर जीवनियां लिखी जाती हैं। 

उन्होंने बड़े दर्द से कहा कि कांग्रेस के शासन में न तो माँ को इतनी स्वतंत्रता थी कि वह अपने बेटे के साथ फोटो खिंचवा सके और न ही बेटा माँ के साथ फोटो खिंचवा सकता था। वे स्वयं इस अन्याय के भुक्तभोगी रहे हैं। बचपन, युवावस्था—कहीं भी माँ के साथ उनकी कोई तस्वीर नहीं मिलती है। जो भी तस्वीरें मिलती हैं, उनके सरकार जी बनने के बाद की ही मिलती हैं। कितना अन्याय था मांओं के साथ कांग्रेस के उस दौर में। और यह कहते हुए सरकार जी की आँसू टपक पड़े।

फिर सरकार जी नारी की निजता पर आए। उन्होंने गर्व से कहा कि उनकी सरकार के पिछले बारह वर्ष में किसी भी मुख्यमंत्री को किसी महिला की जासूसी कराते हुए नहीं पकड़ा गया जैसा कांग्रेस के कार्यकाल में हुआ था। अब नारी की निजता का इतना सम्मान है कि यदि कभी किसी महिला की जासूसी का कोई कार्य आवश्यक हुआ, तो वह भी केंद्रीकृत व्यवस्था के अंतर्गत, पूरी पारदर्शिता के साथ, उनके द्वारा किया जाएगा।

उन्होंने विपक्ष के नेता आचरण पर भी गंभीर प्रश्न उठाया—वे संसद में टी-शर्ट पहनकर क्यों आते हैं, जबकि उनकी कुछ महिला सांसदों को यह पसंद नहीं है। यह केवल ड्रेस कोड का मामला नहीं, यह नारी सम्मान का प्रश्न है। संसद की गरिमा, भारतीय संस्कृति और कपड़े की मोटाई—तीनों दाँव पर लगे हैं।

सरकार जी ने भावुक होकर कहा कि महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएँ उन्हें इतना विचलित कर देती हैं कि वे बोल ही नहीं पाते हैं। उन्नाव पर वे मौन रहे, हाथरस पर मौन रहे, बिलकिस बानो के बलात्कारियों को छोड़े जाने पर भी मौन रहे। उनका मौन ही उनका वक्तव्य था। और यह वक्तव्य इतना लंबा वक्तव्य था कि आज तक जारी है।

सरकार जी ने आगे कहा कि बहनों, मणिपुर की घटना ने तो मुझे भीतर तक झकझोर दिया था। मैंने वह वीडियो बार-बार देखा, मन तो भारी हुआ ही, पैर भी भारी हो गए। और इतने भारी हुए कि मैं देश-विदेश घूम आया, चुनावी रैलियाँ कर आया, पर मणिपुर जाने के लिए भार कुछ कम होने का इंतजार करना पड़ा। यह संवेदनशीलता का ऐसा स्तर है, जिसे सिर्फ मैं, नॉन बायोलॉजिकल ही समझ सकता हूँ।

माताओं और बहनों, अब मैं महिलाओं को संसद में एक-तिहाई आरक्षण देने के लिए अत्यंत उतावला हूँ। इतना उतावला कि सितंबर 2023 में कानून पारित होने के बाद अप्रैल 2026 में उसकी अधिसूचना जारी कर दी है। अब बताइये, लोकतंत्र में इससे तेज़ गति हो सकती है क्या? यदि सब कुछ योजना के अनुसार चला, तो 2029 तक महिलाओं को आरक्षण मिल सकता है। और यदि योजना के अनुसार नहीं चला, तो उसकी जिम्मेदार कांग्रेस है ही।

अब देखिए, यह कांग्रेस कहती है कि वर्तमान 543 सीटों में से ही एक-तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी जाएँ। पर यह कैसे संभव है? इससे पुरुषों का हिस्सा कम हो जाएगा। महिलाओं को अधिकार देने में सरकार को कोई आपत्ति नहीं, बशर्ते किसी पुरुष का अधिकार प्रभावित न हो। इसलिए पहले परिसीमन होगा, फिर सीटें बढ़ेंगी, फिर गणना होगी, फिर विचार होगा, फिर समय आया तो महिलाओं को आरक्षण दे दिया जायेगा। आखिर जल्दबाज़ी किस बात की है? 

अंत में सरकार जी ने स्पष्ट किया कि उनका यह राष्ट्र के नाम संबोधन मुख्यतः कांग्रेस की बुराई के लिए था। उनके स्टाफ ने संकेत दिया कि भाषण में कांग्रेस का नाम अपेक्षित संख्या से कम बार आया है। अतः उन्होंने तुरंत कमी पूरी की—कांग्रेस ऐसी, कांग्रेस वैसी, कांग्रेस ने यह किया, कांग्रेस ने वह किया, नेहरू की कांग्रेस, विपक्षी कांग्रेस, कांग्रेस और उसके सहयोगी, और कुल मिलाकर हर उस समस्या की जड़ कांग्रेस, जिसका समाधान अभी शेष है।

अंत में उन्होंने माताओं, बहनों और बेटियों से कहा—

"आप देश की पचास प्रतिशत आबादी हैं। यदि आप कांग्रेस को वोट नहीं देंगी, तो कांग्रेस कहीं नहीं पहुँच पाएगी। बस एक छोटी-सी विनती है—इस प्रयोग को मेरे ऊपर लागू करने की आवश्यकता नहीं है।"

राष्ट्र ने राहत की साँस ली। साढ़े आठ बजे का संबोधन कोई नौ बजे समाप्त हुआ। और शुक्र है, इस बार जनता पर कोई बिजली नहीं गिरी।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

 

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