कटाक्ष: गोली मार दो, पर गाली मत दो!
जेन ज़ी वालो, अब तो कुछ शर्म करो! मोदी जी ने कितना बड़ा दिल दिखाया है। छाती छप्पन इंच की है, यह तो खैर सब हमेशा से ही जानते थे। जब छाती बड़ी है, तो दिल भी बड़ा होगा ही--सिंपल लॉजिक की बात है। फिर भी, बारह साल जो बड़ा दिल मोदी जी ने खोलकर, किसी को नहीं दिखाया था, जेन ज़ी को दिखाया है। तुम्हारी सरकशी को माफ कर दिया। अपने भौकाल में तुम्हारे कील चुभोने को पी गए। अपने दरबार के एक प्रमुख रतन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के तुम्हारे बाल हठ को भी पूरा कर दिया। और अब, चौथी इंस्टाग्राम रील में तो गालियां देने के बाद भी तुम्हें माफ तक कर दिया।
गालियां भी ऐसी-वैसी नहीं, भद्दी वाली गालियां। और तो और अपनी स्वर्गवासी मां को गाली देने तक को माफ कर दिया! जिस मां को गाली देने को बिहार के चुनाव में भी माफ नहीं किया था और खूब पानी पी-पीकर कोसा था, उसे भी तुम जेन ज़ी वालों लिए मोदी जी ने माफ कर दिया।
छियत्तर साल का बुजुर्ग तुम्हें और कितना बड़ा दिल दिखाए, जो तुम अपना स्टूडेंटपना छोड़ोगे और अंधभक्ति की दीक्षा लोगे!
जेन ज़ी वालों की यही प्राब्लम है। उम्र का लिहाज ही नहीं है। और पुराने संस्कार तो बिल्कुल नहीं हैं। मोदी जी बड़ा दिल दिखाकर माफी दे रहे हैं। माफ कर रहे हैं। माफ करने की कोई वजह नहीं थी, कोई मजबूरी नहीं थी, फिर भी माफ कर रहे हैं। गाजियाबाद की पंद्रह साल की स्कूली बच्ची की तरह, गाली देने वालों के एक-एक साथी की पुख्ता पहचान करने, उन पर मुकद्दमे कराने, उन्हें पुलिस से लेकर गुंडा वाहिनियों तक से डराने-धमकाने, गोदी मीडिया के कैमरों के जरिए उन्हें मुजरिम प्रचारित करने और आखिरकार, कैमरे के सामने गलती मानकर, माफी मांगने के लिए मजबूर करने से, भला उन्हें कौन रोक सकता था? फिर भी मोदी जी माफ कर रहे हैं। और ऐसे-वैसे नहीं, ‘‘अपना’’ कहकर माफ कर रहे हैं। अंधभक्तों से लेकर अपनी पुलिस वगैरह तक से, बच्चा समझकर गले लगाने तक का आह्वान कर रहे हैं।
फिर भी ये जेन ज़ी वाले और उनके हमदर्द क्या कर रहे हैं? न थैंक यू कर रहे हैं, न आभार मानकर दे रहे हैं। मोदी जी की दी माफी भी नहीं ले रहे हैं। उल्टे उन्हीं से माफी देने की जगह, माफी मांगने की मांग कर रहे हैं!
गोदी मीडिया से कुप्रचार कराया--माफी मांगो। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध लाठियां बरसवायीं--माफी मांगो। कील-जड़ी लाठियों से बदन बिंधवाया--माफी मांगो। बिना वर्दीवाले गुंडों से बच्चों को पिटवाया--माफी मांगो। झटका मारने वाले डंडों से पिटवाया--माफी मांगो। भीड़ पर आंसू गैस के गोले दगवाए--माफी मांगो। पैलेट गन से फायरिंग करायी--माफी मांगो। बाकायदा बंदूक से भी गोली चलवायी--माफी मांगो। माफी मांगो--जबकि मोदी जी-शाह जी की पुलिस ने गोली भले चलाई हो, गाली नहीं दी! जेन ज़ी की गालियों से तो उनका गुनाह हल्का ही माना जाएगा! गालियां इक्का-दुक्का सही, चोट गंभीर थी। गुनाह भारी था, फिर भी मोदी जी ने माफ कर दिया और इन्हें मोदी जी की माफी चाहिए, जबकि शाह जी का तो कोई गुनाह सा गुनाह ही नहीं था।
मोदी जी से माफी मंगवाना, हलवा समझ रखा है क्या? जिन मोदी जी ने हजारों मौतों के बावजूद, 2002 के गुजरात तक के लिए माफी नहीं मांगी, 2026 की 20 जुलाई के लिए माफी मांगेंगे, जिसमें घायल भले ही सैकड़ों हुए हों, पर जान एक भी नहीं गयी है! जंतर-मंतर पर दो महीने धूप-बारिश में डटे रह जाएं, तीन हफ्ते से ज्यादा भूखे रह जाएं, जुलूस में लाखों जमा हो जाएं, देश भर में ही नहीं दुनिया भर में लोगों की हमदर्दी पा जाएं, व्यंग्य के तीरों से संघ-भाजपा के आईटी सेल से लेकर, गोदी मीडिया तक मोदी जी के पूरे प्रचारतंत्र को घायल करने में कामयाब हो जाएं, पर रहेंगे ये बच्चे के बच्चे ही। राजनाथ सिंह ने 2015 में जो एलान किया था कि ये एनडीए की सरकार है, यहां इस्तीफे नहीं होते, उसे 11 साल बाद इन जेन ज़ी वालों ने पलटवा क्या दिया और धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा क्या लिखवा लिया, इन्हें क्या लगा--मोदी जी के माफी कभी नहीं के सिद्धांत को भी पलटवा लेंगे? राहुल गांधी भले ही गलती मानने यानी माफी मांगने को स्टूडेंट होने का लक्षण बताते रहें, मोदी जी उनके झांसे में आकर माफी हर्गिज नहीं मांगेंगे। स्टूडेंट बनने/ कहलाने का लालच उन्हें होता होगा जो बायोलॉजीकल हों; भगवान से भी कभी गलती होती है क्या? भगवान भी कभी किसी से माफी मांगता है?
पर भगवान माफी देने में कभी कंजूसी नहीं करता है। उल्टे वह तो माफी देेने में बड़ी उदारता दिखाता है। बस, माफी पाने वाले की भक्ति दिखाई देनी चाहिए।
रही गलती की बात, तो बायोलॉजिकल इंसान तो होता ही गलतियों का पुतला है। और उस पर बच्चे? वो तो गलतियां करते ही करते हैं। और उनकी गलतियां दुरुस्त करने के अवसर भी मिलते हैं। यही तो बचपन है। बच्चों ने जो कुछ किया, उसे बचपन की गलती मानकर मोदी जी ने माफ कर दिया। 2047 में विकसित राष्ट्र बनने के रास्ते पर देश मोदी जी के नेतृत्व में तेजी से दौड़ रहा था। तभी नीट का पेपर लीक होने का शोर मच गया। शोर मचना जरूरी नहीं था, मगर मच गया। नीट का पेपर लीक पहले भी हुआ था। दूसरे भी पेपर लीक होते ही रहते हैं। विश्व गुरु बनने वाले देशों में, पेपर लीक की छोटी-छोटी घटनाएं होती ही रहती हैं। मगर शोर मच गया, और पेपर दोबारा कराया गया, हालांकि दोबारा पेपर कराना जरूरी नहीं था। परीक्षाओं में धांधली का शोर मच गया, हालांकि जरूरी नहीं था। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगा जाने लगा, हालांकि कतई जरूरी नहीं था। फिर भी, बचपना समझकर मोदी जी ने माफ कर दिया।
बस लड़कियां मुंह से गाली निकालें, यह मोदी जी चाहकर भी माफ नहीं कर पा रहे हैं। आखिर, विजातीय प्रभावों से पुरानी संस्कृति की रक्षा करना भी तो जरूरी है। अपने लिए नहीं, अपने भौकाल के लिए भी नहीं, अपनी स्वर्गीया माता जी के लिए भी नहीं, बस प्राचीन संस्कृति की रक्षा के लिए, मोदी जी का तंत्र उनके माफ करने के बाद भी जंतर-मंतर तक पहुंची लड़कियों के पीछे पड़ा रहेगा और उन्हें मनुस्मृति के सबक सिखाता रहेगा। जेन ज़ी हुए तो क्या हुआ भारतीय लड़कियों को मर्यादा में तो रहना ही चाहिए!
पर मोदी जी इधर जेन ज़ी को बिन मांगे माफी दे रहे थे और उधर जेन अल्फा ने नारे लगाना शुरू कर दिया। अब क्या मोदी जी को माफी देने की एक और रील बनानी पड़ेगी।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोक लहर के संपादक हैं।)
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