कटाक्ष: और अब कॉकरोच ‘जिहाद’
लीजिए, अब कॉकरोच जिहाद शुरू हो गया। जहां से देखो, वहां से निकल-निकल कर कॉकरोच आ रहे हैं। मैं भी कॉकरोच, मैं भी कॉकरोच का शोर मचा रहे हैं। और बहाना, न्यायमूर्ति के बोल-बचन से नाराजगी का है, पर असल में एक सौ चालीस करोड़ भारतवासियों के चुने हुए प्रधानमंत्री की हंसी उड़ा रहे हैं।
और हंसी भी उड़ा रहे हैं डिजिटल दुनिया की सुरक्षा के पर्दे के पीछे से, जहां भक्त तो भक्त उनके भगवान भी न पूरी तरह से दबा सकते हैं, न बहुत ज्यादा डरा सकते हैं और न अपने कानफोड़ू शोर से परेशान कर के भगा सकते हैं।
खुद को कॉकरोच बताते-बताते, जेन ज़ी और दूसरी पीढिय़ों के भी युवा, खुद को कॉकरोच साबित करने पर तुल गए हैं--निडर भी और अजर-अमर भी। यूं ही थोड़े ही कहते हैं कि नाभिकीय प्रलय के बाद भी, पृथ्वी पर कॉकरोच बचे रहेंगे।
क्या कहा? इसमें जिहाद कहां से आ गया? इसे सिर्फ युवाओं की नाराजगी की व्यंग्य भरी हंसी समझने की गलती कोई नहीं करे। बेशक, इसमें युवा हैं। सौ दो सौ नहीं, हजार-दस हजार नहीं, लाख-दस लाख भी नहीं, करोड़ों युवा हैं। बेशक, इसमें युवाओं की नाराजगी है, बेशुमार नाराजगी। खराब पढ़ाई पर नाराजगी। पेपर लीक पर नाराजगी। फीस की लूट पर नाराजगी। रोजगार नहीं मिलने पर नाराजगी। हर चीज में लुटने पर नाराजगी। झूठे बहानों से बार-बार ठगे जाने पर नाराजगी। कुछ कहने चलें तो तरह-तरह से मुंह बंद किए जाने पर नाराजगी। और हां हर वक्त, हर जगह, हर तस्वीर में, हरेक स्क्रीन पर, एक ही चेहरा देखने पर नाराजगी भी। और इस नाराजगी का एक व्यंग्य भरी हंसी के रूप में प्रकटीकरण तो हइए। प्रकटीकरण भी विस्फोटक किस्म का। विस्फोट भी इतना तेज कि एक बार को तो भक्तों के भगवान का आसन भी डोल गया। पर यही तो इसके जिहाद होने का सबूत है।
यह जो विपक्ष का नेता बार-बार शोर मचा रहा है कि आर्थिक तूफान आ रहा है, सब कुछ तहस-नहस करने वाली आंधी आने वाली है वगैरह, इसका मतलब समझते हैं? इसे सिर्फ आर्थिक तबाही की चेतावनी समझने की गलती कोई न करे। यह तो नाभिकीय प्रलय का इशारा है। यह कॉकरोचों को इसका चेत दिलाना है कि प्रलय उनके हक में है। प्रलय में वही बचेंगे। जब प्रलय में वही बचेंगे तो प्रलय के बाद उन्हीं का राज होगा। यानी यह मोदी जी का आसन गिराने के लिए प्रलय को न्यौतने का षडयंत्र है। कॉकरोचों को इस मोदी विरोधी षडयंत्र का मोहरा बनाने का षडयंत्र है। कॉकरोचो, क्या तुम्हें विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता के खिलाफ षडयंत्र का हिस्सा बनना मंजूर है!
और हां! मोदी जी के विरोधियों के इसके दावों से कॉकरोच भ्रमित हर्गिज नहीं हों कि वे तो अजर-अमर हैं। भक्त इस वास्तविक दुनिया में, वास्तविक कॉकरोचों को, वास्तव में मार कर, जगह-जगह अपनी मारकता का प्रदर्शन भी कर चुके हैं। भक्त दिखा रहे हैं कि अल्पसंख्यकों, महिलाओं, दलितों और अन्य कमजोरों को ही नहीं, खुद को अजर-अमर मानने वाले कॉकरोचों को मारने में भी, उनके हाथ नहीं कांपेंगे। वर्चुअल दुनिया से उन्हें मिटाने के लिए भक्तों के भगवान की सरकारी एजेंसियां ही काफी हैं– एक-एक एकाउंट बंद करा देंगी। और रीयल दुनिया में, काला हिट समेत तरह-तरह के कीटनाशकों के साथ, भक्तगण पूरी तरह से तैयार हैं। कोई यह नहीं समझे कि मोदी जी की कमांडरी में भक्तगण, चुनाव जीतना ही जानते हैं। भक्त सडक़ों पर युद्ध जीतना और भी जोरदारी से जानते हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी ने पांच दिन में वर्चुअल दुनिया में फोलोअरों की संख्या में, स्वयं भक्तों के भगवान की पार्टी को पीछे छोड़ दिया होगा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कॉकरोच रीयल दुनिया में भक्तों के भगवान पर भारी पड़ जाएंगे।
फिर यह तो इसलिए भी जिहाद का मामला है कि यह षडयंत्र लोकल नहीं है, इंटरनेशनल है। मोदी जी के विरोध के चक्कर में, उनके विरोधी उनके खिलाफ षडयंत्र तक में लोकल के लिए वोकल होने को तैयार नहीं हैं। इन्हें षडयंत्र तक इंटरनेशनल चाहिए। और इंटरनेशनल भी अमरीका-इस्राइल वगैरह वाला नहीं, जेहादी। किरण रिजिजू जी ने फौरन गिनती कर के बता दिया कि कॉकरोच जनता पार्टी ने, पाकिस्तानी फॉलोवरों के बल पर मोदी जी की पार्टी को वर्चुअल दुनिया में फोलोवरों की संख्या में मात दी है। अब मोदी जी की सरकार में रिजिजू बार-बार मंत्री बनाए गए हैं, उनकी बात झूठी तो हो नहीं सकती है। अब कॉकरोच पार्टी वाले कहते रहें कि उनके तो पचानवे फीसद फॉलोवर भारतीय हैं, हम नहीं मानेंगे।
वैसे भी कॉकरोच पार्टी के भारतीय फोलोवर तो तब होंगे, जब भारत में कॉकरोच होंगे। पर भारत में तो कॉकरोच हैं ही नहीं। असल में कॉकरोचों को झूठे ही भारतीय बताया जा रहा है, जो भारत में घुसपैठ कराने के षडयंत्र का हिस्सा हो सकता है।
खैर, यह मोदी जी के स्वच्छता मिशन को बदनाम करने के षडयंत्र का हिस्सा तो है ही। सभी जानते हैं कि कॉकरोच गंदी जगहों में पाए होते हैं। अगर यह सच भी हो कि कॉकरोच गंदगी को साफ करते हैं, जिसका दावा खुद को कॉकरोच बताने वालों ने करना शुरू कर दिया है, तब भी कॉकरोचों के होने के लिए पहले तो गंदगी का होना जरूरी है। भारत में भी कॉकरोच तब हुआ करते थे, जब भारत में गंदगी हुआ करती थी। पर 2014 में भारत को गंदगी की मुक्ति के साथ कॉकरोचों से भी मुक्ति मिल गयी। उसके बाद इक्का-दुक्का कोई भारतीय कॉकरोच अभिजीत दिपके की तरह उड़कर कहीं इधर-उधर चला गया हो और बच गया हो तो बात दूसरी है, पर भारत में अब कोई भारतीय कॉकरोच नहीं हैं। और जब कोई भारतीय कॉकरोच हैं ही नहीं, तो कॉकरोच वोटर कहां से होंगे? तब मोदी जी किसी कॉकरोच जनता पार्टी की परवाह क्यों करें!
वैसे भी मोदी जी कॉकरोचों से डरने वालों में थोड़े ही हैं। छप्पन इंच की छाती सिर्फ दिखाने को ही थोड़े ही ढो रहे हैं। भक्तों और भगवान ने मिलकर, बारह साल में बहुत से जिहाद नाकाम किए हैं, एक जिहाद और सही! कॉकरोचो तुम अंधेरे कोनों में भागकर छुप जाओ। वर्ना तुम्हारी खैर नहीं। तुमने ट्रंप-नेतन्याहू के फ्रेंड को छेड़ दिया है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोक लहर के संपादक हैं।)
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