सीवर में मौत राष्ट्रीय शर्म का विषय, प्रधानमंत्री से माफ़ी की मांग
“Stop Killing Us— हमें मारना बंद करो” के बैनर तले दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटे सफाई कर्मचारियों ने सरकार को चेताया कि उन्हे सीवर सेप्टिक टैंक में मारना बंद करो।
25 मार्च 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 राज्यों से आए सफाई कर्मचारियों ने यह आवाज उठाई। इस धरना प्रदर्शन का आयोजन सफाई कर्मचारी आंदोलन (SKA) द्वारा किया गया था।
धरना प्रदर्शन में करीब 150-200 लोग शामिल हुए। इनमें उन परिवारों ने भी हिस्सा लिया जिनके परिजन सीवर सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान मारे गए थे।

देश की संसद से बस कुछ ही दूरी पर सफाई कर्मचारी एक बार फिर जंतर मंतर पर जमा हुए, अपने दुख-गुस्से का सामने रखने और न्याय मांगने के लिए। सभी ने एक स्वर में नारे लगाए, ‘हमें मारना बंद करो’, ‘सीवर-सेप्टिक टैंक में मौतें बंद करो’, ‘प्रधानमंत्री देश से माफी मांगो’।
National Shame– यह हमारे देश के लिए शर्म की बात है कि A.I. और आधुनिक तकनीक के जमाने में हम अपनी तकनीक से चांद पर चंद्रयान तो भेज सकते हैं लेकिन सीवर-सेप्टिक की सफाई के लिए मशीने नहीं बना सकते। मौत के इन सीवरों में हम अपने जैसे ही नागरिकों को मरने के लिए उतार देते हैं। जबकि हमारा संविधान हर नागरिक को गरिमा के साथ जीने का अधिकार Right to live with Dignity RL-21 देता है।
वक्ताओं ने कहाकि सरकार की बेशर्मी का आलम यह है कि सरकार सीवर में होने वाली मौतों को रोकने की बजाय आंकड़ों की बाजीगरी कर उन्हें छुपाती है। 2026 के तीन महीने भी नहीं बीतें है और अभी तक 41 सफाई कर्मचारियों की मौत गटर में हो चुकी है (80 दिन में 41 मौतें)। सफाई कर्मचारी आंदोलन (SKA) के अनुसार वर्ष 2025 में देश में 121 लोग गटर में मारे गये, जबकि भारत सरकार कहती है कि बस 46 लोग मारे गये।

गैर कानूनी होने के बावजूद मैनुअल स्कैवेंजिंग (हाथ से मैला ढोना) की प्रथा अभी भी चल रही है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और जम्मू-कश्मीर में मैला प्रथा चालू है। संसद में मंत्री कहते हैं कि मैला प्रथा खत्म हो गई है, जो सरासर झूठ है। इन सवालों पर, इस अत्याचार के खिलाफ SKA पिछले 40 सालों से लड़ रहा है।
सफाई कर्मचारी आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक और रमन मैगसेसे पुरस्कार विजेता बेजवाडा विल्सन ने कहा कि इस साल अभी तक 41 लोग गटर में मारे जा चुके हैं लेकिन सरकार चुप है, मानो हमारी जिंदगी व मौत उसके लिए कोई मायने नहीं रखती। सरकार की जातिवादी सोच की वजह से सीवर-सेप्टिक टैंक में सफाई करते हुए हमारे लोग मौत के गटर में ढकेले जा रहे हैं और इन हत्याओं के लिए किसी को भी आज तक सजा नहीं हुई, जबकि कानून गटर में किसी भी इनसान को उतारना अपराध बताता है। फिर भी रोज लोगों को देश भर में मौत के गटर में रोज ढकेला जाता है।
SKA की नेता दीप्ति सुकुमार ने सवाल उठाया कि सरकार सीवर में हो रही मौतों की संख्या क्यों छिपा रही है, कम संख्या क्यों बता रही है। 2025 में SKA के आंकड़ों के अनुसार 121 मौतें हुई हैं लेकिन सरकार ने बस 46 मौतों को दर्ज किया। इसी तरह 2024 में SKA का आंकड़ा 116 मौतों का है, जबकि सरकार 55 मौतें कहती हैं। ये मौतें जो गायब हैं, वे लोग कहां है। संसद में सरकार को सही नंबर पेश करना चाहिए।
धरने में सीवर-सेप्टिक टैंक में अपने परिजनों को खोने वालों ने भी अपने दुख और संघर्ष के बारे में रखा और सरकार से तुरंत इन मौतों पर रोक लगाने के लिए युद्ध स्तर पर काम करने की मांग की। SKA के विभिन्न राज्यों से आए नेताओं लवजिंदर कौर, सीमा खैरवाल, नीलम, पूनम, आंचल, पूजा, उषा सागर, राजकुमार, सुभाष, अमर सिंह, प्रकाश, मयंक आदि ने भी बताया कि कैसे सरकार और स्थानीय प्रशासन जातिवादी सोच रखते हैं।
SKA ने प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा जिसमें उनसे सीवर में हो रही मौतों और सदियों पुराने इस जातिवादी उत्पीड़न के कायम रहने के लिए राष्ट्र से माफी मांगने को कहा है। सीवर-सेप्टिक टैंक में मौतों को रोकने के लिए समयबद्ध एक्शन प्लान घोषित करने की मांग के साथ मैला प्रथा में लगे लोगों की मुक्ति और संपूर्ण पुनर्वास के लिए समयबद्ध कार्ययोजना की मांग भी की गई।
सफाई कर्मचारियों की प्रमुख मांगे इस प्रकार हैं :
* सीवर-सेप्टिक टैंक में मौतों के लिए प्रधानमंत्री देश से माफी मांगें।
* सीवर-सेप्टिक टैंक में मरने वालों का सही आंकड़ा देश के सामने रखें।
* गटर में मौतों को तुरंत रोकने समयबद्ध एक राष्ट्रीय एक्शन प्लान की घोषणा करें।
* सफाई कर्मचारियों के लिए RL-21 यानी सम्मान से जीने की गारंटी करें।
* गटर में मौत के लिए वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो।
(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार और सफाई कर्मचारी आंदोलन से जुड़े हैं।)
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