न्यूज़क्लिक पर ग़लत मुक़दमा करने वालों पर हो कार्रवाई, पत्रकारों को दिया जाए मुआवज़ा: प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया
प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश का स्वागत किया है, जिसमें समाचार पोर्टल न्यूज़क्लिक और उसके संस्थापक संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के ख़िलाफ़ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर और उसके बाद दर्ज की गई प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) को रद्द कर दिया गया है। इन मामलों में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के प्रावधानों का उल्लंघन किया, जिसके आधार पर उनके ख़िलाफ़ कठोर धन शोधन (Money Laundering) निवारण अधिनियम, 2002 के तहत अभियोजन चलाया गया।
एफ़आईआर और ईसीआईआर को खारिज करते हुए, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि न्यूज़क्लिक और श्री पुरकायस्थ के खिलाफ दर्ज किए गए मामले “कानूनी प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग हैं और इसलिए इन्हें रद्द किया जाता है” (“a gross abuse of the process of law and is hereby, quashed”). अदालत ने आगे कहा: “वर्तमान कार्यवाही न केवल दुर्भावनापूर्ण है, बल्कि याचिकाकर्ताओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता पर एक मनमाना हमला और शक्तियों का दुरुपयोग भी है।”
दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया की अध्यक्ष संगीता बरूआ पिशारोटी और महासचिव अफ़ज़ल इमाम की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में की गई टिप्पणियां उस बात की पुष्टि करती हैं, जिस पर मीडिया जगत का एक बड़ा वर्ग अक्टूबर 2023 में कई स्थानों पर ईडी की छापेमारी के समय से ही विश्वास करता रहा है कि सरकार के लिए असुविधाजनक (inconvenient) पत्रकारिता करने के कारण न्यूज़क्लिक और श्री पुरकायस्थ के ख़िलाफ़ एक सुनियोजित उत्पीड़न अभियान चलाया गया था। इस प्रवर्तन कार्रवाई का एकमात्र उद्देश्य स्वतंत्र प्रेस के कामकाज पर भय का प्रभाव डालना और इसे उन लोगों के लिए चेतावनी के रूप में प्रस्तुत करना था, जो कार्यपालिका या सरकार से सवाल पूछने का साहस करते हैं।
अदालत के आदेश ने प्रेस की स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ प्रतिशोध के सबसे विकृत उदाहरणों में से एक का उचित रूप से अंत कर दिया है, लेकिन हमें इस तथ्य को नहीं भूलना चाहिए कि दिल्ली पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाइयों के कारण न्यूज़क्लिक में काम करने वाले पत्रकारों को अपनी नौकरियां और मूल्यवान उपकरण गंवाने पड़े, जिससे उन्हें गंभीर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा। आज, यह सम्मानित समाचार पोर्टल अपने पूर्व स्वरूप की एक खोखली परछाई बनकर रह गया है और इसकी वित्तीय स्थिति अस्त-व्यस्त हो चुकी है।
इसलिए, हम सरकार से आग्रह करते हैं कि भविष्य में पत्रकारों और स्वतंत्र प्रेस के खिलाफ इस प्रकार के लक्षित उत्पीड़न से परहेज करे। हालांकि मानवीय गरिमा और प्रतिष्ठा की क्षति को न तो मापा जा सकता है और न ही आर्थिक रूप से उसकी भरपाई की जा सकती है, फिर भी मीडिया जगत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया से आग्रह करे कि वह उन लोगों के ख़िलाफ़ कार्यवाही शुरू करे, जिनके इशारे पर न्यूज़क्लिक, श्री पुरकायस्थ और पोर्टल में काम करने वाले पत्रकारों के ख़िलाफ़ मुकदमा चलाया गया था, तथा जिन लोगों को आजीविका से वंचित किए जाने और उपकरणों की जब्ती के कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, उन्हें उचित मुआवज़ा दिया जाए।
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया का दायित्व प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करना और पत्रकारों का संरक्षण करना है। स्वतंत्र प्रेस पर इस खुले हमले के लिए ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने में उसकी विफलता उसके अस्तित्व के उद्देश्य को ही विफल कर देगी।

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