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लॉन्ग मार्च पर लाठीचार्ज से तिहाड़ तक: JNU-14 का पूरा मामला क्या है?

जेएनयू के 14 छात्रों को “लॉन्ग मार्च” के दौरान गिरफ्तार किया गया। अदालत से जमानत मिलने के बावजूद, स्थायी पते के सत्यापन की प्रक्रिया के कारण उनकी रिहाई टाल दी गई है। आरोप है कि पुलिस कार्रवाई में कई छात्र घायल हुए, और जेल में भी उन्हें आवश्यक इलाज तथा दवाइयाँ उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
क्या यह कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है? क्या लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की कोशिश की जा रही है? देखिए Newsclick की ग्राउंड रिपोर्ट।
जेएनयू के 14 छात्रों को “लॉन्ग मार्च” के दौरान गिरफ्तार किया गया। अदालत से जमानत मिलने के बावजूद, स्थायी पते के सत्यापन की प्रक्रिया के कारण उनकी रिहाई टाल दी गई है। आरोप है कि पुलिस कार्रवाई में कई छात्र घायल हुए, और जेल में भी उन्हें आवश्यक इलाज तथा दवाइयाँ उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
क्या यह कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है? क्या लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की कोशिश की जा रही है? देखिए Newsclick की ग्राउंड रिपोर्ट।

 

जेएनयू के 14 छात्रों को “लॉन्ग मार्च” के दौरान गिरफ्तार किया गया। अदालत से जमानत मिलने के बावजूद, स्थायी पते के सत्यापन की प्रक्रिया के कारण उनकी रिहाई टाल दी गई है। आरोप है कि पुलिस कार्रवाई में कई छात्र घायल हुए, और जेल में भी उन्हें आवश्यक इलाज तथा दवाइयाँ उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। क्या यह कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है? क्या लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की कोशिश की जा रही है? देखिए Newsclick की ग्राउंड रिपोर्ट।

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