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ख़बरों के आगे-पीछे: जस्टिस भुइयां ने परदा हटाया, चेतावनी दी

अपने साप्ताहिक कॉलम में वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन न्यायपालिका में सरकार की दख़ल, बंगाल की राजनीति समेत कई मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।
justice ujjal bhuyan

संभल (उत्तर प्रदेश) के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर के विवादित तबादले की चर्चा के बीच सुप्रीम कोर्ट के जज उज्जवल भुइंया ने उच्चतर न्यायपालिका के जजों के तबादले के पीछे की राजनीतिक कहानी पर से परदा हटा कर काफी कुछ उजाले में ला दिया है। जस्टिस भुइंया ने पूछा कि किसी जज का एक से दूसरे हाई कोर्ट में सिर्फ इसलिए क्यों तबादला होना चाहिए कि उसने सरकार के लिए कोई 'असुविधाजनक निर्णय’ दिया हो? हालांकि जस्टिस भुइंया ने कोई नाम नहीं लिया, लेकिन अनुमान लगाया गया है कि उनका इशारा बीते अक्टूबर में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जज अतुल श्रीधरन के तबादले की ओर था। जस्टिस श्रीधरन ने कर्नल सोफिया कुरैशी मामले में मध्य प्रदेश के एक मंत्री के आपत्तिजनक बयान का संज्ञान लिया था। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने पहले उनका तबादला छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट किया और फिर उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दिया। अब साफ है कि ऐसा केंद्र सरकार के अनुरोध पर किया गया।

आम चर्चा है कि इस रूप में सरकार कॉलेजियम के तबादला संबंधी कई फैसलों को प्रभावित कर चुकी है। जब उच्चतर न्यायपालिका में यह हाल हो, तो निचली अदालतों के बारे में सहज अनुमान लगाया जा सकता है। 

सीजेएम सुधीर ने संभल की हिंसा के मामले मे पुलिस अधिकारी पर मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। उसके बाद उनका तबादला हो गया। जस्टिस भुइयां ने उचित चेतावनी दी है कि ऐसी घटनाएं भारतीय न्यायपालिका की साख पर बट्टा लगा रही हैं। उन्होंने कहा- ''अगर हमने अपनी साख खो दी, तो न्यायपालिका में कुछ नहीं बचेगा। अदालतें रहेंगी, मुकदमों के फैसले भी होंगे, लेकिन आत्मा का लोप हो जाएगा।’’ 

गैर हिंदुओं पर पाबंदी कैसे लागू होगी?

हिंदू तीर्थस्थलों पर गैर हिंदुओं को आने से रोकने की चर्चा अब मुख्यधारा में आ गई है। कुछ समय पहले तक फ्रिंज एलीमेंट यानी हाशिए पर पड़े कुछ नेता इसकी चर्चा करते थे और इस पर ध्यान नहीं दिया जाता था। वैसे कई हिंदू तीर्थों में पहले से ही गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है, लेकिन जहां बहुत भीड़ जुटती है और जिनको तीर्थस्थल के साथ-साथ पर्यटन स्थल के तौर पर भी विकसित किया गया है वहां इस तरह की बात नहीं है। लेकिन पिछले दिनों कहा गया कि हरिद्वार के कुंभ में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित किया जाएगा। खबर है कि बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में भी गैर हिंदुओं को आने से रोकने की व्यवस्था की जाएगी। सवाल है कि यह व्यवस्था कैसे लागू होगी? जहां आने वाले यात्रियों का रजिस्ट्रेशन होता है वहां तो नाम देख कर रोक दिया जाएगा लेकिन जहां जाने के लिए रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता नहीं है वहां क्या होगा? 

गंगा के किनारे लगने वाले कुंभ में कैसे पहचान होगी कि कौन हिंदू है और कौन नहीं? साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि गैर हिंदू में सिर्फ मुस्लिम हैं या सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध आदि भी हैं। सोचने वाली बात है कि हिंदू धर्म के लोग एक तरफ तो गर्व से बताते हैं कि एपल कंपनी के संस्थापक स्टीव जॉब्स और अमेजन के संस्थापक जेफ बेजॉस को कैसे किसी हिंदू संत ने आशीर्वाद दिया तो वे इतने बड़े आदमी बने और दूसरी ओर गैर हिंदुओं को रोकने का अभियान शुरू हो रहा है। 

ज़ोर ज़बरदस्ती शाकाहार का प्रचार-प्रसार

यह कमाल की खबर है कि पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई है उसमें यात्रियों को मांसाहारी भोजन नहीं मिलेगा। यह ट्रेन पश्चिम बंगाल से असम के बीच चलने वाली है। इन दोनों ही राज्यों में मांसाहार का चलन है और खासकर पश्चिम बंगाल में तो मांस और मछली दैनिक भोजन का हिस्सा है। पूजा के समय भी मांसाहार वहां वर्जित नहीं है। इस मुद्दे पर जब विवाद हुआ तो भाजपा नेताओं ने अजीब दलील दी कि ममता बनर्जी की सरकार ने भी मिड डे मील में से मांसाहार हटा दिया है। 

भाजपा के इन नेताओं को इतना भी नहीं मालूम कि स्कूल में आमतौर पर भोजन ऐसा दिया जाता है, जो बनाने में आसान हो। बहरहाल, यह सिर्फ वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का मामला नहीं है, बल्कि ओडिशा में कोरापुट जिले के कलेक्टर ने तो उससे भी आगे बढ़ कर एक आदेश जारी किया कि गणतंत्र दिवस के दिन जिले के किसी भी हिस्से में मांस, मछली, अंडा आदि की बिक्री नहीं होनी चाहिए। इससे पहले इस तरह की बंदी की अपील नवरात्र में या कांवड़ यात्रा के दौरान या जैन धर्म के पर्यूषण पर्व के समय देखने, सुनने को मिलती थी। अब गणतंत्र दिवस पर भी आदेश जारी हो रहा है। हालांकि यह साफ नहीं है कि भाजपा सरकार की ओर से प्रयोग के तौर पर एक जिले में ऐसा कराया गया है या अति भक्ति में एक कलेक्टर ने खुद ही आगे बढ़ कर ऐसा आदेश दिया है।

वीबी ग्राम जी बनाम इंडिया गठबंधन

कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा की जगह लाए जा रहे रोजगार कानून के नाम का मसला सुलझा लिया है। कांग्रेस के नेता इसे 'जी राम जी’ कानून नहीं कह रहे हैं। राहुल गांधी सहित कांग्रेस के सारे नेता इसे 'वीबी ग्रामजी’ कानून कह रहे हैं। तकनीकी रूप से यह बिल्कुल सही है। कानून का नाम विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण है। इसे संक्षिप्त रूप में 'वीबी जी राम जी’ भी बोल सकते हैं और 'वीबी ग्रामजी’ भी बोल सकते हैं। कांग्रेस ने इसे 'वीबी ग्रामजी’ कहना शुरू किया है। इस बारे में कांग्रेस नेताओं के अपने तर्क हैं। उनका कहना है कि जब कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों ने मिल कर एक गठबंधन बनाया, जिसका नाम इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इन्क्लूसिव अलायंस यानी 'इंडिया’ रखा तो भाजपा नेताओं ने इसका मजाक उड़ाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित तमाम भाजपा नेताओं ने इसे इंडी गठबंधन कहना शुरू किया। सो, जिस तरह से भाजपा ने इंडिया को इंडी गठबंधन बनाया वैसे ही कांग्रेस ने 'जी राम जी’ को 'वीबी ग्रामजी’ बना दिया है। दोनों में तकनीकी रूप से कोई गलती नहीं है। अब सवाल है कि क्या भाजपा को इंडिया बोलने में समस्या थी या कांग्रेस को 'जी राम जी’ कहने में समस्या है? कांग्रेस के नेता यही सवाल उठा रहे हैं। उनसे जब पूछा जा रहा है कि आखिर कांग्रेस के नेता 'जी राम जी’ की जगह 'वीबी ग्रामजी’ क्यों कह रहे है तो उनका यही सवाल है कि भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों के नेता इंडिया की जगह इंडी गठबंधन क्यों कहते हैं? सवाल जायज और तर्कसंगत है।

बंगाल के लिए बदल रहे हैं मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के लिए अपने को बदल रहे हैं! यह दावा ममता बनर्जी के भतीजे और डायमंड हार्बर सीट के सांसद अभिषेक बनर्जी ने किया है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी पहले बंगाल आते थे तो 'जय श्रीराम’ का नारा लगाते थे लेकिन अब 'जय मां काली’ बोलते हैं। असल में प्रधानमंत्री मोदी दो दिन के पश्चिम बंगाल दौरे पर गए थे। इस दौरान उन्होंने ममता बनर्जी की सरकार पर जम कर हमला बोला और 'पोरिबर्तन दोरकार' यानी परिवर्तन की दरकार है का नारा दिया। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि बंगाल को लेकर जितना प्रेम उनके मन में है उतना किसी के मन में नहीं। उन्होंने इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति लगाने से लेकर बांग्ला को क्लासिकल भाषा का दर्जा मिलने तक के कई उदाहरण दिए। 

इसके बाद ही अभिषेक बनर्जी हमलावर हुए और उन्होंने कहा कि इतने बरसों से नरेंद्र मोदी प्रयास कर रहे है लेकिन वे बंगाल के लोगों को नहीं बदल पाए हैं, बल्कि खुद मोदी बदल गए हैं। अब वे जय मां काली का नारा लगा रहे हैं और जल्दी ही 'जय बांग्ला' का नारा लगाएंगे। इसके बावजूद भाजपा इस बार 50 सीटों पर सिमटने वाली है। असल में ममता बनर्जी ने बांग्ला भाषा की अस्मिता और संस्कृति के साथ-साथ इस बार धर्म का मामला भी आगे बढ़ाया है। जगन्नाथ धाम मंदिर बनवाने के बाद अब वे दुर्गा मंदिर और महाकाल मंदिर भी बनवा रही हैं । इसलिए भाजपा परेशान हो रही है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

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