तिरछी नज़र : सावधान! आजकल बड़ी तेज़ी से ग़ायब हो रही है रीढ़ की हड्डी
इन्हीं दिनों मेरे पास एक मरीज आया। सिर्फ एक मरीज नहीं आया, ऐसे मरीज आते ही रहते हैं। पर मैं उस एक खास मरीज की बात ही कर रहा हूँ। उसकी कमर में दर्द था। आते ही बोला, डॉक्टर साब, जरा देखिए। मेरी रीढ़ की हड्डी में दर्द हो रहा है। खड़ा नहीं हुआ जा रहा। बस लेटे रहने, रेंगते रहने या झुके रहने का मन करता है।
रीढ़ की हड्डी। मैं जरा चौंका, रीढ़ की हड्डी में दर्द। मैंने कहा "बरखुरदार, शुक्र मनाओ, आपकी रीढ़ की हड्डी अभी तक बची है कि उसमें दर्द हो रहा है। वैसे जरा जाँच करने दो आपकी रीढ़ की हड्डी है भी या नहीं। अधिकतर लोगों की तो रीढ़ की हड्डी अब बची ही नहीं है। तुम्हारी बची हो तो अच्छी बात है"। मैंने उसे लेटने का इशारा किया। चेक किया और कहा, "रीढ़ की हड्डी तो है ही नहीं। तुम्हारा यह दर्द कमर की मांस पेशियों का दर्द है। हद से ज्यादा और ज्यादा देर तक झुके रहने से हो गया है"।
"डॉक्, जरा ध्यान से चेक कीजिये। बायोलॉजी मैंने भी पढ़ी है। वर्गीकरण मुझे अभी तक याद है। नॉन वर्टीब्रेट और वर्टीब्रेट। मैं वर्टीब्रेट हूँ। मेरे में रीढ़ की हड्डी है"।
"नहीं है। मैंने चेक किया है, इस समय तो नहीं है। वर्टीब्रेट से नॉन वर्टीब्रेट बन गए हो तुम। आदमी से केंचुआ बन गए हो। यकीन ना हो तो एक्स रे करवा कर देख लो, सीटी स्कैन, एमआरआई करवा लो। यह बायोलॉजी की बात नहीं है। वैसे भी इस समय नॉन बायोलॉजिकल भी होने लगे हैं। जरूर तुम भी बायोलॉजिकल से नॉन बायोलॉजिकल बन गए होगे। रही होगी तो पहले रही होगी रीढ़ की हड्डी। पर अब नहीं है। तुम अब बिना रीढ़ की हड्डी के मनुष्य हो"।
"तो डॉक्टर, आप ही कोई दवा लिख दो ना। मेरी रीढ़ की हड्डी फिर से बन जाये। कोई नुस्खा मेरे जैसों के लिए लिख दो", उस मरीज ने विनती की।
"हाँ, हाँ क्यों नहीं। पहले रीढ़ की हड्डी रही है, तुम्हारी ही नहीं, सबकी रही है। जरा सी मेहनत करोगे तो फिर बन जाएगी। पहली बात तो सरकार जी से सवाल पूछना शुरू करो। गरीबी पर सवाल करो, बेरोजगारी पर सवाल करो, पेपर लीक पर सवाल करो। चंदा चोरी पर सवाल करो, सड़कों के बनते ही बिगड़ जाने पर सवाल करो।
ठीक है, वे जवाब नहीं देंगे। उन्हें जवाब देने की आदत नहीं है पर तुम तो अपनी सवाल करने की आदत बरकरार रखो। तुम सरकार जी की नाकामियों पर सवाल करोगे तो देखना, तुम्हारी रीढ़ की हड्डी बनने लगेगी।
समझो, इस समय की नाकामियों पर सवाल आज के सरकार जी से होगा। नेहरू या पिछली सरकारों से नहीं। जो पेपर 2026 में लीक हुआ है उसके लिए 1956 की सरकार से तो सवाल नहीं होगा। जो सड़क आज बनी और कल टूट जाती है, उसके लिए आज की सरकार ही तो जिम्मेदार होगी ना"।
"टीवी देखते हो, देखते ही होगे। आजकल सभी देखते हैं। टीवी में नहीं तो मोबाइल पर, लैपटॉप पर, कहीं ना कहीं तो खबरिया चैनल देखते ही होगे। वे चैनल, जिन्हें गोदी मीडिया कहते हैं, देखना बंद करो। जिन चैनलों के सम्पादकों की रीढ़ की हड्डी नहीं है वे अपने दर्शकों की रीढ़ की हड्डी बनी रहने देंगे भला। अगर अपनी न्यूज़ और व्यूज का सोर्स इन्हें बनाओगे तो रीढ़ की हड्डी बनने से रही"।
"आंदोलनों में भाग लेते हो? क्या कहा, नहीं लेते। पहले लेते थे। निर्भया में लिया था, अन्ना में लिया था पर अब लेना बंद कर दिया है। क्यों भई, क्यों बंद कर दिया। आंदोलन तो एक्सरसाइज है, व्यायाम है अपनी, अपने देश की, लोकतंत्र की रीढ़ की हड्डी बचाये रखने का। अगर आंदोलन में भाग नहीं लेते हो तो भी आंदोलनकारियों को गद्दार, पाकिस्तानी, खालिस्तानी आदि कहना बंद करो। शायद रीढ़ की हड्डी इतना करने से ही बनने लगे"।
"हिन्दू मुस्लिम करते हो? जरूर करते होगे। अगर नहीं करते होते तो रीढ़ की हड्डी ऐसे गायब थोड़ी ना हो जाती। दूसरों की इज्जत करो। उनकी जाति की इज्जत करो, उनके धर्म को सम्मान दो। ना तुम हिन्दू मुस्लिम करें, ना वे मुस्लिम हिन्दू करें। कोई भी अपने धर्म के कठमुल्लों के चक्कर में न फंसे। फिर देखना, तुम्हारी भी और उनकी भी रीढ़ की हड्डी कैसे वापस उगती है"।
"और एक बात और, ये जो देशभक्ति का सर्टिफिकेट तुम सरकार जी से लिये फिरते हो, कि किसी के जय श्रीराम न बोलने पर चाकू से गोद दिया, किसी को इस लिए लाठियों से इसलिए कूट दिया कि उसने जन गण मन... नहीं सुनाया। अब यह तुम वन्देमातरम... को लेकर करने लगोगे। स्वतंत्रता दिवस पर पीएमओ की साइट पर तिरंगे साथ सेल्फी अपलोड करना और बदले में देशभक्ति का सर्टिफिकेट पाना देशभक्ति नहीं है। देशभक्ति के लिए सरकार जी की ओर मत देखो, भारत माता की ओर देखो। फिर देखना, रीढ़ की हड्डी कितनी जल्दी बनती है"।
मुझसे सलाह ले कर वह मरीज चला गया। पता नहीं वह मेरी कितनी सलाह मानेगा। पर अगर उसने सलाह मानी, तो मैं गारंटी देता हूँ कि उसकी रीढ़ की हड्डी उसे जल्दी ही वापस मिल जाएगी। और यह मेरी गारंटी है, सरकार जी की नहीं।
(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)
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