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नागरिक मार्च: भारत की जनता ईरान के साथ है!

बिहार की राजधानी पटना में ‘नागरिक मार्च’ निकालकर “साम्राज्यवादी अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले” का पुरज़ोर विरोध किया गया।
PATNA NAGRIK MARCH
पटना में नागरिक मार्च

दुनिया से लेकर देश तक की सत्ता-सरकारों की चाकर बनी अधिकांश और तथाकथित स्थापित मीडिया दुनिया में जारी विध्वंसक युद्ध से हो रही जानो-माल की तबाही के असली सच को छुपा रही है। अपने आका-सरकारों के कहे झूठ को ही लगातार परोस रही है।

लेकिन तब भी कहीं न कहीं से ‘सही खबर’ वायरल हो ही जा रही है और असली सच सामने आ ही जा रहा है। जिससे खुलकर ये स्पष्ट हो रहा है कि कौन मदांध युद्धोन्माद से मासूम बच्चियों तक के स्कूल पर बमबारी कर क़त्लो-गारद मचा रहा है।

दुखदायी विडंबना है कि ईरान पर अमेरिका-इज़रायल ने मिलकर भयावह हमलों की बौछार कर दी, उस ईरान को फक़त मुस्लिम/इस्लामिक राष्ट्र होने के भारत जैसे देशों में गोदी मीडिया द्वारा विलेन बताकर फर्जी तथ्यों से ख़बरों की टीआरपी बढ़ाई जा रही है। 

लेकिन इन सबों से परे ईरान अपने अस्तित्व और अपने लोगों की आज़ादी-संप्रभुता की हिफाज़त के लिए जान की बाज़ी लगाकर तानाशाह और उसके चेलों का ‘मुहतोड़ जवाब’ दे रहा है। स्वयंभू विश्व आका-परस्त अमेरिकी और इज़राइली मीडिया के सुर में और भी अधिक सुर मिलाते हुए गोदी-मीडिया पूरी भक्ति से देश राजा और उनके मंत्री-आमलों के हर झूठ को प्रमाणित-प्रसारित करने में जी-जान लगा रखी है। उनके कहे अनुसार लोगों को ही कोसा जा रहा है की वे पैनिक हो रहें हैं।  

दूसरी ओर, वास्तविक खबर यह भी वायरल हो रही है जिसमें बताया-दिखाया जा रहा है कि कैसे दुनिया भर में लोग सड़कों पर उतरकर अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर किये जा रहे हमलों का ज़ोरदार विरोध कर रहें हैं। साथ ही अपने-अपने देश की सरकारों-सत्ताधीशों पर ट्रंप-नेतन्याहू द्वारा दुनिया को आसन्न विश्व-युद्ध की विभीषिका में झोंकने के पागलपन पर रोक लगाने का दबाव बना रहें हैं।

इसी क्रम में भक्त जमात छोड़कर, भारत में भी अमनपसंद लोकतान्त्रिक-वामपंथी ताक़तें और युद्ध-विरोधी नागरिक-समाज मुखर होकर सड़कों पर अपन विरोध प्रदर्शित कर रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में ‘युद्ध विरोधी अभियान’ संगठित कर भारत की सरकार व उसके आला नेताओं से मांग की जा रही है कि वे युद्धोन्माद फैला रहे अमेरिका-इजराइल पर हमले रोकने के लिए दबाव डालें। (जो कि अभी तक ज़रा भी नहीं सुना जा रहा है।) साथ ही मौजूदा केंद्र की सरकार द्वारा लगातार झूठ बोलकर गैस-पेट्रोल के संकटों से बदहवास जनता को एक बार फिर लम्बी लम्बी लाईन लगाने को  मज़बूर किये जाने का ज़ोरदार विरोध किया जा रहा है। 

24 मार्च को बिहार की राजधानी पटना में ‘नागरिक मार्च’ निकालकर साम्राज्यवादी अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले का पुरज़ोर विरोध किया गया। पीयूसीएल, बिहार के आह्वान पर संगठित किये गए इस नागरिक-अभियान में कई सामाजिक व छात्र-युवा-किसान संगठनों तथा ट्रेडयूनियन एक्टिविस्ट समेत प्रबुद्ध नागरिकों और वामदलों ने सक्रिय भागीदारी निभायी। 

ईरान पर लादे गए अन्यायपूर्ण युद्ध के ख़िलाफ़ विश्व जनता का प्रतिरोध ज़िंदाबाद, हम ईरान के साथ हैं, ट्रंप-नेतेंयाहू से यारी-ईरान से गद्दारी नहीं चलेगी और भारत की जनता ईरान के साथ है! जैसे नारे लिखे पोस्टरों के साथ यह नागरिक-मार्च निकाला गया। जो बुद्धा स्मृति पार्क परिसर के पास जाकर एक ‘विरोध-सभा’ में बदल गया। 

विरोध सभा को कई वरिष्ठ नागरिक अधिकार एक्टिविस्ट, वामदलों के नेताओं सहित कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया। 

सभी वक्ताओं ने एक स्वर से ईरान पर किये जा रहे हमलों के साथ साथ खाड़ी क्षेत्र में युद्धोन्माद का तनाव पैदा किये जाने के लिए अमेरिका-इज़रायल का तीखा विरोध किया। साथ ही अपने देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए संघर्षरत ईरानी जनता द्वारा अपने बचाव के लिए किये जा रहे युद्ध को न्यायपूर्ण बाताते हुए कहा कि- हम ईरान के साथ हैं! इस पूरे मामले में भारत सरकार की निरंतर चुप्पी तथा प्रकारांतर से ईरान पर लगातार हमला कर रहे आक्रमणकारियों के पक्ष में ही खड़ा होने की दुर्भाग्यपूर्ण कारवाई है। जो की लम्बे समय से चली आ रही भारत की विदेश नीति के सर्वथा विपरीत और गलत है। सिर्फ इतना ही  नहीं, ईरान पर हमले के दो दिन पूर्व ही इस देश के प्रधानमंत्री का इज़राईल जाकर उसे फादरलैंड घोषित कर आना, दुनिया भर में भारत की खिल्ली उड़ा दिया।

वक्ताओं ने पूरी दुनिया में अमेरिकी साम्राज्यवाद की दादागिरी और जबरन हस्तक्षेप करने की तीखी निंदा करते हुए वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को अनैतिक ढंग से गिरफ्तार किये जाने  को ट्रंप ने नेतृत्व में अमेरिकी शासक वर्गों का वहशियाना कृत्य कहा। अमेरिका द्वारा क्यूबा की आर्थिक नाकेबंदी का भी कड़ा विरोध किया गया। कार्यक्रम से सर्वसम्मत स्वर में मांग की गयी कि- ईरान पर हमले अविलम्ब बंद किये जाएँ तथा अब तक हुए भारी जानो-माल की तबाही के लिए ट्रंप-नेतान्याहू विश्व की जनता से सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगें। 

हर मामले में हिन्दू-मुसलमान राजनीति” के जानलेवा दिमागी-वायरस के एडिक्ट “हाईली एडवांस्ड-हाईटेक सुविधासंपन्न ताली-थाली बजानेवाले” नागरिक समूह जो बेज़ार बना बैठा था कि ‘खाड़ी क्षेत्र के रक्त-रंजित तनाव’ से उसे क्या लेना? मामला तो विश्व-आका और फादरलैंड बनाम मुस्लिम देश का है, अब उस आग की तपिश जब उसे घेरकर असहाय बनाने लगी है तो बेचैनी शुरू हो गयी है। उधर, देश के राजा ने भी कह दो-टूक अंदाज़ में कह दिया है कि- “कोरोना-काल में जैसे एकजुट हुए थे (बेबसी झेले थे), वैसे ही तैयार रहना है! अर्थात “आपदा में अवसर” बनाने की कवायद में लग जाना है। सरकार के प्रवक्ताओं द्वारा हर दिन प्रेस-वार्ता करके ऐलानिया कहा जा रहा है- “ऑल ईज़ वेल” पैनिक न होवें! जबकि खुद सरकार ने ही “एस्मा” लगाकर और गैस के दाम बढ़ाकर विपत्ति आने का शोर मचाया। नतीजतन परेशान-हाल जी रहे आम लोगों में बदहवास होने लगे हैं। 

दुनिया भर के अमनपसंद लोगों ने खुली आँखों से देखा कि कैसे “स्वयंभू विश्व-आका और उसके दुलारे देश ने मिलकर ईरान पर हमला बोलकर उसके बड़े नेताओं से लेकर मासूम स्कूली बच्चियों तक का संहार किया। जानो-माल की हो रही तबाही के लिए “वॉर फॉर फन” बताकर हर दिन जीत के दावे किये जा रहे हैं। 

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार, संंस्कृतिकर्मी और राजनीतिक कार्यकर्ता हैं।)

 

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