कटाक्ष: आई गुरु का नाम बदनाम ना करो!
देखी, देखी, इन मोदी विरोधियों की करतूत देखी। मोदी जी की छवि खराब करने के चक्कर में, देश को ही बदनाम कर दिया और वह भी अमृतकाल में। बताइए, बनियान पहन कर प्रदर्शन करने पहुंच गए। और प्रदर्शन भी कहां? जहां मोदी जी ने इतनी मेहनत से इतना बड़ा मेला लगाया था और सारी दुनिया के एआई उर्फ कृत्रिम मेधा वालों को जुटाया था कि आएं और विश्व गुरु की आई / आई का जलवा देखें। पर विरोधियों ने बना-बनाया खेल बिगाड़ दिया बल्कि देश को ही बदनाम कर दिया।
देखना था, विश्व गुरु का एआई का जलवा, जहां बच्चा पहला शब्द ही आई बोलता है या एआई बोलता है और दुनिया ने देखे अधनंगे नौजवान; बदन के ऊपर के हिस्से पर सिर्फ बनियान या टी शर्ट पहने हुए और कई तो नंगे बदन हाथों में झंडे की तरह टी शर्ट उठाए हुए। और बनियान भी साफ-सफेद नहीं, उन पर भी नारे लिखे हुए। और तो और मोदी जी की तस्वीर तक टेढ़ी-आड़ी, उस पर से कंप्रोमाइज्ड का नारा भी। करा दी ना सारी दुनिया में थू-थू। दुनिया को दिखाना था आई का विश्व गुरु और दीख गया अधनंगा भारत!
जिसे बाकी दुनिया की नजरों से छुपाने के लिए मोदी जी की सरकार अठारह-अठारह घंटे मेहनत करती है। जिसे सारी दुनिया की नजरों से छुपाने के लिए ऐसे मेलों-ठेलों से हफ्तों पहले से तमाम रेहड़ी-पटरी वालों को, ‘‘अदृश्य’’ कर देती है। दृश्य खराब करने वाली झुग्गी-झोंपडिय़ों से लेकर मोहल्लों तक को, कपड़े की दीवारों के पीछे गायब कर देती है। गोदी मीडिया को अतिरिक्त रोटियां डालकर चौबीसो घंटे सिर्फ मेला-मेला कराने के जरिए आंख ओट, पहाड़ ओट का इंतजाम करती है। उस सरकारी राज को देश के दुश्मनों ने सारी दुनिया को दिखा दिया और जहां सिर्फ मोदी जी की सोणी सी तस्वीर दीखनी थी, वहां उघड़े पेटों का मंजर दिखा दिया।
अदालत ने एकदम सही किया, जो इन देश को बदनाम करने वालों को फौरन पांच-पांच दिन के लिए पुलिस की हिरासत में भेज दिया। बल्कि हम तो कहेंगे कि पांच दिन तो बहुत कम हैं, इनके गुनाह को देखते हुए। इन्हें तो जिंदगी भर के लिए जेल में डाला जाना चाहिए। ऐसे देशद्रोहियों के साथ कोई नरमी बरतना ठीक है, क्या? यूएपीए का न सही, इन पर सरकारी राज विदेशियों पर जाहिर करने का मामला तो बनता ही है। एआई के मेले में, पेट का मुद्दा याद दिलाया है! इन्हें विश्व गुरु कभी माफ नहीं कर सकते। और यह सिर्फ दिल से माफ नहीं करने की बात नहीं है कि, दिल से माफी के बिना भी बंदा बाकी सब मौज-मजा करता रहे! इन्हें जेल से बाहर नहीं निकलने देना चाहिए। ऐसी दुर्गति की जानी चाहिए कि मोदी जी के मेले-ठेले में, सरकारी राज पर से पर्दा हटाने की फिर किसी की हिम्मत न हो।
वैसे शाह जी की पुलिस सही लाइन पर है। भारत को बदनाम करने की इस करतूत के पीछे जरूर गहरा षडयंत्र है। जो इसे जनतंत्र, जनतंत्र में प्रदर्शन के बुनियादी अधिकार, वगैरह से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, वे या तो बहुत भोले हैं या राष्ट्र विरोधी हैं। जिस मेले में दुनिया भर के लोगों को न्यौता गया हो, वहां प्रदर्शन-वदर्शन का अधिकार कैसा? और पेट दिखाने का अधिकार तो हर्गिज नहीं। दुनिया के मेले में तो सिर्फ देश का नाम होता है या बदनामी होती है। सिंपल है, मोदी जी नाम कर रहे थे, प्रदर्शन करने वाले बदनाम कर रहे थे! रही बात दूसरे देशों में ऐसे मेलों में विरोध प्रदर्शनों की जगह रहने की, तो ऐसा करने वाले देश नौसिखिया हैं, अभी जनतंत्र की पढ़ाई पढ़ रहे हैं। उनसे हमारे देश की क्या तुलना--हम डेमोक्रेसी की मम्मी वाले हैं!
फिर षडयंत्र रचने वालों के लिए कैसा जनतंत्र और कैसे जनतंत्र वाले अधिकार? और यह मामला तो विदेशी षडयंत्र का है। मोदी-शाह के राज में बाकी सब चीजों में तो आत्मनिर्भरता है, पर षडयंत्र सिर्फ विदेशी ही मंजूर हैं। खैर! यहां तो सीधे चीन का हाथ है। यह नहीं भूलें यह पेट-दिखाऊ प्रदर्शन, विश्व गुरु को बदनाम करने की पहली या अकेली कोशिश नहीं थी। इसी आई मेले में इससे पहले भी कोशिशें हुई थीं। गलगोटिया यूनिवर्सिटी का रोबो-कुकुर प्रकरण कौन भूल सकता है? उसके पीछे चीनी हाथ निकला था या नहीं? चीनियों ने पहले रोबो-कुकुर दिखाकर, भोले-भाले भारतीय विश्वविद्यालय को फंसाया। उन्हें यह कहकर भरमाया कि कुछ हजार डालर में कुकुर उनका। और तो और वे चाहें तो उसका अपने मन से नाम तक रख सकते हैं।
गलगोटिया वालों भी बड़ा दिल दिखाया और कुकुर को नया नाम भी दिया-ओरियोन। अपने ओरियोन को उन्होंने पूरे दिल से मेले में सब को दिखाया भी और तो और, आईटी मंत्री जी की रील के जरिए, सारी दुनिया को उसका जलवा दिखाया भी। हम भारतीयों ने चीनी कुकुर को इतना अपनापन दिया, इतना प्यार दिया। और बदले में चीनियों ने क्या किया? विश्वासघात! ऐन मेले के बीच सारी दुनिया को बता दिया कि भारतीय विश्वविद्यालय ने तो सिर्फ रोबो-कुकुर को नया नाम दिया है, उसे बनाया तो चीनी कंपनी ने है। जाहिर है कि यह सब विश्व गुरु को बदनाम करने का षडयंत्र था।
और यह षडयंत्र इतने पर ही खत्म नहीं हो गया। पर्ल्स चाइना नाम के जिस ट्विटर हैंडल ने रोबो कुकुर के चीनी मूल होने का शोर मचाकर, भारत को बदनाम करने की कोशिश की थी, उसी ने बाद में गलगोटिया के ही स्टाल पर प्रदर्शित एक ड्रोन के कोरियाई मूल का भी मुद्दा उठा दिया। पर मोदी जी के होते हुए कोई साजिश सफल कैसे हो जाती? मोदी जी ने निर्णायक कार्रवाई की। भरे दिल से उन्हें गलगोटिया विश्वविद्यालय को मेले से रुखसत जरूर करना पड़ा, पर उन्होंने षडयंत्र की जड़ पर फौरन आघात किया। मोदी जी ने पर्ल्स चाइना का ट्विटर हैंडल ही भारत में ब्लाक करा दिया। न रहेगा यह ट्विटर हैंडल और न उठेगा दिखायी गयी चीजों के, असली बनाने वाले का मुद्दा।
और हां! क्रोनोलॉजी समझिए। मोदी जी ने जब रोबो-कुकुर और ड्रोन की पैतृकता का शोर मचाकर, भारत के आई में भी विश्व गुरु होने के दावों को नुकसान पहुंचाने की इन कोशिशों को विफल कर दिया और आई में विश्व गुरु होने के भारत के दावे पर कोई आंच नहीं आयी, उनके बाद ही आया यह पेट दिखाऊ प्रदर्शन! और इसमें भी अमरीका के साथ ट्रेड डील के खिलाफ नारेबाजी। चीनी कनेक्शन के लिए, इससे बढक़र दूसरा कोई सबूत क्या होगा?
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोक लहर के संपादक हैं।)
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