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ख़बरों के आगे-पीछे: अमेरिकी विदेश मंत्री के लिए प्रोटोकॉल ताक पर

वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन अपने साप्ताहिक कॉलम में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा समेत भारत के कई राज्यों की राजनीति पर बात कर रहे हैं।
Marco Rubio-Modi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करते अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो पिछले सप्ताह भारत के दौरे पर थे। वे जब दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उतरे तो वहां की तस्वीरें देख कर भाजपा के इकोसिस्टम ने सोशल मीडिया में ब-च कर प्रचारित किया कि भारत ने अमेरिका को औकात बता दी। अमेरिकी विदेश मंत्री की आगवानी करने सिर्फ अमेरिकी राजदूत और भारत सरकार के दो जूनियर अधिकारी पहुंचे थे। 

सवाल है कि क्या किसी देश का विदेश मंत्री आता है तो भारत के विदेश मंत्री या प्रधानमंत्री उसको रिसीव करने जाते हैं? प्रोटोकॉल के तहत ही रुबियो को हवाईअड्डे पर रिसीव किया गया। लेकिन उसके बाद जो हुई वह अभूतपूर्व था। अमेरिकी विदेश मंत्री हवाई अड्डे से निकले और दनदनाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचे। ऐसा लग रहा है, जैसे वहां प्रधानमंत्री पलक पांवड़े बिछाए उनका इंतजार कर रहे थे। वहां रुबियो ने प्रधानमंत्री के साथ एक घंटे तक दोपक्षीय वार्ता की, जिसके बारे में बताया गया कि ऊर्जा सुरक्षा से लेकर तकनीक, व्यापार और पश्चिम एशिया के संकट के बारे में बात हुई। 

सोचने वाली बात है कि यह प्रोटोकॉल का कितना बड़ा उल्लंघन है कि भारत का प्रधानमंत्री किसी देश के विदेश मंत्री के साथ दोपक्षीय वार्ता कर रहा है? आमतौर पर किसी देश का विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आता है या भारत के विदेश मंत्री किसी देश के दौरे पर जाते है तो उनकी बात अपने समकक्ष से होती है। इस लिहाज से रुबियो की बात जयशंकर से होनी चाहिए थी। ऐसा कभी नहीं होता है कि प्रधानमंत्री किसी देश के विदेश मंत्री के साथ दोपक्षीय वार्ता करे।

भाजपा का ऑपरेशन केरलम शुरू 

भारतीय जनता पार्टी का ऑपरेशन केरलम शुरू हो गया है। उसे लग रहा है कि जब तक केरलम में त्रिकोणात्मक लड़ाई होगी और लेफ्ट की मौजूदगी बनी रहेगी तब तक भाजपा के लिए स्कोप नहीं बनेगा। दो चुनावों में उसने देख लिया है कि उसका वोट 12 फीसदी से ऊपर नहीं जा रहा है। लोकसभा चुनाव में जरूर थोड़ा ज्यादा वोट मिला लेकिन विधानसभा में केरलम के लोग अब भी कांग्रेस और सीपीएम गठबंधन के बीच रिवॉल्विंग डोर पोलिटिक्स के साथ है। 

भाजपा को यह भी पता है कि केरलम के 55 फीसदी हिंदू मतदाताओं में से ज्यादातर का रुझान लेफ्ट यानी सीपीएम गठबंधन की ओर है। इसीलिए ऑपरेशन केरलम के तहत सीपीएम को निशाना बनाया गया है। राज्य में सीपीएम के सबसे बड़े नेता और लगातार दो बार मुख्यमंत्री रहे पिनरायी विजयन के यहां प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के छापे से इसका संकेत मिलता है। 

यह मामला विजयन की बेटी की कंपनी से जुड़ा है। विजयन पर यह आरोप पहले लगा था कि उन्होंने अपनी बेटी वीणा के पति को राज्य सरकार में मंत्री बनाया। फिर वीणा की कंपनी को बिना काम कराए भुगतान का मामला आया। अगर परिवारवाद और भ्रष्टाचार के आरोप से लेफ्ट कमजोर होता है तो अपने आप भाजपा के लिए जगह बनेगी। गौरतलब है कि लेफ्ट नेताओं खास कर विजयन के हिंदू वोटों पर ज्यादा फोकस करने का नुकसान लेफ्ट को हुआ। ईसाई और मुस्लिम वोट कांग्रेस की ओर गोलबंद हुआ। अगर हिंदू वोट लेफ्ट से टूट कर भाजपा की ओर आता है तो भाजपा और कांग्रेस का आमने सामने का मुकाबला बनेगा, जिसमें भाजपा को फायदे की संभावना दिख रही है।

तमिलनाडु में अन्ना डीएमके पर ख़तरा

आमतौर पर विपक्षी पार्टियां अपने विधायकों-सांसदों को भाजपा द्वारा तोड़े जाने को ऑपरेशन लोटस ही कहती हैं। अब तमिलनाडु में इसी तर्ज पर एक ऑपरेशन की चर्चा है, जिसका नाम है ऑपरेशन 'एल’। यहां 'एल’ का मतलब है लॉटरी या लीमा या लीव। इस ऑपरेशन के चलते ई. पलानीसामी की पार्टी अन्ना डीएमके का अस्तित्व खतरे में है। पहले तो विधानसभा चुनाव के तत्काल बाद उसके 47 में से 30 विधायकों ने बगावत कर विश्वास प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री जोसेफ विजय को समर्थन दे दिया। अब बचे 17 में से चार विधायकों ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है। ये चारों विधायक अब विजय की पार्टी टीवीके में शामिल होकर उसके टिकट पर उपचुनाव लड़ेंगे। सबसे ज्यादा दिलचस्प मामला लॉटरी और लीमा का है। गौरतलब है कि लॉटरी किंग के नाम से मशहूर सैंटियागो मार्टिन की पत्नी का नाम लीमा रोज मार्टिन है। वे अन्ना डीएमके की टिकट पर विधानसभा का चुनाव जीती हैं। उनके दामाद आधव अर्जुन टीवीके के नेता है और विजय की सरकार में मंत्री है। 

माना जा रहा है कि आधव अर्जुन और उनकी सास लीमा रोज मार्टिन अन्ना डीएमके को तोड़ने का अभियान चला रहे हैं। इस अभियान का मकसद टीवीके को अकेले दम पर बहुमत दिलाना है। अभी टीवीके की 107 सीटें हैं। मुख्यमंत्री विजय दो सीटों से जीते थे। एक सीट से उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। सो, अब पांच सीटें खाली हैं, जिन पर उपचुनाव होगा। जल्दी ही कुछ और विधायकों का इस्तीफा होगा। बहुमत का आंकड़ा 118 का है। यानी कम से कम 11 सीटें और जीतने की जरुरत हैं।

अब यूपीएससी के छात्रों की परेशानी

समझ में नहीं आ रहा है कि सरकार और उसकी एजेंसियां शिक्षा व छात्रों के साथ क्या करना चाहती है? 12वीं की परीक्षा में कॉपियों की दोबारा जांच के चक्कर में इस समय लाखों छात्र भटक रहे हैं तो नीट के करीब 23 लाख छात्रों की किस्मत भी अधर में लटका दी गई है। अब सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे है। रविवार, 24 मई को संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की आईएएस, आईपीएस सहित दूसरी केंद्रीय सेवाओं के लिए प्रारंभिक परीक्षा हुई। परीक्षा के बाद ही प्रश्न पत्र को लेकर सवाल उठने लगे। ऐसा लग रहा है कि सारे प्रयोग सरकार शिक्षा के क्षेत्र में ही करना चाहती है। 

बताया जा रहा है कि इस साल यूपीएससी का पेपर इतना भारी था कि ज्यादातर छात्रों को समझ ही नहीं आया। इतना मुश्किल पेपर सेट करने के फैसले का बचाव करते हुए कई लोगों ने कहा कि छात्रों को कोचिंग सेंटर वालों के चंगुल से बचाने के लिए इस तरह का पेपर सेट किया गया। लेकिन ज्यादातर लोगों ने लिखा कि इस बार यूपीएससी बनाम अभ्यर्थी हो गया था। यह भी कहा गया कि अगर पेपर सेट करने वालों को भी इस परीक्षा में बैठा दिया जाता तो वे 30 फीसदी से ज्यादा सवाल नहीं हल कर पाते।

कांग्रेस बंगाल में शहीद दिवस पर दावा करेगी

ममता बनर्जी भले कह रही हैं कि जून में विपक्षी गठबंधन की बैठक होगी। उनकी पार्टी के नेता कांग्रेस के साथ फिर से सद्भाव बनाने की कोशिश भी कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस अभी उनके साथ सद्भाव दिखाने को तैयार नहीं है। बताया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में सत्ता बाहर होने के बाद तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ कांग्रेस ने झंडा बुलंद किया है। प्रदेश कांग्रेस के नेता तृणमूल के जिला व पंचायत स्तर के कई कार्यालयों पर कांग्रेस का झंडा लगा रहे हैं। उनका कहना है कि ये सब पहले कांग्रेस के कार्यालय थे, जिन पर ममता बनर्जी की पार्टी ने कब्जा कर लिया था। 

इस बीच खबर है कि ममता बनर्जी हर साल शहीद दिवस का जो कार्यक्रम करती हैं, उस पर भी कांग्रेस दावा करेगी। गौरतलब है कि 21 जुलाई 1993 को ममता बनर्जी के नेतृत्व में एक प्रदर्शन के दौरान कोलकाता में युवा कांग्रेस के 13 कार्यकर्ता पुलिस फायरिंग में मारे गए थे। कांग्रेस का कहना है कि मारे गए कार्यकर्ता युवा कांग्रेस के थे इसलिए उनकी शहादत पर कार्यक्रम भी कांग्रेस करेगी। 1998 में कांग्रेस से अलग होकर नई पार्टी बनाने से पहले ममता बनर्जी कांग्रेस के बैनर तले ही शहीद दिवस का कार्यक्रम करती थी। बाद में वे तृणमूल कांग्रेस के बैनर तले यह कार्यक्रम करने लगी और कांग्रेस ने धीरे-धीरे कोई भी कार्यक्रम करना बंद कर दिया। अब कांग्रेस इस पर दावा कर रही है और बताया जा रहा है कि इस साल 21 जुलाई को कांग्रेस भी कार्यक्रम करेगी।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

 

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