कटाक्ष : बाक़ी सब तो चंगा सी!
ये जॉर्ज सोरोस क्या बिल्कुल ही पगला गया है? नहीं तो ये विपक्ष वाले कैसे शिक्षा मंत्री जी का इस्तीफा मांग रहे हैं? और वह भी पेपर लीक जैसी मामूली बात के लिए?
नहीं, हम यह नहीं कह रहे हैं कि भारत में विपक्ष वालों को अपने आप से शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगने का आइडिया आ ही नहीं सकता था। बेशक, विपक्ष वालों को अपने आप भी धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगने का आइडिया आ सकता था। नीट पेपर लीक जैसी मामूली बात के लिए इस्तीफा मांगने का आइडिया भी आ सकता था।
सच पूछिए तो नीट पेपर लीक के लिए इस्तीफा मांगने का आइडिया तो वैसे भी इसलिए भी आ ही सकता था कि नीट पेपर के लीक होने से धर्मेंद्र प्रधान का रिश्ता ठीक-ठाक पुराना है। दो साल पहले भी ऐसे ही नीट का पेपर लीक हुआ था। उस समय भी ऐसे ही हल्ला-गुल्ला हुआ था। उस समय भी सीबीआई समेत कई तरह की जांच हुई थी। उस समय भी पेपर लीक गिरोह की गिरफ्तारियां हुई थीं। उस समय भी विपक्ष वालों ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। और उस समय भी धर्मेंद्र प्रधान ने सिर्फ इस्तीफा देने से ही नहीं, पेपर लीक के पेपर लीक होने से भी इंकार कर दिया था।
अब अगर नीट का पेपर, लीक होने की अपनी आदत छोड़ने से इंकार कर सकता है, अगर विपक्ष मंत्री का इस्तीफा मांगने की अपनी आदत बनाए रख सकता है, तो क्या मोदी जी पेपर लीक के सारे शोर के बाद भी, धर्मेंद्र प्रधान को मंत्री का मंत्री ही नहीं, शिक्षा का शिक्षा मंत्री भी नहीं बनाए रह सकते हैं?
बल्कि हम तो कहेंगे बनाए रह सकते हैं का तो सवाल ही गलत है। मोदी है तो कुछ भी मुमकिन है! पर विपक्ष वालों को भी तो इस्तीफा मांगने से पहले कुछ सोचना चाहिए– मोदी जी को पेपर लीक जैसी मामूली बात के लिए, अपने शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेना चाहिए क्या?
अब प्लीज मोदी जी के विरोधियों के साथ खड़े होकर आप यह मत कहने लगिएगा कि धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा लेने के लिए मोदी जी को बार-बार मौके ही नहीं दिए हैं, कई-कई ऑप्शन भी दिए हैं।
नीट पेपर लीक के लिए इस्तीफा लेना पसंद नहीं आए, तो सीबीएसई की 12वीं कक्षा की परीक्षा की कॉपी जांच महा-गड़बड़ी के लिए शिक्षा मंत्री का ही इस्तीफा ले सकते हैं। नीट का मामला अगर 22 लाख बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का था, तो सीबीएसई का भी उससे थोड़े ही कम, 18 लाख बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ का था। सीबीएसई के लिए भी इस्तीफा लेने पर मन नहीं ठहरे तो, मोदी जी एसएससी परीक्षा घपले के लिए भी उन्हीं प्रधान का इस्तीफा ले सकते हैं। और वह भी नहीं जंचे तो ताज़ातरीन सीयूईटी परीक्षा गड़बड़ी के लिए भी उन्हीं प्रधान का इस्तीफा ले सकते हैं।
बेशक, मोदी जी इस्तीफा ले सकते हैं। इनमें से किसी भी मामले में इस्तीफा ले सकते हैं। लेकिन, जैसे एक कारण, वैसे ही चार कारण, मोदी जी इस्तीफा लेने से इंकार भी तो कर सकते हैं। और इंकार भी क्यों करना? मोदी जी इस्तीफे की मांग सुनें ही क्यों? बापू के तीन बंदरों का सन्देश मोदी जी कभी नहीं भूलते।
खैर जार्ज सोरोस पर लौटें। देसी विपक्ष वालों को भले ही याद नहीं हो, पर जार्ज सोरोस को बखूबी याद होगा कि मोदी जी के राज और मंत्रियों के इस्तीफे में और वह भी तब जब विपक्ष इस्तीफा मांग रहा हो, कैसा छत्तीस का आंकड़ा है। मोदी जी की तीसरी पारी चल रही है, जबकि राजनाथ सिंह ने उनकी पहली पारी के भी शुरू में ही एलान कर दिया था कि डेमोक्रेसी में विपक्ष, मंत्रियों का इस्तीफा मांगने के लिए आजाद है, पर मोदी जी के राज में इस्तीफे नहीं होते। और विपक्ष के मांगने से इस्तीफे तो हर्गिज नहीं होते। विपक्ष के मांगने से इस्तीफे पहले वाली कमजोर सरकारों में हुआ करते थे। मोदी जी की मजबूत सरकार और विपक्ष की मांगे से इस्तीफा, सवाल ही नहीं उठता है।
राजपूती वचन मोदी जी ने डटकर निभाया है, न विपक्ष की मांग पर और न लोक-लाज के डर से, अपनी सरकार से एक भी मंत्री को नहीं हटाया है। जैसे बारह साल में मोदी जी ने देश में तो देश में, परदेस तक में एक भी खुली प्रेस कान्फ्रेंस न करने का धर्म निभाया है, वैसे ही हर दागी मंत्री का साथ निभाया है। सोरोस को मोदी जी का यह प्रण बखूबी याद होगा, फिर भी विपक्षी धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं? आखिर क्यों? जाहिर है कि षडयंत्र है और वह भी विदेशी; आत्मनिर्भरता का पेटेंट तो मोदी जी के पास है।
जार्ज सोरोस का षडयंत्र बहुत गहरा है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग सिर्फ पेपर लीक वगैरह के लिए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग नहीं है। बात यहां से निकल जरूर रही है, पर दूर तक जाएगी। क्या कल को रुपए से लेकर अर्थव्यवस्था तक, सब के तेजी से लुढक़ने के लिए निर्मला ताई के इस्तीफे की मांग नहीं आएगी? और उससे पहले ही, एप्सटीन मामले से लेकर, तेल-गैस तंगी तक के लिए, तेल मंत्री पुरी साहब के इस्तीफे की मांग।
उसी के आस-पास दुनिया भर में भारत का डंका बजवाने की जगह, डंका फटने का ही डंका बजवाने के लिए, लेजर आई वाले विदेश मंत्री के इस्तीफे की मांग। अमरीका के साथ व्यापार सौदे के जरिए, सिर्फ अमरीका को ग्रेट अगेन और भारत को गरीब अगेन बनाने का रास्ता खोलने के लिए, वाणिज्य मंत्री गोयल के इस्तीफे की मांग की मांग। रेल दुर्घटनाओं को आपदा की जगह रील बनाने का अवसर बनाने के लिए, रेल से लेकर सूचना, प्रसारण और आइटी तक के मंत्री, वैष्णव के इस्तीफे की मांग। संसद को सरकारी डिपार्टमेंट बनाकर रख देने के लिए, संसदीय कार्यमंत्री, रिजिजू के इस्तीफे की मांग। सब कुछ असली राष्ट्र सेठ के नाम कराने के लिए, उद्योग मंत्री के इस्तीफे की मांग। ऑपरेशन सिंदूर के बाद, पाकिस्तान को और शेर बनाने के लिए, रक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग।
फलां मंत्री के इस्तीफे की मांग, ढिमकां मंत्री के इस्तीफे की मांग। और आखिर में, जहां-जहां चुनाव हों वहां हिंदुओं को खतरे में पड़वाने के लिए, गृहमंत्री शाह के भी इस्तीफे की मांग। मांग निकलेगी तो छोटा भाई तक ही थोड़े ही रुकेगी, मोटा भाई तक जाएगी, जबकि बाकी सब तो चंगा सी। यही तो है सोरोस का असली षडयंत्र।
इसीलिए, कितनी ही बदनामी हो जाए, मोदी जी किसी मंत्री का इस्तीफा नहीं लेंगे। मोदी जी अपने इस्तीफे की एंटीनेशनल मांग का रास्ता हर्गिज नहीं खोलेंगे? और क्यों खोलें, एक मामूली पेपर लीक के लिए; कुल 50 लाख बच्चों की, उनके परिवारों की परेशानी के लिए ; बाकी सब तो चंगा सी।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोक लहर के संपादक हैं।)
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