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झारखंड: वेनेज़ुएला के समर्थन में ‘अमेरिकी साम्राज्यवाद विरोधी मार्च’

झारखंड की राजधानी रांची में गैर-भाजपा विपक्षी दलों ने वेनेजुएला के समर्थन में ‘अमेरिकी साम्राज्यवाद विरोधी मार्च’ निकालकर अपना कड़ा विरोध जताया है।
jharkhand protest

वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र की हिमायती व्यापक शक्तियां आज चिंतित हैं कि- खुद लोकतंत्र का इस्तेमाल कर सत्ता में काबिज़ होकर दूसरे के लोकतंत्र और स्वायत्तता कुचल देने की तानाशाह प्रवृति पर कैसे लगाम लगाई जाए। 

क्योंकि पूरी दुनिया ने खुली आँखों से देखा कि कैसे वेनेजुएला में अपने सैन्य-गुर्गों का इस्तेमाल कर ट्रंप ने अपनी तानाशाही-दादागिरी दिखाई। एक स्वतंत्र और संप्रभुतासंपन्न राष्ट्र के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी का अपहरण कर अमेरिका स्थित काल कोठरी में क़ैद कर रखा है। अनाप-शनाप बयानों से खुद को वहां का नियंता घोषित कर उस देश की तेल सम्पदा पर क़ब्ज़ा करने पर आमादा है।

इसके ख़िलाफ़ पूरी दुनिया में कई कई जगह पर लोग हजारों की तादाद में सड़कों पर उतरकर संगठित प्रतिवाद कर रहें हैं और यह सिलसिला निरंतर जारी है।  

इसी कड़ी में झारखंड की राजधानी रांची में गैर-भाजपा विपक्षी दलों ने वेनेजुएला के समर्थन में ‘अमेरिकी साम्राज्यवाद विरोधी मार्च’ निकालकर अपना कड़ा विरोध जताया है। प्रदेश के राज्यपाल के माध्यम से देश के राष्ट्रपति को पत्र भेजकर भारत सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए वेनेजुएला की संप्रभुता के पक्ष में खड़ा होने की मांग की।

भाकपा माले, सीपीआई और सीपीएम इत्यादि प्रमुख वामदलों के साथ साथ राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा, समाजवादी पार्टी, टीएमसी व कांग्रेस के संयुक्त तत्वाधान में 22 जनवरी को यह विरोध मार्च निकाला गया। जिसमें कई अन्य सामाजिक जनसंगठनों और वाम छात्र-महिला संगठनों ने भी अपनी सक्रिय भागीदारी निभायी।  

हाथों में अमेरिका विरोधी पोस्टर/बैनर लिए- “अमेरिकी साम्राज्यवाद मुर्दाबाद, अमेरिकी साम्राज्यवाद वेनेजुएला से दूर हटो, राष्ट्रपति मादुरो को अविलम्ब रिहा करो। तेल के लिए खून बहाना बंद करो, भारत सरकार चुप्पी तोड़ो!” जैसे  जोशपूर्ण नारों के साथ विरोध-मार्च किया।

रांची स्थित सैनिक बाज़ार परिसर से निकाले गए इस मार्च को राजभवन पहुंचना था लेकिन उसके पहले ही पुलिस द्वारा बैरिकेड लगाकर रोक दिया गया। फलतः पुलिस द्वारा रोके गये स्थल पर ही विरोध सभा की गयी। 

विरोध सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले केन्द्रीय कमिटी सदस्य और एक्टू के प्रदेश महासचिव शुभेंदु सेन ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा की गयी कार्रवाई पूरी दुनिया को तीसरे विश्वयुद्ध की तरफ धकेल रही है। जिससे वैश्विक स्तर पर शांति और लोकतंत्र के लिए गंभीर ख़तरा उत्पन्न हो गया है। अमेरिकी साम्राज्यवाद की दादागिरी आज दुनिया के किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र को मंजूर नहीं है। 

झारखंड की राज्यसभा सदस्य एवं चर्चित लेखिका महुआ माजी ने कहा कि ट्रंप आज सबको दबा रहे हैं। एक स्वतंत्र देश के राष्ट्रपति की आँखों पर पट्टी बांधकर कैदी बना लेना पूरी इस सदी की सबसे निंदनीय घटना है। उनकी मनमानी इतनी बढ़ गयी है “विश्वगुरु” भारत जैसे देश को भी वे दबा रहे हैं। जिसका एकजुट विरोध करना ही होगा। उन्होंने कहा कि वे संसद में भी इस मुद्दे को उठाएंगी।

झामुमो प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि यह संयुक्त विरोध अमेरिकी तानाशाही और छोटे देशों की चुनी गयी सरकारों पर की जा रही दादागिरी के खिलाफ है। भारत की सरकार चुप है क्योंकि वह भी यहाँ चुनी हुई सरकारों को गिराने में लगी हुई है। इसलिए इंडिया ब्लॉक की सभी पार्टियों द्वारा गंभीर चिंता जताए जाने के बावजूद ग़ज़ा और वेनेजुएला की घटनाओं पर भारत सरकार की चुप्पी निंदनीय है। 

विरोध सभा को ‘मार्च’ में शामिल सभी दलों व संगठनों के नेताओं ने भी संबोधित किया। सभी ने एक स्वर से अमेरिकी दादागिरी और ट्रंप की तानाशाही का पुरज़ोर विरोध किया। वक्ताओं ने कहा कि अमेरिका-ट्रम्प द्वारा लगाए गए प्रतिबन्ध, धमकियां और आर्थिक नाकेबंदी आंतर्राष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र संघ चार्टर का उल्लंघन है। जिसका सबसे अधिक बुरा असर मजदूर, किसानों और आम जनता पर पड़ता है। यह विरोध वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने की अमेरिकी साजिश के विरोध में है। वैश्विक स्तर पर जो काम अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप कर रहा है, वही काम इस देश की वर्तमान केंद्र की सरकार राज्य सरकारों के साथ कर रही है, जो साम्राज्यवादविरोधी सारे दल किसी कीमत पर नहीं होने देंगे।  

वामदलों के वक्ताओं ने विशेष ज़ोर देकर कहा कि ट्रंप की गुंडागर्दी नहीं चलेगी। भारत सरकार अमेरिकी दबाव में आना छोड़ वेनेजुएला के पक्ष में खुलकर खड़ा हो। उसे ट्रंप और अमेरिका का पिछलग्गू बनने की नीति छोड़नी होगी। उन्होंने मांग की कि किसी को भी संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा तय किये गए निर्देशों से छेड़छाड़ करने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए और न ही किसी बड़ी शक्ति को अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने की अनुमति दी जानी चाहिए। 

सभा की समाप्ति उपरांत राज्यपाल महोदय के माधाम से देश के राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया। जिसमें भारत सरकार से अमेरिकी आक्रमण और प्रतिबंधों का कड़ा विरोध करने, गुटनिरपेक्ष नीति को मजबूत करने और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर वेनेजुएला समेत सभी छोटे राष्ट्रों की संप्रभुता और उनके स्वतंत्र आत्मनिर्णय के अधिकार के पक्ष में खड़ा होने की मांग की गयी। साथ ही यह भी मांग की गयी कि भारत सरकार वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की ज़ल्द से जल्द रिहाई सुनिश्चित करने और वेनेजुएला की संप्रभुता के लिए अमेरिकी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ जनमत बनाने में सक्रीय रूप से आगे आये। 

सभा की ओर से यह भी आह्वान किया गया कि राष्ट्रपति के प्रेषित की गयी मांगों के पूरे नहीं किये जाने तक इंडिया ब्लॉक के दलों का संयुक्त संघर्ष जारी रखा जाएगा। साथ ही अमेरिकी साम्राज्यवाद के खिलाफ व्यापाक जनमत तैयार करने की मुहिम को और अधिक व्यापक किया जाएगा।   

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार, संस्कृतिकर्मी और राजनीतिक कार्यकर्ता हैं।)     

 

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